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Karnal News: सीएम सिटी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार चिकित्सक दे रहे स्थायी सेवाएं
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लाडवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा। संवाद
लाडवा। कस्बे के सीएम सिटी बनने के बाद ही सीएम नायब सिंह सैनी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा में चिकित्सकों के रिक्त सभी पदों को भरने की घोषणा की थी। इतना ही नहीं कुछ समय बाद सभी सात पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति भी हो गई थी। लेकिन वर्तमान में चार चिकित्सक डॉ. विशाल, डॉ. नवनीत, डॉ. नवदीप और डॉ. नीलम ही यहां स्थायी रूप से सेवाएं दे रहे हैं जबकि दो चिकित्सक अपनी एमडी की पढ़ाई पुरी करने के लिए तथा एक लंबे समय से क्रॉनिक एब्सेंट है। चिकित्सकों की कमी का खमियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
यहां 250 से 300 मरीज हर रोज अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आते हैं। ग्रामीण आंचल से इलाज के लिए आए राजीव कुमार, रणबीर सिंह, अंग्रेज सिंह, सविता देवी आदि ने बताया कि अस्पताल में सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं, जिससे बीमार होने के बावजूद देर तक लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
गर्भवती पुत्रवधु की जांच के लिए खाने पड़े धक्के : सविता
सविता निवासी बकाली ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पुत्रवधू को जांच के लिए अस्पताल लेकर आई थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण उसे बाहर प्राइवेट अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण भी गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं समस्या बढ़ने पर मजबूरी में कुरुक्षेत्र जाकर इलाज करवाना पड़ता है या फिर मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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एसएमओ डॉ. कृष्णकांत का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा में चिकित्सकों की कोई कमी नहीं है। अस्पताल के दो चिकित्सक अपनी एमडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए जाने के बाद दो चिकित्सकों को डेपुटेशन पर बुला लिया गया है। गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए दो प्राइवेट अस्पतालों को अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी खर्चे पर उपलब्ध करवाया गया है। सरकारी आदेशानुसार अस्पताल में 24 घंटे एंटी रैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे आसपास के अन्य जिलों से भी मरीज अपना इलाज करवाने लाडवा आते हैं।
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यहां 250 से 300 मरीज हर रोज अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आते हैं। ग्रामीण आंचल से इलाज के लिए आए राजीव कुमार, रणबीर सिंह, अंग्रेज सिंह, सविता देवी आदि ने बताया कि अस्पताल में सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं, जिससे बीमार होने के बावजूद देर तक लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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गर्भवती पुत्रवधु की जांच के लिए खाने पड़े धक्के : सविता
सविता निवासी बकाली ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पुत्रवधू को जांच के लिए अस्पताल लेकर आई थी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने के कारण उसे बाहर प्राइवेट अस्पतालों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण भी गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं समस्या बढ़ने पर मजबूरी में कुरुक्षेत्र जाकर इलाज करवाना पड़ता है या फिर मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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एसएमओ डॉ. कृष्णकांत का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा में चिकित्सकों की कोई कमी नहीं है। अस्पताल के दो चिकित्सक अपनी एमडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए जाने के बाद दो चिकित्सकों को डेपुटेशन पर बुला लिया गया है। गर्भवती महिलाओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए दो प्राइवेट अस्पतालों को अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी खर्चे पर उपलब्ध करवाया गया है। सरकारी आदेशानुसार अस्पताल में 24 घंटे एंटी रैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे आसपास के अन्य जिलों से भी मरीज अपना इलाज करवाने लाडवा आते हैं।

लाडवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाडवा। संवाद