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Karnal News: बीज उत्पादन और विविधीकरण से चमके कर्ण नगरी के किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:14 AM IST
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Farmers of 'Karna Nagari' prosper through seed production and diversification.
कृषि मेले में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित करते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कृषि मंत्री श्या
करनाल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मेले में कर्ण नगरी के दो प्रगतिशील किसानों ने अपनी मेहनत और नवाचार से पहचान बनाई। गांव बाल राजपूताना निवासी देवेंद्र राणा और रंबा के पलविंद्र सिंह को आधुनिक खेती में उल्लेखनीय योगदान के लिए सीएम नायब सैनी और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने सम्मानित किया गया।
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दोनों किसानों की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि वैज्ञानिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ खेती की जाए तो यह लाभ का सौदा बन सकती है। दोनों किसानों का कहना है कि खेती में बदलाव समय की जरूरत है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह, उन्नत तकनीक और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल का चयन करें तो न केवल आमदनी बढ़ेगी, बल्कि जोखिम भी कम होगा। कृषि मेले में मिला यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत की पहचान है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
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बीज से सामान्य फसल से करीब 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक अधिक लाभ
रंबा निवासी पलविंद्र सिंह ने खेती में नई दिशा चुनते हुए बीज उत्पादन को अपना मुख्य आधार बनाया। आज वह करीब 700 एकड़ भूमि में धान और गेहूं की उन्नत किस्मों डब्ल्यूएच-1270 और डीबीडब्ल्यूएच-327 का बीज उत्पादन कर रहे हैं। इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम से मिली, जहां वैज्ञानिकों ने बीज उत्पादन की तकनीक और उसके आर्थिक फायदे समझाए। पलविंद्र के अनुसार, सामान्य फसल के मुकाबले बीज उत्पादन से प्रति एकड़ करीब 15 क्विंटल तक अधिक लाभ मिल रहा है, जिससे उनकी आय में बड़ा इजाफा हुआ है।
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विविधिकरण से पानी और समय बचाया, खेती को बनाया टिकाऊ
देवेंद्र राणा ने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए फसल विविधीकरण को अपनाकर नई मिसाल कायम की है। पिछले दस वर्षों से वह 53 एकड़ में गन्ना, अमरूद और मूंग की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से पानी और समय दोनों की बचत होती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है। गन्ने की खेती में उन्होंने बेहतर प्रबंधन के जरिए कम बीज से अधिक उत्पादन हासिल किया है। इसके साथ ही पांच एकड़ में अमरूद का बाग लगाकर बागवानी को भी आय का मजबूत स्रोत बनाया है।
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