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चार पुलिस वालों को कैद, जुर्माना
कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 19 Nov 2013 12:55 AM IST
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कुरुक्षेत्र में सेना के पूर्व कैप्टन को अवैध हिरासत में रखने और निर्वस्त्र करके बेरहमी पीटने के मामले में अदालत ने हरियाणा पुलिस के दो एसआई और एक हवलदार सहित चार पुलिस वालों को एक साल की सजा के आदेश दिए हैं।
यह आदेश कुरुक्षेत्र में न्यायाधीश सरिता कंबोज की अदालत ने सोमवार को दिए। चारों पुलिस वालों को अदालत ने अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई है।
अदालत ने आईपीसी की धारा-506 में 1-1 साल और 52 और 341 में में 6-6 माह कैद की सजा के अलावा तीनों धाराओं के तहत एक-एक हजार रुपये जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है।
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मामला करीब 11 साल एक माह पुराना है। शिकायत भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन एवं भारतीय किसान यूनियन के तत्कालीन मुख्य प्रदेश सलाहकार मायाराम ने की थी।
मायाराम का आरोप था कि 15 अक्तूबर 2002 को लाडवा थाना के तत्कालीन एसएचओ चंद्रपाल (एसआई), सिपाही जोगिंद्र सिंह, साहेब सिंह तथा देसराज सिंह गांव छपरा में याचिकाकर्ता के घर आए और उसे बताया कि कुरुक्षेत्र के एसपी ने उन्हें कुरुक्षेत्र बुलाया है। पुलिस टीम के साथ वह अपने गांव से कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में इन्होंने गाड़ी को लाडवा तहसील की गार्द ले गए और यहां अवैध रूप से हिरासत में बंध बनाकर निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा।
बताया गया है कि तत्कालीन इनेलो सरकार के दौरान शाहाबाद शुगर मिल के डायरेक्टर पद का चुनाव था। इस चुनाव में भारतीय किसान यूनियन के तत्कालीन और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी भी उम्मीदवार थे। सेवानिवृत्त कैप्टन के अनुसार सरकार के दबाव में चढू़नी को इस चुनाव में वोट नहीं डालने दी गई और सरकार समर्थित उम्मीदवार को गैर कानूनी ढंग से चुनाव जीता दिया गया।
सेवानिवृत्त कैप्टन के अनुसार उक्त घटना से करीब 15-20 दिन पहले गैर कानूनी ढंग से हुए चुनाव का भारतीय किसान यूनियन ने विरोध करने का निर्णय लिया था। इसके चलते शाहाबाद में आंदोलन चलाने की चेतावनी सरकार को दी गई थी। सरकार इस आंदोलन को विफल करना चाहती थी।
इसके चलते पुलिस ने गांव से उसे उठा लाई और अवैध रूप से हिरासत में रखकर पिटाई की और जान से मारने की धमकी भी दी थी।
पूर्व कैप्टन के मुताबिक उन्हें देश के कानून पर विश्वास था। इसलिए उन्होंने अदालत में उपरोक्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ अदालत में इस्तगासा दायर किया था और आज उन्हें इस मामले में न्याय मिल गया है।
अदालत ने चारों पुलिस वालों को दोषी मानते हुए अलग-अलग धाराओं के तहत कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों में तत्कालीन एसएचओ चंद्रपाल रिटायर हो चुका है, जबकि साहेब सिंह इस समय एसआई और जोगिंद्र सिंह तथा देसराज हवलदार के पद पर कार्यरत हैं।
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यह आदेश कुरुक्षेत्र में न्यायाधीश सरिता कंबोज की अदालत ने सोमवार को दिए। चारों पुलिस वालों को अदालत ने अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई है।
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अदालत ने आईपीसी की धारा-506 में 1-1 साल और 52 और 341 में में 6-6 माह कैद की सजा के अलावा तीनों धाराओं के तहत एक-एक हजार रुपये जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया है।
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मामला करीब 11 साल एक माह पुराना है। शिकायत भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन एवं भारतीय किसान यूनियन के तत्कालीन मुख्य प्रदेश सलाहकार मायाराम ने की थी।
मायाराम का आरोप था कि 15 अक्तूबर 2002 को लाडवा थाना के तत्कालीन एसएचओ चंद्रपाल (एसआई), सिपाही जोगिंद्र सिंह, साहेब सिंह तथा देसराज सिंह गांव छपरा में याचिकाकर्ता के घर आए और उसे बताया कि कुरुक्षेत्र के एसपी ने उन्हें कुरुक्षेत्र बुलाया है। पुलिस टीम के साथ वह अपने गांव से कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में इन्होंने गाड़ी को लाडवा तहसील की गार्द ले गए और यहां अवैध रूप से हिरासत में बंध बनाकर निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा।
बताया गया है कि तत्कालीन इनेलो सरकार के दौरान शाहाबाद शुगर मिल के डायरेक्टर पद का चुनाव था। इस चुनाव में भारतीय किसान यूनियन के तत्कालीन और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी भी उम्मीदवार थे। सेवानिवृत्त कैप्टन के अनुसार सरकार के दबाव में चढू़नी को इस चुनाव में वोट नहीं डालने दी गई और सरकार समर्थित उम्मीदवार को गैर कानूनी ढंग से चुनाव जीता दिया गया।
सेवानिवृत्त कैप्टन के अनुसार उक्त घटना से करीब 15-20 दिन पहले गैर कानूनी ढंग से हुए चुनाव का भारतीय किसान यूनियन ने विरोध करने का निर्णय लिया था। इसके चलते शाहाबाद में आंदोलन चलाने की चेतावनी सरकार को दी गई थी। सरकार इस आंदोलन को विफल करना चाहती थी।
इसके चलते पुलिस ने गांव से उसे उठा लाई और अवैध रूप से हिरासत में रखकर पिटाई की और जान से मारने की धमकी भी दी थी।
पूर्व कैप्टन के मुताबिक उन्हें देश के कानून पर विश्वास था। इसलिए उन्होंने अदालत में उपरोक्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ अदालत में इस्तगासा दायर किया था और आज उन्हें इस मामले में न्याय मिल गया है।
अदालत ने चारों पुलिस वालों को दोषी मानते हुए अलग-अलग धाराओं के तहत कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों में तत्कालीन एसएचओ चंद्रपाल रिटायर हो चुका है, जबकि साहेब सिंह इस समय एसआई और जोगिंद्र सिंह तथा देसराज हवलदार के पद पर कार्यरत हैं।