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अनब्रांडेड खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लगने से फिर लगेगा महंगाई का तड़का

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 03:06 AM IST
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Due to the imposition of GST on unbranded food items, inflation will flare up again
करनाल। महंगाई से जूझ रहे जन सामान्य को एक और जोर का झटका धीरे से लगने जा रहा है। जिसके तहत थैली बंद ब्रांडेड और अनब्रांडेड आटा, चावल और दालों के भावों में इजाफा हो सकता है। 18 जुलाई से अनब्रांडेड थैली बंद आटा, चावल, दालों की बिक्री पर भी पांच प्रतिशत जीएसटी लगने जा रही है। इसकी परिधि में अब बड़ी संख्या में कारोबारी आ जाएंगे। इन सभी को जीएसटी भरना होगा, जिसका असर महंगाई के रूप में देखने को मिलेगा।
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कारोबारियों को कहना है कि जीएसटी लगने के बाद तीन से पांच रुपये प्रति किलो की महंगाई आटा, चावल, दालों पर आ सकती है। पिछले दिनों जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी, जिसमें 18 जुलाई से थैलीबंद अनब्रांडेड आटा, चावल, दाल को जीएसटी के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया था। इसे लेकर थोक व्यापारियों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। साथ ही फुटकर व्यापारियों में भी रोष देखा जा रहा है। इधर हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलने का समय मांगा है। व्यापारी कल्याण बोर्ड का भी मानना है कि कोई भी व्यापारी या कारोबारी अपने घर से टैक्स नहीं देता है, टैक्स कारोबार से ही निकालेगा, उसका खामियाजा कहीं न कहीं, आम उपभोक्ता को भी भुगतना होगा।
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पुरानी सब्जी मंडी के दालों के थोक व्यापारी राधेश्याम ने बताया कि जीएसटी के दायरे में आने के बाद दालों के भावों में पांच से सात रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हो सकता है। इसके साथ-साथ आटा अभी 2400 रुपये प्रति क्विंटल है तो 2525 रुपये प्रति क्विंटल के करीब पहुंच सकता है। अहम बात यह है कि अभी अनब्रांडेड थैलीबंद खाद्य वस्तुएं उपभोक्ताओं को ब्रांडेड से सस्ते दामों पर उपलब्ध हो जाती थीं लेकिन अब वो भी महंगी मिलेंगी। इसी तरह बेसन आदि के भाव बढ़ सकते हैं। पहले से ही खाद्य पदार्थो पर महंगाई है।
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-अभी तक जो जिन फर्मो के ब्रांड रजिस्टर्ड होते थे, उन्हीं पर जीएसटी लगता था, लेकिन 18 जुलाई से अनब्रांडेड थैलीबंद चावल, आटा व दालों आदि खाद्य वस्तुओं पर भी जीएसटी लगाने की सरकार ने तैयारी कर दी है। यदि बिल्कुल प्लेन थैली है, तब तो जीएसटी नहीं लगेगी, लेकिन यदि चावल का नाम, क्वालिटी, ब्रांड नाम आदि पहचान के लिए कुछ भी लिख दिया तो वो जीएसटी की परिधि में आ जाएगी। अनब्रांडेड 500 से भी अधिक कारोबारी हैं, अब ये सभी जीएसटी की परिधि में आ जाएंगे। इसका असर भी अंतत: उपभोक्ता पर ही पड़ेगा।

नरेश बंसल, प्रधान तरावड़ी राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन।
-अनब्रांडेड थैलीबंद खाद्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने का निर्णय ठीक नहीं है। क्योंकि जितना टैक्स बढ़ाया जाता है, उतना ही व्यापारी उससे बचने के तरीके तलाशते हैं, कहीं न कहीं टैक्स चोरी बढ़ती है, लेकिन यदि सरकार टैक्स कम करती है तो व्यापारी भी पूरी ईमानदारी से टैक्स अदायगी करता है, अपना कारोबार बढ़ाता है, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ता है। इस मामले में हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। उम्मीद है कि शीघ्र समय मिलेगा और 18 जुलाई से अनब्रांडेड खाद्य वस्तुओं पर प्रस्तावित जीएसटी के बारे में बात की जाएगी। व्यापारियों की भावनाओं से भी अवगत कराया जाएगा।
- कृष्ण लाल तनेजा, प्रधान हरियाणा व्यापारी कल्याण बोर्ड करनाल।
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दालों के थोक भाव (प्रति किलो)
दाल मौजूदा भाव जीएसटी के बाद
अरहर 95 रुपये 100 रुपये
मसूर 85-90 रुपये 95-100 रुपये
मूंग 90 रुपये 96 रुपये
चना 90 रुपये 95 रुपये
बेसन 60 रुपये 63 रुपये
आटा 24 रुपये 25.50 रुपये
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