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व्यावसायिक वाहन की फिटनेस कराने से पहले लेना होगा जेंडर संवेदीकरण का प्रशिक्षण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Feb 2022 02:15 AM IST
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Gender sensitization training will have to be taken before getting the fitness of commercial vehicle
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। अब व्यावसायिक वाहन की फिटनेस कराने से पहले चालक को जेंडर संवेदीकरण का प्रशिक्षण लेना होगा। इस प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है। नए बस अड्डे में इसके लिए केंद्र खुल गया है। जहां चालकों को दो घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दिल्ली के बाद हरियाणा में इस तरह की व्यवस्था वाला करनाल प्रदेश का चौथा जिला है।
सरकार और आईजीएल के संयुक्त तत्वावधान में मानस फाउंडेशन की ओर से निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। सोमवार को नए बस अड्डे पर प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत हुई। बराबरी की डगर सुरक्षित सफर कार्यक्रम के तहत शुरू हुए प्रशिक्षण के उद्घाटन कार्यक्रम में जिला परिवहन अधिकारी उर्मिल श्योकंद, सीडीपीओ मधु पाठक, रोडवेज की सहायक अटॉर्नी डॉ. कविता, आरटीए सहायक सचिव सतीश जैन और एमवीओ अनिल विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित करके केंद्र का उद्घाटन किया। अधिकारियों ने प्रशिक्षण के दौरान दिखाए जाने वाले वीडियो भी देखे।
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न हो निर्भया कांड जैसी वारदात, इसलिए शुरू हुआ अभियान
फाउंडेशन के समन्वयक एवं प्रशिक्षक अर्चूता नंदा ने बताया कि 2014 में दिल्ली सरकार ने इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की थी। निर्भया कांड जैसी वारदात दोबारा न हो इसलिए चालकों को जेंडर संवेदीकरण का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर ही ही व्यवस्था हरियाणा में शुरू हुई है। अब से पहले रेवाड़ी, गुरुग्राम और कैथल में ये केंद्र चल रहे हैं।
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सात दिन मान्य होगा प्रमाणपत्र
प्रशिक्षण दो घंटे का दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र में सुबह 9 से 11 और दोपहर 12 से दो बजे तक कक्षा लगाई जाएगी। वाहन की फिटनेस जांच कराने से पहले प्रशिक्षण लिया जा सकता है। प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र सात दिन के लिए मान्य होगा। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, नए वाहन की फिटनेस जांच दो साल में एक बार करानी होती है। करनाल में सेक्टर-32 के मैदान में सोमवार और शुक्रवार को फिटनेस जांच होती है।

महिला से बर्ताव और बात करने का तरीका भी सीखाएंगे
ज्यादातर महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ही सफर करती हैं। जहां उनके साथ अप्रिय घटनाएं घटती हैं। ऐसे में व्यावसायिक वाहनों में शामिल ट्रक, बस, टैक्सी, वैन, थ्री-व्हीलर और ई-रिक्शा के चालकों को दो घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सफर के दौरान महिला सवारी से बर्ताव और बात करने का तरीका भी बताया जाएगा। इसके अलावा चालक की महिला सवारी की सुरक्षा को लेकर क्या जिम्मेदारी है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी।
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