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Karnal News: लापरवाही से अटकी थी ई-ऑफिस प्रणाली
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। फाइलों को निकलवाने के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने चार साल पहले ई-ऑफिस प्रणाली लागू की थी। लेकिन करनाल में कुछ विभागाध्यक्षों की लापरवाही के कारण यह योजना अटकी रह गई।
यह हालात भी तब थे, जब पोर्टल और प्रशिक्षण संबंधित 99 फीसदी तक कार्य पूरा हो चुका था पर चुनिंदा अधिकारियों को ऑनलाइन फाइल लेना व्यवहार में उतारना नहीं आया, ऐसे में व्यवस्था अटकी रह गई।
अब चार साल बाद प्रदेश सरकार की सख्ती पर ई-ऑफिस लागू करने में प्रशासन तेजी दिखा रहा है तो ऐसे खुलासे हो रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, 2020 में प्रत्येक विभाग के अध्यक्ष और एक-एक कर्मचारी को ई-ऑफिस कार्य संबंधित प्रशिक्षण दिया गया था। इस दौरान केवल कुछ अधिकारियों ने प्रशिक्षण नहीं लिया और कुछ ने प्रशिक्षण लेने के बाद भी इस प्रणाली पर कार्य नहीं किया, ऐसे में व्यवस्था बदल नहीं पाई।
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उन्हीं के कारण ही अभी तक कागजी तौर पर फाइलें आगे बढ़ रही हैं। अब उपायुक्त ने सख्ती दिखाते हुए कागजी तौर पर डाक या फाइल लेने से मना किया है तो ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने में तेजी दिखाई जा रही है। विदित हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर 20 नवंबर 2020 को ई-ऑफिस व्यवस्था जिले में लागू करने के आदेश दिए थे।
उस समय क्लर्क से लेकर विभागाध्यक्ष की यूजर आईडी बनाने की भी व्यवस्था की। तब केवल औपचारिक तौर पर ही यूजर आईडी बनाने के बाद सुशासन दिवस के अवसर पर 25 दिसंबर 2020 को इसे पूरी तरह से लागू करने की औपचारिकता भी कर ली गई। लेकिन हकीकत में व्यवस्था लागू ही नहीं हो पाई और आज तक कार्यालयों में कागजी तौर पर ही फाइलें चल रही हैं। ऐसे में अब सीएम के निर्देश के बाद इसी माह से प्रशासन ई-ऑफिस को आनन-फानन लागू करने जा रहा है।
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करनाल। फाइलों को निकलवाने के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने चार साल पहले ई-ऑफिस प्रणाली लागू की थी। लेकिन करनाल में कुछ विभागाध्यक्षों की लापरवाही के कारण यह योजना अटकी रह गई।
यह हालात भी तब थे, जब पोर्टल और प्रशिक्षण संबंधित 99 फीसदी तक कार्य पूरा हो चुका था पर चुनिंदा अधिकारियों को ऑनलाइन फाइल लेना व्यवहार में उतारना नहीं आया, ऐसे में व्यवस्था अटकी रह गई।
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अब चार साल बाद प्रदेश सरकार की सख्ती पर ई-ऑफिस लागू करने में प्रशासन तेजी दिखा रहा है तो ऐसे खुलासे हो रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, 2020 में प्रत्येक विभाग के अध्यक्ष और एक-एक कर्मचारी को ई-ऑफिस कार्य संबंधित प्रशिक्षण दिया गया था। इस दौरान केवल कुछ अधिकारियों ने प्रशिक्षण नहीं लिया और कुछ ने प्रशिक्षण लेने के बाद भी इस प्रणाली पर कार्य नहीं किया, ऐसे में व्यवस्था बदल नहीं पाई।
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उन्हीं के कारण ही अभी तक कागजी तौर पर फाइलें आगे बढ़ रही हैं। अब उपायुक्त ने सख्ती दिखाते हुए कागजी तौर पर डाक या फाइल लेने से मना किया है तो ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने में तेजी दिखाई जा रही है। विदित हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर 20 नवंबर 2020 को ई-ऑफिस व्यवस्था जिले में लागू करने के आदेश दिए थे।
उस समय क्लर्क से लेकर विभागाध्यक्ष की यूजर आईडी बनाने की भी व्यवस्था की। तब केवल औपचारिक तौर पर ही यूजर आईडी बनाने के बाद सुशासन दिवस के अवसर पर 25 दिसंबर 2020 को इसे पूरी तरह से लागू करने की औपचारिकता भी कर ली गई। लेकिन हकीकत में व्यवस्था लागू ही नहीं हो पाई और आज तक कार्यालयों में कागजी तौर पर ही फाइलें चल रही हैं। ऐसे में अब सीएम के निर्देश के बाद इसी माह से प्रशासन ई-ऑफिस को आनन-फानन लागू करने जा रहा है।