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मेरे अपनों को मेरी दरकार अब मत रोको सरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2020 01:51 AM IST
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dont stop my loved ones frome my government
मेरे अपनों को मेरी दरकार, अब बाजार खुलने लगे हैं, इंडस्ट्री भी शुरू हो गईं हैं, लेकिन हजारों की संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने घरों पर अपनों के पास पहुंचने की आस लगाए बैठें हैं। जिला प्रशासन उन्हें समझा भी रहा है लेकिन प्रवासी किसी भी तरह अपनों के पास पहुंचने की जिद पर अड़े हुए हैं। लाख समझाने के बावजूद भी वो रुकने को तैयार नहीं। ऐसे में जिला प्रशासन ने वीरवार को दो बसों से कंबोपुरा कम्युनिटी हाल से 52 प्रवासियों को हिसार पहुंचाया है। अभी यहां 56 श्रमिक और जाने को तैयार हैं, जिनका मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है।
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राधा स्वामी सत्संग भवन की तीन शाखाओं में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों को आश्रय दिया गया। उनके ठहरने के दौरान उनके खानपान का पूरा ध्यान रखा गया लेकिन वह लगातार अपने घरों को जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। राधा स्वामी सत्संग भवन के सेवादार देव दुआ ने बताया कि जिला प्रशासन ने वीरवार को 52 श्रमिकों के नाम की सूची जारी की थी। उनका मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें कम्युनिटी सेंटर कंबोपुरा भेजा गया था, जहां से सुबह को सात बजे जिला प्रशासन ने दो बसों से हिसार भिजवा दिया है। कंबोपुरा में कम्युनिटी सेंटर से बताया गया कि 56 प्रवासी श्रमिक मेडिकल कराने के बाद यहां और भेजे गए हैं, जिन्हें उनके राज्य बिहार भेजा जाएगा। कंबोपुरा से प्रशासन ने हिसार रेलवे स्टेशन भिजवाया है, वहां से चलने वाली स्पेशल ट्रेन से श्रमिकों को बिहार भेजा जाएगा।
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-तीन दिन पहले ही कंबोपुरा आए थे, आज यहां से 52 श्रमिकों को बिहार राज्य के विभिन्न स्थानों को भेजा गया है। मुझे भी यहां लाया गया है। मेडिकल परीक्षण हो चुका है। मुझे भी उम्मीद जगी है कि शीघ्र ही मैं भी अपनों के पास पहुंच जाऊंगा। मैं अपने माता पिता का इकलौता हूं। परिजनों की तबियत भी खराब है, मेरा जाना जरूरी है।
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-प्रभू नाथ मंडल, भागलपुर बिहार।
-मुझे जानकारी मिली है कि ट्रेन जाने वाली है, मैने भी रजिस्ट्रेशन कराया था। अब मेडिकल जांच कराकर यहां लाया गया है। आज दो बसों से लोग गए गए हैं। उम्मीद हैं कि मुझे भी जल्द ही मेरे घर पहुंचा दिया जाएगा। मुझे अपने घर गए हुए नौ महीने बीतगए हैं, इंद्री में रहकर काम करता था, अब काम बंद हो गया है। परिजनों की बहुुत याद आ रही है।
-दानिश, पूर्णिया, बिहार।
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