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Karnal News: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य इलाज भी मुश्किल
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- अधिकांश मरीजों को आना पड़ता है करनाल, डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की भारी कमी
अनुज शर्मा
करनाल। जिले में 24 पीएचसी हैं। सरकार की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में छह बेड की सुविधा मिली है, लेकिन इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का ग्रामीणों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए मजबूरन जिला नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
लेकिन वहां पर भी घंटों की मशक्कत के बाद डॉक्टर मिल पाते हैं। दवाई लेने के लिए भी कतारों से गुजरना पड़ता है। जिले की प्रत्येक पीएचसी में दो डॉक्टरों के पद हैं इनमें अधिकतर में एक ही डॉक्टर है। कुछ में तो दोनों डॉक्टरों के ही पद खाली हैं। कई केंद्र आशा कार्यकर्ता और एएनएम के भरोसे चल रहे हैं। गंभीर मरीजों के अलावा सामान्य मरीजों को भी यहां पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अधिकतर सीएचसी पर पीएचसी स्तर की ही सुविधाएं मिल रही हैं। जिसका मुख्य कारण जिले में डॉक्टरों के साथ-साथ अन्य स्टाफ की भी कमी है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि रक्त जांच के लिए भी दूर जाना पड़ता है। - संवाद
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कई पीएचसी पर एक भी डॉक्टर नहीं
जिले की 24 पीएचसी हैं। इनमें से सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरसत, चौरा, भादसो, खुखनी, सालवन, मूनक, गुल्लरपुर में तो एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन पीएचसी पर आशा कार्यकर्ता व नर्सिंग स्टाफ ही डॉक्टर, फार्मासिस्ट ड्यूटी कर रही हैं। ऐसे में लोग निजी अस्पतालों के धक्के खाने को मजबूर हैं।
पीएचसी पर नहीं मिलती दवाएं
ग्रामीण दारा सिंह का कहना है कि वह मजदूरी करता है। उपलाना पीएचसी में अधिकतर दवाइयां खत्म रहती हैं। जिसके लिए रुपये खर्च कर जिला नागरिक अस्पताल तक जाना पड़ता है। महिलाओं को डिलीवरी के लिए भी शहर जाना पड़ता है।
सिर्फ बुखार व जुकाम की मिलती हैं दवाएं
ग्रामीण अनिल कुमार का कहना है कि अभी सीएचसी व पीएचसी स्तर पर पूरी सुविधाएं नहीं हैं। स्टाफ भी कम है। मरीज हल्की बीमारियों का चेकअप कराने आते हैं। यहां पर सिर्फ बुखार व जुकाम की ही दवाएं मिलती हैं। अन्य के लिए बाहर जाना पड़ता है।
पीएचसी अनुसार डॉक्टरों की स्थिति
स्थान पद फील्ड रिक्त
पोपड़ा 02 01 01
उपलाना 02 01 01
बरसत 02 00 02
चौरा 02 00 02
कुटेल 02 02 00
गुढ़ा 02 01 01
ब्याना 02 01 01
भादसो 02 00 02
खुखनी 02 00 02
मधुबन 02 01 01
घीड़ 02 02 00
मिरगेन 02 01 01
सालवन 02 00 02
मूनक 02 00 02
जलमाना 02 01 01
गगसीना 02 01 01
बड़ौता 02 01 01
जुंडला 02 02 00
गुल्लरपुर 02 00 02
सग्गा 02 01 01
काछवा 02 01 01
परड़ाना 02 01 01
रंबा 02 02 00
समानाबाहु 02 02 00
(यह डाटा स्वास्थ्य विभाग से लिया गया है)
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टरों की कमी का समय-समय पर ब्योरा उच्चाधिकारियों को सौंपा जाता है। जैसे-जैसे डॉक्टर व स्टाफ भर्ती करते हैं तो उन्हें संबंधित पीएचसी व सीएचसी पर भेज दिया जाता है।
