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Karnal News: बंदी छोड़ दिवस पर गुरुद्वारा मंजी साहिब में सजा दीवान
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिवाली और बंदी छोड़ दिवस के अवसर पर मंगलवार रात गुरुद्वारा मंजी साहिब में श्रद्धा और उत्साह के साथ दीवान सजाया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर प्रमुख ग्रंथी अमृतपाल सिंह ने अरदास करवाई और शब्द-कीर्तन का शुभारंभ किया।
बंदी छोड़ दिवस पर श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका, सुख-शांति की कामना की और मोमबत्तियां जलाकर परिसर को रोशनी से आलोकित किया। हजूरी रागी जत्था भाई बलविंद्र सिंह ने रैनड़ीए चमकन तारे, जागे संत जना मिले राम पियारे, सतगुरु बंदी छोड़ है, जीवन मुक्त करें ओडीणा शब्द गायन कर गुरु की महिमा का गुणगान किया।
ग्रंथी अमृतपाल सिंह ने बताया कि सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त करा इसी दिन श्री अमृतसर साहिब पहुंचे थे। उनकी आगमन की खुशी में दीप प्रज्वलित किए गए और आतिशबाजी की गई थी। तभी से यह दिन ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। वहीं दिवाली के अवसर पर गुरुद्वारा निर्मल कुटिया में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सजे दीवान में श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका और विश्व शांति की कामना की।
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करनाल। दिवाली और बंदी छोड़ दिवस के अवसर पर मंगलवार रात गुरुद्वारा मंजी साहिब में श्रद्धा और उत्साह के साथ दीवान सजाया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कर प्रमुख ग्रंथी अमृतपाल सिंह ने अरदास करवाई और शब्द-कीर्तन का शुभारंभ किया।
बंदी छोड़ दिवस पर श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका, सुख-शांति की कामना की और मोमबत्तियां जलाकर परिसर को रोशनी से आलोकित किया। हजूरी रागी जत्था भाई बलविंद्र सिंह ने रैनड़ीए चमकन तारे, जागे संत जना मिले राम पियारे, सतगुरु बंदी छोड़ है, जीवन मुक्त करें ओडीणा शब्द गायन कर गुरु की महिमा का गुणगान किया।
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ग्रंथी अमृतपाल सिंह ने बताया कि सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त करा इसी दिन श्री अमृतसर साहिब पहुंचे थे। उनकी आगमन की खुशी में दीप प्रज्वलित किए गए और आतिशबाजी की गई थी। तभी से यह दिन ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। वहीं दिवाली के अवसर पर गुरुद्वारा निर्मल कुटिया में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सजे दीवान में श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका और विश्व शांति की कामना की।
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