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Karnal News: प्रभु का सिमरण करते हुए बनाना चाहिए भोजन प्रसाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को हवन के साथ विश्राम दिया गया। मंगलवार सुबह सभी श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया। कथा के विश्राम अवसर पर आचार्य आशीष सागर महाराज ने कहा कि हमें अपनी रसोई में प्रभु का सिमरण करते हुए भोजन प्रसाद बनाना चाहिए ताकि परिवार के सभी लोग प्रसाद ग्रहण कर सकें। कहा भी गया है जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन। रसोई में रोजाना सुबह सबसे पहली रोटी गो माता की और अंतिम रोटी कुत्ते की निकालनी चाहिए, इससे प्रभु की कृपा होती है।
कथा में आचार्य ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की आठ पत्नियां थीं जिनमें रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा, लक्ष्मणा के अलावा उनकी 16 हजार और पत्नियां बताई जाती हैं। कथा के अनुसार असुर नरकासुर ने 16 हजार राज कन्याओं को बंदी बना रखा था जिसका उन्होंने वध किया और सभी कैद कन्याओं को मुक्त कराया। समाज से बहिष्कृत होने के डर से इन कन्याओं ने कृष्ण को अपना पति मान लिया था, तब श्रीकृष्ण ने 16,108 रूप में प्रकट होकर उनसे विवाह किया था।
कथा के विश्राम के बाद बुधवार को संगत आचार्य आशीष सागर महाराज के साथ वृंदावन, कोकिला वन, नंद गांव, बरसाना, गोर्वधन, गोकुल, रमण रेती, ब्रह्मांड घाट, चिंतहरण और मथुरा की यात्रा पर जाएंगे।
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करनाल। जुंडला गेट के श्री बांके बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को हवन के साथ विश्राम दिया गया। मंगलवार सुबह सभी श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां डालकर विश्व कल्याण की कामना की और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया। कथा के विश्राम अवसर पर आचार्य आशीष सागर महाराज ने कहा कि हमें अपनी रसोई में प्रभु का सिमरण करते हुए भोजन प्रसाद बनाना चाहिए ताकि परिवार के सभी लोग प्रसाद ग्रहण कर सकें। कहा भी गया है जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन। रसोई में रोजाना सुबह सबसे पहली रोटी गो माता की और अंतिम रोटी कुत्ते की निकालनी चाहिए, इससे प्रभु की कृपा होती है।
कथा में आचार्य ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की आठ पत्नियां थीं जिनमें रुक्मिणी, जाम्बवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा, लक्ष्मणा के अलावा उनकी 16 हजार और पत्नियां बताई जाती हैं। कथा के अनुसार असुर नरकासुर ने 16 हजार राज कन्याओं को बंदी बना रखा था जिसका उन्होंने वध किया और सभी कैद कन्याओं को मुक्त कराया। समाज से बहिष्कृत होने के डर से इन कन्याओं ने कृष्ण को अपना पति मान लिया था, तब श्रीकृष्ण ने 16,108 रूप में प्रकट होकर उनसे विवाह किया था।
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कथा के विश्राम के बाद बुधवार को संगत आचार्य आशीष सागर महाराज के साथ वृंदावन, कोकिला वन, नंद गांव, बरसाना, गोर्वधन, गोकुल, रमण रेती, ब्रह्मांड घाट, चिंतहरण और मथुरा की यात्रा पर जाएंगे।
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