- डॉ. सरोज बाला, कार्यवाहक सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल
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अनुज शर्मा
करनाल। जिले में 24 पीएचसी हैं। सरकार की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में छह बेड की सुविधा मिली है, लेकिन इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का ग्रामीणों को ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए मजबूरन जिला नागरिक अस्पताल, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
लेकिन वहां पर भी घंटों की मशक्कत के बाद डॉक्टर मिल पाते हैं। दवाई लेने के लिए भी कतारों से गुजरना पड़ता है। जिले की प्रत्येक पीएचसी में दो डॉक्टरों के पद हैं इनमें अधिकतर में एक ही डॉक्टर है। कुछ में तो दोनों डॉक्टरों के ही पद खाली हैं। कई केंद्र आशा कार्यकर्ता और एएनएम के भरोसे चल रहे हैं। गंभीर मरीजों के अलावा सामान्य मरीजों को भी यहां पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है।
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अधिकतर सीएचसी पर पीएचसी स्तर की ही सुविधाएं मिल रही हैं। जिसका मुख्य कारण जिले में डॉक्टरों के साथ-साथ अन्य स्टाफ की भी कमी है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल व निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि रक्त जांच के लिए भी दूर जाना पड़ता है। - संवाद
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कई पीएचसी पर एक भी डॉक्टर नहीं
जिले की 24 पीएचसी हैं। इनमें से सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरसत, चौरा, भादसो, खुखनी, सालवन, मूनक, गुल्लरपुर में तो एक भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन पीएचसी पर आशा कार्यकर्ता व नर्सिंग स्टाफ ही डॉक्टर, फार्मासिस्ट ड्यूटी कर रही हैं। ऐसे में लोग निजी अस्पतालों के धक्के खाने को मजबूर हैं।
पीएचसी पर नहीं मिलती दवाएं
ग्रामीण दारा सिंह का कहना है कि वह मजदूरी करता है। उपलाना पीएचसी में अधिकतर दवाइयां खत्म रहती हैं। जिसके लिए रुपये खर्च कर जिला नागरिक अस्पताल तक जाना पड़ता है। महिलाओं को डिलीवरी के लिए भी शहर जाना पड़ता है।
सिर्फ बुखार व जुकाम की मिलती हैं दवाएं
ग्रामीण अनिल कुमार का कहना है कि अभी सीएचसी व पीएचसी स्तर पर पूरी सुविधाएं नहीं हैं। स्टाफ भी कम है। मरीज हल्की बीमारियों का चेकअप कराने आते हैं। यहां पर सिर्फ बुखार व जुकाम की ही दवाएं मिलती हैं। अन्य के लिए बाहर जाना पड़ता है।
पीएचसी अनुसार डॉक्टरों की स्थिति
स्थान पद फील्ड रिक्त
पोपड़ा 02 01 01
उपलाना 02 01 01
बरसत 02 00 02
चौरा 02 00 02
कुटेल 02 02 00
गुढ़ा 02 01 01
ब्याना 02 01 01
भादसो 02 00 02
खुखनी 02 00 02
मधुबन 02 01 01
घीड़ 02 02 00
मिरगेन 02 01 01
सालवन 02 00 02
मूनक 02 00 02
जलमाना 02 01 01
गगसीना 02 01 01
बड़ौता 02 01 01
जुंडला 02 02 00
गुल्लरपुर 02 00 02
सग्गा 02 01 01
काछवा 02 01 01
परड़ाना 02 01 01
रंबा 02 02 00
समानाबाहु 02 02 00
(यह डाटा स्वास्थ्य विभाग से लिया गया है)
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉक्टरों की कमी का समय-समय पर ब्योरा उच्चाधिकारियों को सौंपा जाता है। जैसे-जैसे डॉक्टर व स्टाफ भर्ती करते हैं तो उन्हें संबंधित पीएचसी व सीएचसी पर भेज दिया जाता है।
- डॉ. सरोज बाला, कार्यवाहक सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल