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Karnal News: नशे के सेवन से बढ़ रहे मिर्गी के मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2025 02:30 AM IST
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Epilepsy patients increasing due to drug abuse
- नागरिक अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे सात मरीज, जिनमें आधे मादक पदार्थों का सेवन करने वाले मिल रहे
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काजल पांचाल
करनाल। जिले में नशे का सेवन करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है जिस कारण उनमें मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य संधू ने बताया कि उनकी ओपीडी में रोजाना मिर्गी के दौरे पड़ने वाले छह से सात मरीज पहुंच रहे हैं जिनमें आधे मरीज नशे का सेवन करने वाले पाए जाते हैं। नियमित मादक पदार्थ या अन्य हाई ड्रग्स का सेवन करने से मिर्गी के दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इसका इलाज मरीज की अन्य बीमारियों के बारे में पता लगाकर व शराब की लत छूटने के बाद ही संभव हो पाता है क्याेंकि नशे का सेवन करने के कारण दवाइयां साइड इफेक्ट कर जाती हैं। डॉ. संधू के अनुसार, मिर्गी के दौरे पड़ना एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें मस्तिष्क की असामान्य इलेक्ट्रिकल गतिविधियों के कारण मरीज को झटके आते हैं। सही समय पर जांच, दवा और सावधानियों के जरिये इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि समाज में मिर्गी को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मरीज बिना किसी झिझक के सही इलाज करा सके।
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डॉ. संधू ने बताया कि उनके पास 25 से 30 वर्ष की उम्र के लोग भी मिर्गी के दौरे पड़ने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं क्योंकि इसी उम्र में लोगों में मादक पदार्थों का सेवन करने की लत लग जाती है। जैसे कि कॉलेज में जाने वाले युवा व होस्टल या घर से बाहर रहते हुए ऐसे पदार्थों की आदत डाल लेते हैं और उनमें तनाव सहन करने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिससे उनमें मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं।
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उन्होंने बताया कि नशा करने वाले व्यक्ति में दौरा इसलिए पड़ता है क्योंकि उसके दिमाग में रासायनिक असंतुलन हो जाता है, जो कभी-कभी मिर्गी जैसे दौरे का कारण बन जाता है। वहीं, नशे के दौरान या बाद में, तंत्रिका तंत्र पर तनाव और दबाव पड़ता है, जिससे दिमाग में असामान्य विद्युत गतिविधियां हो सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से मिर्गी या सीजर की समस्या हो, तो नशा उसके इस खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, नशा करते वक्त व्यक्ति का दिमाग और शरीर सही तरीके से काम नहीं करता, जिससे किसी भी प्रकार का दौरा पड़ सकता है। इसलिए, नशा करना मिर्गी के दौरे को बढ़ा सकता है, क्योंकि यह दिमाग और तंत्रिका तंत्र पर ज्यादा दबाव डालता है, जिससे दिमाग में असामान्य विद्युत गतिविधि होती है जो मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकती है।


जीवनशैली में बदलाव से इलाज संभव
डॉ. संधू ने बताया कि एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना मिर्गी के इलाज में सहायक है, जिसमें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक शांति जरूरी है। इसके अलावा नशे के सेवन से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए काउंसलिंग और मानसिक सहायता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि वे नशे की आदत से बचें व इलाज के लिए सही समय पर उपचार कराएं तो उन्हें खुशहाल जीवन जीने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इसके इलाज में लगभग तीन से पांच साल का समय लगता है। इसके लिए जरूरी है कि ऐसे मरीज पूरी तरह से नशे की लत को छोड़ दें ताकि वे पूरा उपचार करा सकें।
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