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पानी की खपत और संसाधनों का ब्यौरा देंगे सरकारी विभाग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Mar 2022 02:21 AM IST
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Government departments will give details of water consumption and resources
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। सरकारी विभागों को पानी की खपत और जल संसाधनों ब्यौरा देना होगा। ताकि उसी के आधार पर जल बचाने की योजना तैयार की जा सके। वहीं अब एसटीपी से उपचारित होने वाला पानी भी व्यर्थ नहीं बहेगा। 25 प्रतिशत पानी सिंचाई और 75 प्रतिशत पानी निर्माण कार्य व उद्योगों में इस्तेमाल किया जाएगा।
उपायुक्त अनीश यादव ने इस संदर्भ में निर्देश दिए हैं। वे बुधवार को लघु सचिवालय में जल संरक्षण एवं प्रबंधन को लेकर जिला स्तरीय जल संसाधन योजना समिति की बैठक ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को तीन दिन में पानी की खपत का ब्यौरा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसानों को फसल विविधिकरण अपनाने के बारे में जागरूक करें ताकि भूजल को बचाने के लिए पानी की कम लागत वाली फसलों का उत्पादन हो। धान की सीधी बिजाई और टपका सिंचाई विधि को अपनाने के लिए किसानों को जागरू करें। उन्होंने कहा कि बरसाती पानी के प्रबंधन के लिए भूजल रिचार्ज ट्यूबवेल लगवाएं और जो लग चुके हैं, उनकी सही देखभाल की जाए। सरकारी भवनों, औद्योगिक इकाईयों व संस्थानों जैसी सभी जगहों पर रेन वॉटर हार्वेस्टर बनाएं। जो लोग बिना अनुमति के सबमर्सिबल लगाते हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी। ब्यूरो
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इन विभागों को देना होगा पानी का ब्यौरा
जिला जल संसाधन योजना के तहत विशेष रूप से हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, शहरी स्थानीय निकायों, शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थान, वन विभाग, मत्स्य विभाग, पशुपालन विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, कृषि, बागवानी, औद्योगिक क्षेत्र में प्रयोग होने वाले स्वच्छ पानी और गंदे पानी के प्रबंधन को लेकर डाटा तैयार किया जाना शामिल है। विभाग तीन दिनों में डाटा तैयार करके सिंचाई विभाग को भेजेंगे।
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औद्योगिक इकाईयों का होगा सर्वे
जिला औद्योगिक केन्द्र की संयुक्त निदेशक को उपायुक्त ने निर्देश दिए कि वे औद्योगिक इकाईयों का सर्वे करवाएं और ट्यूबवेलों की रिपोर्ट तैयार करें। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी बरसाती पानी के समुचित प्रबंधन के लिए वॉटर टैंक बनाने की योजना तैयार करेंगे ताकि ज्यादातर बरसाती पानी का फसलों में प्रयोग किया जा सके।
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