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ब्लैक फंगस के जांच और उपचार के लिए कैथल में नहीं है व्यवस्था
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जिले में ब्लैक फंगस की जांच और इलाज की सुविधा नहीं है। यहां यदि किसी व्यक्ति में ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाता है। जिले में न तो दवाइयां और न ही इलाज का प्रबंध है।
गौरतलब है कि जून की शुरुआत से ही जिले में एक ओर जहां कोरोना का प्रकोप कम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्लैक फंगस का संभावित प्रकोप बढ़ोतरी की ओर जा रहा है। हालांकि अभी तक कैथल जिले के किसी अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक जिले में फंगस के चार संदिग्ध मरीज बताए गए हैं। इनमें से एक मरीज तो चार जून को ही सामने आया है। कैथल में ब्लैक फंगस के मरीजों को दाखिल करने और इलाज की फिलहाल अस्पताल में व्यवस्था नहीं है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों को भी फिलहाल कल्पना चावला अस्पताल करनाल में दाखिल करवाया जा रहा है। -संवाद
स्टेरॉयड दवाइयों के साथ-साथ मधुमेह भी फंगस का कारण
फंगस का प्रभाव ज्यादातर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो पहले कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, जिन्होंने स्टेरॉयड दवाइयों का बीमारी के इलाज के लिए प्रयोग किया है। इसके अलावा शुगर के मरीजों को फंगस होने की संभावना ज्यादा रहती है। नागरिक अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दवाइयां ज्यादातर स्टेरॉयड दवाइयां की श्रेणी में आती हैं।
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इन दवाइयों को कई बार मरीज बिना किसी चिकित्सक की सलाह के मेडिकल स्टोर से किसी बीमारी के लक्षण बताकर खरीद लेते हैं। बाद में ये दवाइयां फंगस का कारण बनती हैं। जिले में अब तक मिले संदिग्ध व्यक्तियों में लक्षण मिलने का बड़ा कारण मधुमेह रहा है।
उधर, चार जून को जिले में ब्लैक फंगस के लक्षण गुहला के एक गांव निवासी 25 वर्षीय युवक में पाए गए हैं। हालांकि अभी तक सिर्फ लक्षण ही पाए गए हैं, पुष्टि नहीं हुई है। जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि न तो इस युवक ने स्टेरॉयड दवाइयों का प्रयोग किया है और न ही इसे मधुमेह जैसी कोई दिक्कत है। फिर भी अधिकारियों ने उसे करनाल जाकर बीमारी की पुष्टि करने को कहा है।
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं (शैली) ने बताया कि कैथल में अगर ब्लैक फंगस का कोई भी संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसे कल्पना चावला अस्पताल करनाल में भेजा जा रहा है। यह कैथल जिले के मरीजों को दाखिल करने के लिए नोडल अस्पताल बनाया गया है। अभी तक चारों में से किसी मरीज को फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। अगर पुष्टि होती है तो मरीज का इलाज भी करनाल किया जाएगा।
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गौरतलब है कि जून की शुरुआत से ही जिले में एक ओर जहां कोरोना का प्रकोप कम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्लैक फंगस का संभावित प्रकोप बढ़ोतरी की ओर जा रहा है। हालांकि अभी तक कैथल जिले के किसी अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक जिले में फंगस के चार संदिग्ध मरीज बताए गए हैं। इनमें से एक मरीज तो चार जून को ही सामने आया है। कैथल में ब्लैक फंगस के मरीजों को दाखिल करने और इलाज की फिलहाल अस्पताल में व्यवस्था नहीं है। ऐसे में संदिग्ध मरीजों को भी फिलहाल कल्पना चावला अस्पताल करनाल में दाखिल करवाया जा रहा है। -संवाद
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स्टेरॉयड दवाइयों के साथ-साथ मधुमेह भी फंगस का कारण
फंगस का प्रभाव ज्यादातर उन मरीजों पर पड़ रहा है, जो पहले कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, जिन्होंने स्टेरॉयड दवाइयों का बीमारी के इलाज के लिए प्रयोग किया है। इसके अलावा शुगर के मरीजों को फंगस होने की संभावना ज्यादा रहती है। नागरिक अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दवाइयां ज्यादातर स्टेरॉयड दवाइयां की श्रेणी में आती हैं।
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इन दवाइयों को कई बार मरीज बिना किसी चिकित्सक की सलाह के मेडिकल स्टोर से किसी बीमारी के लक्षण बताकर खरीद लेते हैं। बाद में ये दवाइयां फंगस का कारण बनती हैं। जिले में अब तक मिले संदिग्ध व्यक्तियों में लक्षण मिलने का बड़ा कारण मधुमेह रहा है।
उधर, चार जून को जिले में ब्लैक फंगस के लक्षण गुहला के एक गांव निवासी 25 वर्षीय युवक में पाए गए हैं। हालांकि अभी तक सिर्फ लक्षण ही पाए गए हैं, पुष्टि नहीं हुई है। जिला स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि न तो इस युवक ने स्टेरॉयड दवाइयों का प्रयोग किया है और न ही इसे मधुमेह जैसी कोई दिक्कत है। फिर भी अधिकारियों ने उसे करनाल जाकर बीमारी की पुष्टि करने को कहा है।
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं (शैली) ने बताया कि कैथल में अगर ब्लैक फंगस का कोई भी संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसे कल्पना चावला अस्पताल करनाल में भेजा जा रहा है। यह कैथल जिले के मरीजों को दाखिल करने के लिए नोडल अस्पताल बनाया गया है। अभी तक चारों में से किसी मरीज को फंगस की पुष्टि नहीं हुई है। अगर पुष्टि होती है तो मरीज का इलाज भी करनाल किया जाएगा।