फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Father died 20 years after Kalpana, father also donated his 20th body to the medical college.

Karnal News: कल्पना के 20 साल बाद पिता का देहांत, मेडिकल कॉलेज में 20वीं देह भी पिता की हुई दान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Oct 2023 02:45 AM IST
विज्ञापन
Father died 20 years after Kalpana, father also donated his 20th body to the medical college.
- 2014 में पिता बनारसीदास चावला ने देहदान का भरा था फार्म, कल्पना को भी बनाना चाहते थे डॉक्टर
विज्ञापन




गगन तलवार

करनाल। दानवीर राजा कर्ण और कल्पना चावला के नाम से करनाल की पहचान है। पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनकर जिस बेटी ने करनाल को पहचान दिलाई, अब उसके पिता बनारसी दास ने देह दान से दानवीर राजा कर्ण की परंपरा को आगे बढ़ाया है। वहीं, यह संयोग है कि बेटी के जाने के 20 साल बाद पिता ने अंतिम सांस ली है और बेटी के नाम से करनाल में चल रहे मेडिकल कॉलेज में 20वीं देह भी पिता की दान हुई है।
बेटी को डॉक्टर बनाने की इच्छा रखने वाले बनारसीदास चावला ने 27 मई 2014 को देहदान के लिए चंडीगढ़ पीजीआई में वसीयत कराई थी। उस समय करनाल का कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हुआ था। हालांकि उन्होंने बाद में मेडिकल कॉलेज में ही देहदान की इच्छा व्यक्त की थी, उसी के आधार पर अब उनके परिवार के सदस्यों ने मेडिकल कॉलेज में देहदान कराया है। विदित हो कि एक फरवरी 2003 को अमरीकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया के दुर्घटनाग्रस्त होने पर कल्पना चावला का निधन हुआ था। जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में अब तक करीब 140 लोगों ने देहदान के लिए फार्म भरा है। जिनमें से बनारसीदास चावला से पहले 19 देह संस्थान को दान में मिली। जिनसे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना को समझकर बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे। ब्यूरो
विज्ञापन




जब बेटी के आगे कमजोर पड़ गई पिता की इच्छा

कल्पना चावला के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन कल्पना को बचपन से ही हवाई जहाज और उड़ान की दुनिया में रुचि थी। ऐसे में बेटी की जिद के आगे पिता की इच्छा कमजोर पड़ गई थी। बाद में मां संजयोती देवी ने भी कल्पना के सपने को सराहा तो पिता ने भी साथ दिया। इसके बाद कल्पना ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाए। हालांकि कल्पना के निधन के बाद सरकार की ओर से उनके नाम से यहां मेडिकल कॉलेज बनाया गया। निफा अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू ने बताया कि मेडिकल संस्थान को देखकर पिता बनारसीदास कहते थे कि बेटी स्वयं भले डॉक्टर नहीं बन पाई, लेकिन उसके नाम से बना संस्थान लोगों को जीवनदान देगा, यह भी उन्हें सुकून देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed