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Karnal News: लेफ्टिनेंट बनकर गांव पहुंचे डॉ. मोहित, निकाला रोड शो
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संवाद न्यूज एजेंसी
निगदू। सेना में लेफ्टिनेंट बनने के सवा महीने बाद डॉ. मोहित चौहान अपने पतनपुरी गांव पहुंचे। रविवार को उनके गांव में रोड शो निकालकर स्वागत किया गया। गांव का यह पहला बेटा है, जो सेना में अफसर बना है।
इससे पहले मोहित ने गांव के मंदिर, गोगामाड़ी, नगर खेड़ा पर माथा टेका। किसान परिवार के बेटे डॉ. मोहित अप्रैल में पुणे से पढ़ाई पूरी करके आर्मी में लेफ्टिनेंट बने थे। मोहित ने बताया इस सफलता में उनके परिवार का विशेष योगदान रहा है। उनके दिवंगत पिता नरेश कुमार का सपना था कि वह देश सेवा करें। पिता के सपने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत करके यह मुकाम पाया है। उन्होंने बताया कि पुणे में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) में थल सेना या वायु सेना में से किसी एक में लेफ्टिनेंट चुनने का मौका था। जिसमें से उन्होंने भारतीय सेना को चुना, इसके बाद उन्हें पहली नियुक्ति दिल्ली के कैंट अस्पताल में मिली है। उन्होंने वर्ष 2020 में नीट 637 रैंक से पास की थी।
डॉ. मोहित ने सातवीं तक की पढ़ाई निगदू के निजी स्कूल से की। बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए पिता नरेश कुमार परिवार सहित करनाल शहर में शिफ्ट हो गए थे। 2018 में नरेश कुमार की सड़क हादसे में मौत हो गई, उस समय मोहित 11वीं में पढ़ता था। सिर से पिता का साया उठने के बाद मोहित की पढ़ाई को लेकर गांव में रह रहे दादा ठाकुर ठाठ सिंह ने सहयोग किया। पिता की मौत के बाद मोहित का परिवार फिर से पतनपुरी गांव में रहने लग गया।
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निगदू। सेना में लेफ्टिनेंट बनने के सवा महीने बाद डॉ. मोहित चौहान अपने पतनपुरी गांव पहुंचे। रविवार को उनके गांव में रोड शो निकालकर स्वागत किया गया। गांव का यह पहला बेटा है, जो सेना में अफसर बना है।
इससे पहले मोहित ने गांव के मंदिर, गोगामाड़ी, नगर खेड़ा पर माथा टेका। किसान परिवार के बेटे डॉ. मोहित अप्रैल में पुणे से पढ़ाई पूरी करके आर्मी में लेफ्टिनेंट बने थे। मोहित ने बताया इस सफलता में उनके परिवार का विशेष योगदान रहा है। उनके दिवंगत पिता नरेश कुमार का सपना था कि वह देश सेवा करें। पिता के सपने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत करके यह मुकाम पाया है। उन्होंने बताया कि पुणे में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) में थल सेना या वायु सेना में से किसी एक में लेफ्टिनेंट चुनने का मौका था। जिसमें से उन्होंने भारतीय सेना को चुना, इसके बाद उन्हें पहली नियुक्ति दिल्ली के कैंट अस्पताल में मिली है। उन्होंने वर्ष 2020 में नीट 637 रैंक से पास की थी।
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डॉ. मोहित ने सातवीं तक की पढ़ाई निगदू के निजी स्कूल से की। बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए पिता नरेश कुमार परिवार सहित करनाल शहर में शिफ्ट हो गए थे। 2018 में नरेश कुमार की सड़क हादसे में मौत हो गई, उस समय मोहित 11वीं में पढ़ता था। सिर से पिता का साया उठने के बाद मोहित की पढ़ाई को लेकर गांव में रह रहे दादा ठाकुर ठाठ सिंह ने सहयोग किया। पिता की मौत के बाद मोहित का परिवार फिर से पतनपुरी गांव में रहने लग गया।
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