{"_id":"6477b79668e036283e0339d7","slug":"every-person-will-get-one-liter-of-milk-daily-by-cloning-and-animal-culture-karnal-news-c-18-knl1008-137398-2023-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: क्लोन और पशु संवर्धन से हर व्यक्ति को रोज मिलेगा एक लीटर दूध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: क्लोन और पशु संवर्धन से हर व्यक्ति को रोज मिलेगा एक लीटर दूध
विज्ञापन
- जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ते तापमान के बावजूद दुग्ध उपलब्धता बढ़ाने पर तेजी चल रहा काम
- 221 मिलियन टन पहुंचा देश में कुल दुग्ध उत्पादन
- 193.46 मिलियन गायें और 109.85 मिलियन भैंसें हैं देश में
देव शर्मा
करनाल। जित दूध दही का खाणा, यो म्हारा हरियाणा। ये कहावत हमेशा बनी रहे, इसके लिए हरियाणा में तो प्रयास चल ही रहे हैं, जबकि कम पशुओं के बावजूद देश का दुग्ध उत्पादन प्रति वर्ष छह प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ते तापमान के बीच प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता एक लीटर तक पहुंचाने के लिए तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए अत्याधुनिक क्लोन तकनीक के साथ-साथ देसी नस्लों के दुधारू पशुओं के संवर्धन पर भी वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं। जिसमें दूध की उपलब्धता और दुग्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि 2021-22 में 221 मिलियन टन के वार्षिक दुग्ध उत्पादन के साथ भारत दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक दुग्ध उत्पादन का 24 फीसदी था। दुग्ध उत्पादन में 2014-15 से 2021-22 तक 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड के 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में दूध की उपलब्धता लगभग 444 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति हो गई है। जिसे अब प्रति व्यक्ति एक लीटर तक ले जाने के लक्ष्य के साथ देश के वैज्ञानिक तेजी से काम कर रहे हैं।
गायों की 53 देशी नस्लें पूरी करेंगी दूध की मांग
एनडीडीबी (नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड) और अन्य डेयरी व पशु नस्ल सुधार पर कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार देश में देसी गायों की 53 नस्लें हैं। 20 नस्ले भैंस की हैं। देश में कुल गायों की संख्या 193.46 मिलियन हैं, जबकि भैंस की संख्या 109.85 मिलियन है। देश में कुल दुग्ध उत्पादन 221 मिलियन टन पहुंच गया है। एनडीआरआई में मूलरूप से पंजाब की साहीवाल, गुजरात की गिर और राजस्थान की थारपारकर नस्ल की देसी गाय पर कार्य चल रहा है, ताकि इसे बढ़ाया जा सके। शीघ्र ही गिर नस्ल का विश्व का पहला क्लोन तैयार करना भी इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसके साथ-साथ आनुवंशिक सुधार कायर्क्रमों के तहत सीमेन तैयार कर उपलब्ध कराना भी एक बड़ी प्रक्रिया है।
विज्ञापन
दूध सबसे स्वस्थ और संतुलित आहार
दूध सीधे पीएं या अन्य तरीके से, लेकिन मानव शरीर में दूध पहुंचना अवश्य चाहिए। क्योंकि दूध स्वस्थ संतुलित आहार तो है ही विटामिन और खनिजों, विशेष रूप से कैल्शियम का एक उत्कृष्ट स्रोत है। यह हड्डियों को स्वास्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके लिए दूध के साथ-साथ उसके विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। अब दूध का प्रसंस्करण तेजी के साथ बढ़ा है। एनडीआरआई ने भी कई प्रकार के दूध निर्मित खाद्य पदार्थ तैयार किए हैं। अब इनमें मोटा अनाज मिलाकर बाजरा लस्सी व आइसक्रीम जैसे उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं।
50 प्रतिशत दूध तरल के रूप में होता है प्रयोग
जहां तक प्रसंस्करण की बात है, कुल दुग्ध उत्पादन का 54 प्रतिशत दुग्ध सहकारी समितियों या असंगठित क्षेत्र जैसे दूधियों और ठेकेदारों के माध्यम से विपणन किया जाता है। भारतीय बाजार में उपलब्ध दूध का लगभग 50 फीसदी तरल रूप में उपयोग किया जाता है, 35 प्रतिशत पारंपरिक उत्पादों जैसे पनीर, दही और दूध से बनी मिठाइयों के रूप में और शेष 15 प्रतिशत मक्खन, घी, दूध पाउडर के रूप में सेवन किया जाता है। भारत सरकार दुग्ध उत्पादन और गोवंश की उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम आदि सहित कई योजनाओं को लागू कर रही है।
हरियाणा में दुग्ध उपलब्धता एक लीटर के पार
हरियाणा में अब तक प्रति व्यक्ति प्रति दिन की दुग्ध उपलब्धता 773 ग्राम थी, लेकिन अब ताजा आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में प्रति व्यक्ति प्रति दिन की दुग्ध उपलब्धता एक लीटर प्रति व्यक्ति को पार कर गई है। हरियाणा देश में दुग्ध उत्पादन में नंबर वन की ओर अग्रसर है।
- हर साल एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है, 2023 का विश्व दुग्ध दिवस का उद्देश्य ये दिखाना है कि कैसे डेयरी अपने पर्यावरणीय पदचिह्न को कम कर रहा है, जबकि पौष्टिक खाद्य पदार्थ और आजीविका भी प्रदान कर रहा है। पशुओं की संख्या कम और दूध की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में कई तरह के प्रयास कर रहे हैं, दुग्ध उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। देशी गायों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ क्लोन जैसी तकनीक से आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य प्रति व्यक्ति प्रति दिन एक लीटर दूध की उपलब्धता है।
