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दशहरा मेले में अश्लील ढुमके, नहीं जल पाया रावण
कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 13 Oct 2013 11:29 PM IST
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अश्लील डांस, अधजला रावण और दशहरे मेले में फैली अव्यवस्था ने कुरुक्षेत्र
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दशहरा कमेटी के आयोजन की भव्यता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। मेले में आए कई
दशकों ने इस तरह के नृत्य पर सवाल खड़े किए, वहीं कर्मकांड के ज्ञाता
ब्राह्मणों और तीर्थ पुरोहितों ने अधजले रावण को अपशकुन बताया।
कई लोगों ने पुलिस प्रशासन और आयोजकों के प्रबंधों को नाकाफी बताया, क्योंकि रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतले जलने से पहले इन्हें झपटने के लिए भगदड़ का माहौल पैदा हो गया। इसकी वजह से दर्जनों लोग चोटिल हो गए और रावण की लकड़ी में लगी आग में झुलस गए।
इस धार्मिक आयोजन के दौरान जिस तरह का डांस दिखा, वह कार्यक्रम की गरिमा से परे था, जबकि इस आयोजन से नगर के कई प्रतिष्ठित लोग जुड़े थे, लेकिन कार्यक्रम के आयोजकों ने इस पर गौर नहीं किया। परिवारों के साथ आए लोग मंच पर किए जा रहे भद्दे डांस का विरोध तो नहीं जता पाए, लेकिन आंखें नीची जरूर की।
कई ने यहां तक कहा कि ऐसे भौंडे नृत्य कराने की बजाए आयोजकों को चाहिए था कि वे प्रोफेशनल डांसरों की बजाए, उभरते हुए प्रतिभावान कलाकारों को अवसर देतेे।
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के उपाध्यक्ष पंडित पवन शर्मा का कहना है कि रावण दहन की परंपरा सदियों पुरानी है और परंपराओं को पूरे विधिविधान से ही निभाना चाहिए, क्योंकि हमारी संस्कृति और परंपराएं खेल नहीं, बल्कि हमारी विरासत का निचौड़ है।
उन्होंने कहा कि पंचांग में रावण दहन की बाकायदा तिथि और समय होता है, इसलिए तय समय पर ही रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है तो रावण के पूरे संस्कार की विधि भी अपनाई जानी चाहिए, लेकिन जब भी कोई आयोजक ऐसी परंपराओं से खेलता है तो वह संस्कृति के साथ खिलवाड़ ही माना जाएगा।
उनका कहना है कि दशहरा उत्सव में रावण का पूरी से न जलना शहर, प्रदेश और देश के लिए हानिकारक है। देश और समाज पर कोई विपत्ति आ सकती है।
कई लोगों ने पुलिस प्रशासन और आयोजकों के प्रबंधों को नाकाफी बताया, क्योंकि रावण, कुंभकरण, मेघनाद के पुतले जलने से पहले इन्हें झपटने के लिए भगदड़ का माहौल पैदा हो गया। इसकी वजह से दर्जनों लोग चोटिल हो गए और रावण की लकड़ी में लगी आग में झुलस गए।
इस धार्मिक आयोजन के दौरान जिस तरह का डांस दिखा, वह कार्यक्रम की गरिमा से परे था, जबकि इस आयोजन से नगर के कई प्रतिष्ठित लोग जुड़े थे, लेकिन कार्यक्रम के आयोजकों ने इस पर गौर नहीं किया। परिवारों के साथ आए लोग मंच पर किए जा रहे भद्दे डांस का विरोध तो नहीं जता पाए, लेकिन आंखें नीची जरूर की।
कई ने यहां तक कहा कि ऐसे भौंडे नृत्य कराने की बजाए आयोजकों को चाहिए था कि वे प्रोफेशनल डांसरों की बजाए, उभरते हुए प्रतिभावान कलाकारों को अवसर देतेे।
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के उपाध्यक्ष पंडित पवन शर्मा का कहना है कि रावण दहन की परंपरा सदियों पुरानी है और परंपराओं को पूरे विधिविधान से ही निभाना चाहिए, क्योंकि हमारी संस्कृति और परंपराएं खेल नहीं, बल्कि हमारी विरासत का निचौड़ है।
उन्होंने कहा कि पंचांग में रावण दहन की बाकायदा तिथि और समय होता है, इसलिए तय समय पर ही रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है तो रावण के पूरे संस्कार की विधि भी अपनाई जानी चाहिए, लेकिन जब भी कोई आयोजक ऐसी परंपराओं से खेलता है तो वह संस्कृति के साथ खिलवाड़ ही माना जाएगा।
उनका कहना है कि दशहरा उत्सव में रावण का पूरी से न जलना शहर, प्रदेश और देश के लिए हानिकारक है। देश और समाज पर कोई विपत्ति आ सकती है।