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शुद्ध खाद्यान्न के लिए किसान-वैज्ञानिक मिलकर करें कार्य : डॉ. विजयपाल यादव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Oct 2024 02:49 AM IST
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Farmers and scientists should work together for pure food grains: Dr. Vijaypal Yadav
आईआईडब्ल्यूबीआर में छह दिवसीय बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) में देश के विभिन्न राज्यों से आए किसानों को वितरण कार्यक्रम के अंतिम दिन नए उन्नतशील किस्मों का बीज दिया गया। साथ ही प्राकृतिक खेती पर आयोजित कृषक-वैज्ञानिक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के निदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. विजयपाल यादव ने लोगों को कहा कि शुद्ध खाद्यान्न उपलब्ध कराने को किसानों-वैज्ञानिकों को मिलकर कार्य करना होगा।
कृषि विकास योजना के तहत आयोजित कार्यशाला के समापन समारोह पर मुख्य अतिथि डॉ विजयपाल यादव ने प्राकृतिक खेती तकनीक को सफल बनाने के लिए कृषकों व वैज्ञानिकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वह मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार प्राकृतिक खेती के लिए समग्र सिफारिश करें। लोगों में बढ़ती बीमारियों पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए हमारा खानपान जिम्मेदार है।
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किसानों को फसलों में पेस्टीसाइड व उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने की सलाह दी। आयोजक सचिव डॉ. अनिल खिप्पल ने कृषकों और वैज्ञानिकों को आपस में प्राकृतिक खेती के विभिन्न तकनीकों पर मंथन के बाद प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत आदि को बनाने की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। डॉ. भूदेव त्यागी ने गेहूं व जौ की अधिक पैदावार लेने की विधियां बताईं तो डॉ. ओम प्रकाश गुप्ता ने गेहूं एवं जौ की गुणवत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ. रविंद्र ने प्राकृतिक खेती में बीज शोधन व बीमारी प्रबंधन पर जानकारी दी।
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भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. ओम प्रकाश अहलावत ने कहा कि छह दिनों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल आदि प्रदेशों से आए 15 हजार से अधिक किसानों ने बीज लिया है। उन्होंने किसानों को गेहूं एवं जौं की विभिन्न क़िस्मों, उनकी बिजाई की तकनीक, बीमारियों की रोकथाम, पराली प्रबंधन एवं खरपतवार नियंत्रण के बारे में विस्तार से बताया।

अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी किसानों से खेतीबाड़ी संबंधित तकनीकी ज्ञान साझा किया। एससीएसपी कार्यक्रम के तहत 50 एससी किसानों को गेहूं के बीज दिया गया। डॉ. सत्यवीर ने आभार व्यक्त किया। मीडिया प्रभारी राजेंद्र शर्मा सहित कई वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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