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ठंड का असर : महिलाओं में बढ़ी नसों में खिंचाव और दर्द की समस्या
Mon, 08 Dec 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:09 AM IST
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फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. चारू
करनाल। बढ़ती ठंड का असर महिलाओं की सेहत पर पड़ रहा है। कमर से पैर तक नसों का दर्द सायटिका सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। जिला नागरिक अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में रोजाना 15 से 20 महिलाएं नसों में तेज खिंचाव, सुन्न होना और पैरों में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रही हैं।
नागरिक अस्पताल से हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गुप्ता के अनुसार, ठंड में महिलाओं की नसें और मांसपेशियां पुरुषों की तुलना में तेजी से सिकुड़ती हैं, वहीं हार्मोनल बदलाव, हड्डियों की कमजोरी और झुककर किए जाने वाले घरेलू काम से कमर की नस पर दबाव बढ़ा रहा है।
धीमा पड़ जाता है रक्तप्रवाह
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. चारू ने बताया कि सायटिका में दर्द नितंब से होते हुए जांघ और पिंडली तक खिंचता है। लंबे समय तक बैठना, रसोई में खड़े होकर लगातार काम करना और झुककर काम करने से यह दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है। ठंड में गलत पॉश्चर के कारण यह समस्या कई महिलाओं में गंभीर रूप ले रही है। डॉ. चारू ने बताया कि ठंड में रक्तप्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिससे मांसपेशियों की अकड़न बढ़ती है और नसें जल्दी दबती हैं। इनमें 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में हड्डियों का घनत्व कम होता है और हार्मोनल परिवर्तन लगातार चलते रहते हैं। इस कारण कमर की नस पर दबाव जल्दी बढ़ जाता है, जिससे दर्द कमर से पिंडली तक फैल जाता है।
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हीट थेरेपी से मिलता है आराम
अस्पताल में बड़ी संख्या में महिलाएं अल्ट्रासाउंड थेरेपी, टीईएनएस, ट्रैक्शन और हीट थेरेपी करवाने आ रही हैं, जिनसे नसों पर दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है। हर रोज 60 मरीजों की ओपीडी में 15 से 20 महिलाएं इस समस्या से जुड़ी आ रही हैं जिन्हें ये थेरेपी दी जा रही है। इस थेरेपी के सर्दियों में करीब सात से आठ सेशन होते हैं जिसके बाद महिलाओं को आराम मिलता है। ठंड में महिलाओं की नसें और मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती हैं, ऊपर से हार्मोनल बदलाव और हड्डियों की कमजोरी दर्द बढ़ा देती है। झुककर घरेलू काम करना, गलत पॉश्चर और 40 की उम्र के बाद कैल्शियम कम होना भी कमर की नस पर दबाव बढ़ाता है। इसी कारण सायटिका और फैलता तंत्रिका दर्द पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखा जा रहा है।
लक्षण-
कई महिलाओं में रात के पैरों में झनझनाहट और चलने-फिरने में परेशानी के लक्षण देखे जा रहे हैं। इसमें महिलाओं के खड़े होने, काम करने और बैठने तक में भारी परेशानी व तेज दर्द होता है।
बचाव के उपाय
डॉ. चारू ने बताया कि महिलाओं को ठंड में कमर और पैरों को गर्म रखना चाहिए। बार-बार पॉश्चर बदलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें ताकि ठंड में मांसपेशियों में हरकत होती रहे और नसें न सिकुड़ पाएं। शुरुआत में ही दर्द बढ़ने पर फिजियोथेरेपी लें। समय पर थेरेपी मिल जाए तो यह दर्द बिना दवा के भी ठीक हो सकता है।
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नागरिक अस्पताल से हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गुप्ता के अनुसार, ठंड में महिलाओं की नसें और मांसपेशियां पुरुषों की तुलना में तेजी से सिकुड़ती हैं, वहीं हार्मोनल बदलाव, हड्डियों की कमजोरी और झुककर किए जाने वाले घरेलू काम से कमर की नस पर दबाव बढ़ा रहा है।
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धीमा पड़ जाता है रक्तप्रवाह
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. चारू ने बताया कि सायटिका में दर्द नितंब से होते हुए जांघ और पिंडली तक खिंचता है। लंबे समय तक बैठना, रसोई में खड़े होकर लगातार काम करना और झुककर काम करने से यह दर्द और ज्यादा बढ़ जाता है। ठंड में गलत पॉश्चर के कारण यह समस्या कई महिलाओं में गंभीर रूप ले रही है। डॉ. चारू ने बताया कि ठंड में रक्तप्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिससे मांसपेशियों की अकड़न बढ़ती है और नसें जल्दी दबती हैं। इनमें 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में हड्डियों का घनत्व कम होता है और हार्मोनल परिवर्तन लगातार चलते रहते हैं। इस कारण कमर की नस पर दबाव जल्दी बढ़ जाता है, जिससे दर्द कमर से पिंडली तक फैल जाता है।
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हीट थेरेपी से मिलता है आराम
अस्पताल में बड़ी संख्या में महिलाएं अल्ट्रासाउंड थेरेपी, टीईएनएस, ट्रैक्शन और हीट थेरेपी करवाने आ रही हैं, जिनसे नसों पर दबाव कम होता है और दर्द में राहत मिलती है। हर रोज 60 मरीजों की ओपीडी में 15 से 20 महिलाएं इस समस्या से जुड़ी आ रही हैं जिन्हें ये थेरेपी दी जा रही है। इस थेरेपी के सर्दियों में करीब सात से आठ सेशन होते हैं जिसके बाद महिलाओं को आराम मिलता है। ठंड में महिलाओं की नसें और मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती हैं, ऊपर से हार्मोनल बदलाव और हड्डियों की कमजोरी दर्द बढ़ा देती है। झुककर घरेलू काम करना, गलत पॉश्चर और 40 की उम्र के बाद कैल्शियम कम होना भी कमर की नस पर दबाव बढ़ाता है। इसी कारण सायटिका और फैलता तंत्रिका दर्द पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखा जा रहा है।
लक्षण-
कई महिलाओं में रात के पैरों में झनझनाहट और चलने-फिरने में परेशानी के लक्षण देखे जा रहे हैं। इसमें महिलाओं के खड़े होने, काम करने और बैठने तक में भारी परेशानी व तेज दर्द होता है।
बचाव के उपाय
डॉ. चारू ने बताया कि महिलाओं को ठंड में कमर और पैरों को गर्म रखना चाहिए। बार-बार पॉश्चर बदलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें ताकि ठंड में मांसपेशियों में हरकत होती रहे और नसें न सिकुड़ पाएं। शुरुआत में ही दर्द बढ़ने पर फिजियोथेरेपी लें। समय पर थेरेपी मिल जाए तो यह दर्द बिना दवा के भी ठीक हो सकता है।