- डॉ. धीर सिंह, निदेशक एवं कुलपति राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल
विज्ञापन
- 221 मिलियन टन पहुंचा देश में कुल दुग्ध उत्पादन
- 193.46 मिलियन गायें और 109.85 मिलियन भैंसें हैं देश में
देव शर्मा
करनाल। जित दूध दही का खाणा, यो म्हारा हरियाणा। ये कहावत हमेशा बनी रहे, इसके लिए हरियाणा में तो प्रयास चल ही रहे हैं, जबकि कम पशुओं के बावजूद देश का दुग्ध उत्पादन प्रति वर्ष छह प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ते तापमान के बीच प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता एक लीटर तक पहुंचाने के लिए तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसके लिए अत्याधुनिक क्लोन तकनीक के साथ-साथ देसी नस्लों के दुधारू पशुओं के संवर्धन पर भी वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं। जिसमें दूध की उपलब्धता और दुग्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि 2021-22 में 221 मिलियन टन के वार्षिक दुग्ध उत्पादन के साथ भारत दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक दुग्ध उत्पादन का 24 फीसदी था। दुग्ध उत्पादन में 2014-15 से 2021-22 तक 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड के 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में दूध की उपलब्धता लगभग 444 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति हो गई है। जिसे अब प्रति व्यक्ति एक लीटर तक ले जाने के लक्ष्य के साथ देश के वैज्ञानिक तेजी से काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
गायों की 53 देशी नस्लें पूरी करेंगी दूध की मांग
एनडीडीबी (नेशनल डेयरी डेवलेपमेंट बोर्ड) और अन्य डेयरी व पशु नस्ल सुधार पर कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के अनुसार देश में देसी गायों की 53 नस्लें हैं। 20 नस्ले भैंस की हैं। देश में कुल गायों की संख्या 193.46 मिलियन हैं, जबकि भैंस की संख्या 109.85 मिलियन है। देश में कुल दुग्ध उत्पादन 221 मिलियन टन पहुंच गया है। एनडीआरआई में मूलरूप से पंजाब की साहीवाल, गुजरात की गिर और राजस्थान की थारपारकर नस्ल की देसी गाय पर कार्य चल रहा है, ताकि इसे बढ़ाया जा सके। शीघ्र ही गिर नस्ल का विश्व का पहला क्लोन तैयार करना भी इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसके साथ-साथ आनुवंशिक सुधार कायर्क्रमों के तहत सीमेन तैयार कर उपलब्ध कराना भी एक बड़ी प्रक्रिया है।
विज्ञापन
दूध सबसे स्वस्थ और संतुलित आहार
दूध सीधे पीएं या अन्य तरीके से, लेकिन मानव शरीर में दूध पहुंचना अवश्य चाहिए। क्योंकि दूध स्वस्थ संतुलित आहार तो है ही विटामिन और खनिजों, विशेष रूप से कैल्शियम का एक उत्कृष्ट स्रोत है। यह हड्डियों को स्वास्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके लिए दूध के साथ-साथ उसके विभिन्न प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। अब दूध का प्रसंस्करण तेजी के साथ बढ़ा है। एनडीआरआई ने भी कई प्रकार के दूध निर्मित खाद्य पदार्थ तैयार किए हैं। अब इनमें मोटा अनाज मिलाकर बाजरा लस्सी व आइसक्रीम जैसे उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं।
50 प्रतिशत दूध तरल के रूप में होता है प्रयोग
जहां तक प्रसंस्करण की बात है, कुल दुग्ध उत्पादन का 54 प्रतिशत दुग्ध सहकारी समितियों या असंगठित क्षेत्र जैसे दूधियों और ठेकेदारों के माध्यम से विपणन किया जाता है। भारतीय बाजार में उपलब्ध दूध का लगभग 50 फीसदी तरल रूप में उपयोग किया जाता है, 35 प्रतिशत पारंपरिक उत्पादों जैसे पनीर, दही और दूध से बनी मिठाइयों के रूप में और शेष 15 प्रतिशत मक्खन, घी, दूध पाउडर के रूप में सेवन किया जाता है। भारत सरकार दुग्ध उत्पादन और गोवंश की उत्पादकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम आदि सहित कई योजनाओं को लागू कर रही है।
हरियाणा में दुग्ध उपलब्धता एक लीटर के पार
हरियाणा में अब तक प्रति व्यक्ति प्रति दिन की दुग्ध उपलब्धता 773 ग्राम थी, लेकिन अब ताजा आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में प्रति व्यक्ति प्रति दिन की दुग्ध उपलब्धता एक लीटर प्रति व्यक्ति को पार कर गई है। हरियाणा देश में दुग्ध उत्पादन में नंबर वन की ओर अग्रसर है।
- हर साल एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाया जाता है, 2023 का विश्व दुग्ध दिवस का उद्देश्य ये दिखाना है कि कैसे डेयरी अपने पर्यावरणीय पदचिह्न को कम कर रहा है, जबकि पौष्टिक खाद्य पदार्थ और आजीविका भी प्रदान कर रहा है। पशुओं की संख्या कम और दूध की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में कई तरह के प्रयास कर रहे हैं, दुग्ध उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। देशी गायों के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ क्लोन जैसी तकनीक से आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य प्रति व्यक्ति प्रति दिन एक लीटर दूध की उपलब्धता है।
- डॉ. धीर सिंह, निदेशक एवं कुलपति राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल