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हरियाणा में जलवायु परिवर्तन का आलू उत्पादन पर असर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 02:36 AM IST
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Effect of climate change on potato production in Haryana
कर्मबीर लाठर
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करनाल। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन ने हरियाणा में आलू उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले पांच-सात साल से आलू उत्पादन पर जलवायु का प्रभाव सामने आ रहा है। अनचाही वर्षा, वातावरण में तापमान का अचानक बढ़ना या घटना इत्यादि कारणों से आलू उत्पादन करना चुनौतिपूर्ण बनता जा रहा है।
सितंबर के अंत में आलू की अगेती बिजाई, 15 अक्तूबर तक मध्यम व नवंबर तक पछेती बिजाई होती है। इस बार करनाल जिले में सितंबर में 232.8 एमएम व अक्तूबर में 85.6 एमएम बारिश हुई जिस कारण समय पर आलू की बिजाई नहीं की जा सकी। अब भी किसान आलू बिजाई कर रहे हैं। अब तापमान गिरने के कारण जमाव को लेकर अंदेशा बना रहने की स्थिति है।
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देश में सालाना आलू उत्पादन 46.5 मिलियन मीट्रिक टन।
हरियाणा में आलू का रकबा 40 हजार एकड़, उत्पादन 150 से 175 क्विंटल प्रति एकड़।
करनाल में रकबा पांच हजार एकड़।
भारत में उत्पादकता बढ़ाना ही था चुनौति
आलू उत्पादन में विश्व में चीन पहले, भारत दूसरे व रूस तीसरे स्थान पर है। एशियन देशों में बांग्लादेश तीसरे स्थान पर है। विकसित देशों में आलू की उत्पादकता 45.5 टन प्रति हेक्टेयर है जबकि भारत में उत्पादकता करीब 23 टन प्रति हेक्टेयर है। भारत में उत्पादकता बढ़ाना ही चुनौति था, इसके साथ दूसरी चुनौति जलवायु परिवर्तन खड़ी कर रहा है।
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तापमान सहनशील प्रजातियां बनेंगी
प्रकृति से खिलवाड़ का खामियाजा तो भुगतना पड़ता है। पंजाब में कई सालों से आलू की फसल पर असर पड़ रहा था किंतु इस वर्ष हरियाणा में भी पड़ा है। हालांकि हर साल ऐसा नहीं होता फिर भी चिंता है। आलू की अगेती किस्म कुफरी लीमा व कूफरी सूर्या तापमान सहन कर लेती हैं। आलू अनुसंधान केंद्र शिमला में ऐसी किस्में ईजाद करने पर काम हो रहा है जो तापमान सहन कर पाएं ताकि उनकी अगेती बिजाई कर सकें।

-- डा. पीके मेहता, सलाहकार, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल।
स्थिति के मद्देनजर बनी है योजना
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए पूरे विश्व में फार्मर्स प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन बनाए गए हैं। इनमें भारत में 10 एफपीओ चुने हैं जो कारणों पर ध्यान देंगे और स्थिति से निपटने पर काम करेंगे। इसी उद्देश्य से 11 से 13 नवंबर तक कुरुक्षेत्र में दो एफपीओ के पदाधिकारियों व जर्मन के प्रतिनिधियों की बैठक में चिंतन-मंथन हुआ था। योजना बनाई है और सरकार को लिखा गया है। जिस पर बहुत जल्द कार्रवाई होगी। पहले चरण में लहसुन व गोभी की फसल पर काम शुरू होगा। पिछले पांच सालों के तापमान के आंकड़े लेकर आंकलन कर भावी योजना बनाएंगे। फसल के समय में परिवर्तन व जमीन के सुधार पर जोर दिया जाएगा।
डा. सरदार सिंह, अध्यक्ष, नीलोखेड़ी फार्मर प्रोड्यूसर समूह।
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