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चार शिक्षकों को मिलेगा राज्य शिक्षक पुरस्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 02:30 AM IST
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Four teachers will get State Teacher Award
Four teachers will get State Teacher Award
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। राज्य शिक्षक पुरस्कार-2021 के लिए जिले के चार शिक्षकों का चयन हुआ है। शिक्षकों के इस पुरस्कार के लिए चयन होने पर उनके स्कूल और घर में खुशी का माहौल है। चयनित शिक्षकों ने अपने इस पुरस्कार को बच्चों और स्टाफ को समर्पित किया है।
अमर उजाला से बातचीत में शिक्षकों ने कहा कि उनका लक्ष्य विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल बनाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए वे आगे भी कार्य करेंगे। जिन शिक्षकों का पुरस्कार के लिए चयन हुआ है, उनमें से किसी ने स्कूल की छात्र संख्या कई गुना बढ़ाई है तो किसी का पिछले कई वर्षों का परीक्षा परिणाम शानदार रहा है। इसके अलावा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में पुरस्कार और विभाग की योजनाओं को लागू कराने में भी उल्लेखनीय कार्य करने पर जिला स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं। इससे पहले 2020 में जिले के पांच शिक्षकों का इस पुरस्कार के लिए चयन हुआ था।
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रेणू मलिक , प्रिंसिपल, जीएसएसएस घीड़
उपलब्धि : सेक्टर-13 निवासी रेणू के स्कूल का परीक्षा परिणाम हमेशा 90 प्रतिशत से ऊपर रहा। बच्चों को पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा दिलाती हैं। एजूकेशन में पीएचडी किया है। अतिरिक्त कक्षाएं लगाने, लाइब्रेरी तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर भी कई बार संस्थाओं से सम्मानित हो चुकी हैं। 1991 में अहरकुराना पानीपत में कॉमर्स लेक्चरर के रूप में नियुक्ति हुई। दिसंबर 1991 में प्रेमनगर स्कूल में पोस्टिंग हो गई। यहीं पर पदोन्नति के बाद 2012 में प्रिंसिपल बनीं और नरूखेड़ी में पहली पोस्टिंग हुई। अब 2017 में घीड़ में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत हैं।
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लक्ष्य : शिक्षा के स्तर में सुधार होना चाहिए। बच्चे पढ़ाई में अच्छे रहें और उनका संपूर्ण विकास हो, इसके लिए लगातार कार्य करते रहेंगे।
रामनिवास सोलंकी, मुख्याध्यापक, जीपीएस प्रेमनगर
उपलब्धि : 2014 से इसी स्कूल में हैं। इससे पहले 2004 से जयसिंहपुरा स्कूल में रहे। मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण का खंड स्तर पर दो बार जयसिंहपुरा और दो बार प्रेमनगर स्कूल को पुरस्कार मिला। तीन बार उपायुक्त ने सम्मानित किया। एडीसी से भी स्वच्छता का खिताब ले चुके हैं। स्कूल में लगभग 800 बच्चे हैं। चार हाउस बनाकर उनमें गतिविधियां कराते हैं। अवॉर्ड का श्रेय स्टाफ को सहयोग और उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन को दिया। दो दिसंबर 1997 को असंध के रत्तक गांव में जेबीटी टीचर के रूप में पहली नियुक्ति हुई थी।
लक्ष्य : जो बच्चे आउट ऑफ स्कूल हैं, उनका सर्वे कर स्कूल लाने के लिए कार्य करेंगे ताकि वे भी मुख्यधारा में आएं।
अनीता रानी, हिंदी, जीएमएस हैबतपुर
उपलब्धि : कुरुक्षेत्र की विज कॉलोनी निवासी शिक्षिका ने कला उत्सव में पुरस्कार जीते। जिला स्तर पर दो बार नृत्य में प्रथम और पेंटिंग में तृतीय रहीं। राज्य स्तर पर मोनो एक्टिंग में भी प्रथम पुरस्कार जीता। निजी स्कूलों के 12 बच्चों को हैबतपुर के सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया। दिसंबर 1997 में बल्ला में पहली नियुक्ति हुई। नौकरी के साथ-साथ एमफिल किया। 2001 में गुढ़ा ट्रांसफर हुआ। इसके बाद 2005 से 2019 तक अंजनथली के स्कूल में सेवाएं दी। शुरुआत में 42 बच्चे थे। स्कूल भी मिडल से अब सीनियर सेकेंडरी है और 350 छात्र संख्या है। हैबतपुर में भी अच्छे कार्य पर सम्मानित हुईं। पति भारत भूषण भी इसी स्कूल में गणित के शिक्षक हैं। हरियाणा भूषण अवॉर्ड भी मिल चुका है।
लक्ष्य : बच्चों को भी उपलब्धि मिले और उन्हें अच्छा पढ़ाने का प्रयास करेंगीं।
डॉ. जीत सिंह मान, पीजीटी संस्कृत, जीएसएसएस कुटेल
उपलब्धि : सेक्टर-9 निवासी शिक्षक संस्कृत में पीएचडी हैं। अब तक का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा। स्कूल में विभाग की योजनाओं को लागू करने के लिए 2019 में उपायुक्त और एसीएस से भी सम्मानित हो चुके हैं। 2021 में स्कूल की छात्र संख्या 1100 तक करने पर एडीसी ने सम्मानित किया। बेटियों को बोर्ड की परीक्षा देने के लिए दूर न जाना पड़े, इसलिए 2018 से स्कूल को हरियाणा बोर्ड का परीक्षा केंद्र बनवाने की स्वीकृति दिलाई। 11 मार्च 1995 को लेक्चरर के रूप में सोनीपत के खुबडू गांव के स्कूल में पहली पोस्टिंग हुई। 2003 में नीलोखेड़ी स्कूल में आए। 2016 से कुटेल में कार्यरत हैं। 2021 में आठ माह प्रिंसिपल के रूप में भी कार्यभार संभाला।

लक्ष्य : लड़कियों को शिक्षित करने के लिए कार्य करते रहेंगे। संस्कृत टीचर होने के नाते सभ्यता संस्कृति का संदेश देंगे। मनु स्मृति और गीता का प्रचार करेंगे।

Four teachers will get State Teacher Award

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