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मां की ममता शर्मसार, खेतों में फेंक दिया नवजात शिशु
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300: नागरिक अस्पताल में दाखिल नवजात। अमर उजाला
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मां बनने का सौभाग्य जिस महिला को नहीं मिल पाता है वही समझ सकती है कि एक बच्चे को जन्म देना कितना शुकून देने वाला क्षण होता है। लेकिन यहां तो एक मां ने ही अपने तीन-चार दिन के नवजात शिशु को गांव में ईंट के भट्ठे के समीप खतों में ठंड में मरने के लिए फेंक दिया। झकझोर देने वाली यह घटना गांव बीजना की है।
ठंड के बीच अबोध नवजात शिशु (लड़का) रोता रहा। रोने की आवाज सुनकर ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने उसे अपनी गोद में उठाया और चुप कराने का प्रयास किया लेकिन वह चुप नहीं हुआ। इसके बाद मजदूरों ने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सूचना देकर बुलाया और शिशु को जिला नागरिक अस्पताल करनाल में दाखिल कराया। जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि शिशु को सांस लेेने में परेशानी हो रही है। मामले की सूचना सदर थाना पुलिस को दे दी है। पुलिस शिशु की मां को तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि शिशु की मां को लेकर उन्हें कुछ सुराग मिले हैं। जल्द मामले का खुलासा कर देंगे।
नोच सकते थे कुत्ते
ग्रामीणों ने बताया कि शिशु खेतों में रो रहा था। यदि समय पर मजदूर वहां नहीं पहुंचते तो कुत्ते उसे नोच सकते थे। लेकिन शिशु को कोई चोट नहीं लगी है। हालांकि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इस कारण उन्होंने तुरंत एंबुलेंस को बुलाकर उसे अस्पताल में दाखिल कराया। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास जब शिशु आया था तो वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। शिशु तीन से चार दिन का है। फिलहाल वह ऑक्सीजन पर है।
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सख्त कार्रवाई की मांग
खेतों में शिशु मिलने की खबर गांव और आसपास के क्षेत्र में फैल गई। मौके पर भी लोग जुट गए। महिलाओं ने कहा कि जिसने भी नवजात शिशु को खेतों में फेंका है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बच्चों के लिए तो मां-बाप तड़पते हैं।
नवजात शिशु की मां की तलाश शुरू कर दी है। कुछ सुराग मिले हैं। जल्द शिशु की मां का खुलासा कर दिया जाएगा और कारणों को भी बताया जाएगा आखिर शिशु को खेतों में क्यों फेंका गया है। इस मामले की अभी जांच चल रही है। शिशु नागरिक अस्पताल में दाखिल है।
- सुनील कुमार, जांच अधिकारी, सदर थाना
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करनाल। मां बनने का सौभाग्य जिस महिला को नहीं मिल पाता है वही समझ सकती है कि एक बच्चे को जन्म देना कितना शुकून देने वाला क्षण होता है। लेकिन यहां तो एक मां ने ही अपने तीन-चार दिन के नवजात शिशु को गांव में ईंट के भट्ठे के समीप खतों में ठंड में मरने के लिए फेंक दिया। झकझोर देने वाली यह घटना गांव बीजना की है।
ठंड के बीच अबोध नवजात शिशु (लड़का) रोता रहा। रोने की आवाज सुनकर ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने उसे अपनी गोद में उठाया और चुप कराने का प्रयास किया लेकिन वह चुप नहीं हुआ। इसके बाद मजदूरों ने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सूचना देकर बुलाया और शिशु को जिला नागरिक अस्पताल करनाल में दाखिल कराया। जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि शिशु को सांस लेेने में परेशानी हो रही है। मामले की सूचना सदर थाना पुलिस को दे दी है। पुलिस शिशु की मां को तलाश रही है। पुलिस का कहना है कि शिशु की मां को लेकर उन्हें कुछ सुराग मिले हैं। जल्द मामले का खुलासा कर देंगे।
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नोच सकते थे कुत्ते
ग्रामीणों ने बताया कि शिशु खेतों में रो रहा था। यदि समय पर मजदूर वहां नहीं पहुंचते तो कुत्ते उसे नोच सकते थे। लेकिन शिशु को कोई चोट नहीं लगी है। हालांकि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इस कारण उन्होंने तुरंत एंबुलेंस को बुलाकर उसे अस्पताल में दाखिल कराया। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि उनके पास जब शिशु आया था तो वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। शिशु तीन से चार दिन का है। फिलहाल वह ऑक्सीजन पर है।
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सख्त कार्रवाई की मांग
खेतों में शिशु मिलने की खबर गांव और आसपास के क्षेत्र में फैल गई। मौके पर भी लोग जुट गए। महिलाओं ने कहा कि जिसने भी नवजात शिशु को खेतों में फेंका है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। बच्चों के लिए तो मां-बाप तड़पते हैं।
नवजात शिशु की मां की तलाश शुरू कर दी है। कुछ सुराग मिले हैं। जल्द शिशु की मां का खुलासा कर दिया जाएगा और कारणों को भी बताया जाएगा आखिर शिशु को खेतों में क्यों फेंका गया है। इस मामले की अभी जांच चल रही है। शिशु नागरिक अस्पताल में दाखिल है।
- सुनील कुमार, जांच अधिकारी, सदर थाना