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नई चीनी मिल में भी इथॉनॉल बनाने की योजना
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मेरठ रोड स्थित नई सहकारी चीनी मिल भविष्य में गन्ने से चीनी बनाने के अलावा बहुउद्देश्यीय योजनाओं पर काम कर सकती है। इथेनॉल उत्पादन, बॉयो सीएनजी प्लांट व डिस्टलरी यूनिट स्थापित करना मिल प्रबंधन की भावी योजनाओं में शामिल है। चीनी मिल में गन्ने के प्रैसमड से बॉयो सीएनजी बन सकती है। एक निजी कंपनी ने मिल प्रबंधन के समक्ष यहां बॉयो सीएनजी प्लांट लगाने की इच्छा भी जता दी है। मिल प्रबंधन ने इन योजनाओं बाबत शुुगरफेड हरियाणा व राज्य सरकार को विचार करने के लिए प्रस्ताव भेजा हुआ है। यदि राज्य सरकार इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है तो ये परियोजनाएं परवान चढ़ जाएंगी। करनाल के गन्ना उत्पादक किसानों के हित में यह बड़े कदम साबित होंगे।
इसके अलावा भी मिल में फार्मा ग्रेड शुगर, मिनरल वाटर बाटलिंग प्लांट व शुगर सेशो स्कवैश क्यूब भी यहां बना सकते हैं। 18 मेगावाट को-जनरेशन का पावर प्लांट लगाया जा चुका है। इससे रोजाना करीब 12 से 13 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा, जिसे विद्युत निगम को बेचा जाएगा। प्लांट का ट्रायल इस साल लिया जाएगा। बिजली उत्पादन पर करीब साढ़े चार से पांच रुपये प्रति यूनिट खर्च आने का अनुमान है। शीघ्र ही मिल के द्वार के समीप करनाल-मेरठ रोड पर रिफाइंड चीनी का बिक्री केंद्र भी खोला जाएगा। नई मिल की पेराई क्षमता अधिक होने से इसके संचालन के लिए अगले साल सीजन में 50 से 60 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत पड़ेगी। मिल के पास चीनी के अलावा अन्य उत्पादन बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में रॉ मैटीरियल होगा।
20 प्रतिशत इथेनॉल का लक्ष्य
-केंद्र सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस पर यह घोषणा की है। इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों पर इसके उत्पादन का दबाव बनेगा। जिसके चलते गन्ने का रकबा बढ़ेगा और किसानों को सीधा फायदा होगा। दस प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की जरूरत की पूर्ति के लिए ही 371.6 करोड लीटर इथेनॉल चाहिए। देश में वर्ष 2016-17 में तेल कंपनियों को इथेनॉल की सप्लाई 66.5 करोड़ लीटर, 2017-18 में 205.5 करोड़ लीटर, 2018-19 में 188.6 करोड़ लीटर, 2019-20 में 192.87 करोड़ लीटर हुई है।
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चीनी मिल में इथेनॉल प्लांट, फार्मा ग्रेड शुगर, मिनरल वाटर बॉटलिंग प्लांट, बायो सीएनजी प्लांट व अन्य संभावित उत्पादों को लेकर शुगरफेड हरियाणा व राज्य सरकार को विजन प्रपोजल भेजा है। चीनी मिल बड़ी हो चुकी है। मिल अंतर्गत क्षेत्र में गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। बीते पेराई सत्र में 363830 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। नई चीनी मिल में इस बार आठ अप्रैल से 16 मई तक करीब 11 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई ट्रायल के रूप में की जा चुकी है।
-अदिति, एमडी, सहकारी चीनी मिल, करनाल।
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इसके अलावा भी मिल में फार्मा ग्रेड शुगर, मिनरल वाटर बाटलिंग प्लांट व शुगर सेशो स्कवैश क्यूब भी यहां बना सकते हैं। 18 मेगावाट को-जनरेशन का पावर प्लांट लगाया जा चुका है। इससे रोजाना करीब 12 से 13 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा, जिसे विद्युत निगम को बेचा जाएगा। प्लांट का ट्रायल इस साल लिया जाएगा। बिजली उत्पादन पर करीब साढ़े चार से पांच रुपये प्रति यूनिट खर्च आने का अनुमान है। शीघ्र ही मिल के द्वार के समीप करनाल-मेरठ रोड पर रिफाइंड चीनी का बिक्री केंद्र भी खोला जाएगा। नई मिल की पेराई क्षमता अधिक होने से इसके संचालन के लिए अगले साल सीजन में 50 से 60 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत पड़ेगी। मिल के पास चीनी के अलावा अन्य उत्पादन बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में रॉ मैटीरियल होगा।
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20 प्रतिशत इथेनॉल का लक्ष्य
-केंद्र सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस पर यह घोषणा की है। इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों पर इसके उत्पादन का दबाव बनेगा। जिसके चलते गन्ने का रकबा बढ़ेगा और किसानों को सीधा फायदा होगा। दस प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की जरूरत की पूर्ति के लिए ही 371.6 करोड लीटर इथेनॉल चाहिए। देश में वर्ष 2016-17 में तेल कंपनियों को इथेनॉल की सप्लाई 66.5 करोड़ लीटर, 2017-18 में 205.5 करोड़ लीटर, 2018-19 में 188.6 करोड़ लीटर, 2019-20 में 192.87 करोड़ लीटर हुई है।
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चीनी मिल में इथेनॉल प्लांट, फार्मा ग्रेड शुगर, मिनरल वाटर बॉटलिंग प्लांट, बायो सीएनजी प्लांट व अन्य संभावित उत्पादों को लेकर शुगरफेड हरियाणा व राज्य सरकार को विजन प्रपोजल भेजा है। चीनी मिल बड़ी हो चुकी है। मिल अंतर्गत क्षेत्र में गन्ने का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। बीते पेराई सत्र में 363830 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। नई चीनी मिल में इस बार आठ अप्रैल से 16 मई तक करीब 11 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई ट्रायल के रूप में की जा चुकी है।
-अदिति, एमडी, सहकारी चीनी मिल, करनाल।