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जूट के बैग में नहीं पॉलीथिन के बैग में बंटा अल्पाहार
करनाल/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2015 12:59 AM IST
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सीएम सिटी सहित पूरे जिलेभर को स्वच्छ भरत अभियान के तहत स्वच्छ बनाने की कवायद को रविवार को करारा झटका लगा। खुद प्रशासनिक अधिकारियों ने इस अभियान को करीब 15 हजार पॉलीथिन बांटकर जिले को पॉलीथिन मुक्त बनाने के लिए नगर निगम आयुक्त द्वारा छेड़े गए विशेष अभियान को पलीता लगा दिया।
इतना ही नहीं इस कार्यक्रम को पूरी तरह से पॉलीथिन मुक्त बनाने के आयोजन का सपना भी साकार नहीं हो पाया। एक सप्ताह के प्रचार-प्रसार के बाद भी योग करने आए करीब 12 हजार स्कूली बच्चों को पॉलीथिन में डालकर अल्पाहार दिया गया। इतना ही नहीं इन बच्चों को स्कूल वाइज अल्पाहार देने के लिए अलग से बड़े-बड़े पॉलीथिन की व्यवस्था खुद जिला प्रशासन ने मुहैया कराई।
हैरत की बात तो यह है कि इतने बड़े स्तर पर पॉलीथिन बंटवाने के बावजूद पूरे मामले की जिम्मेदारी लेने वाला कोई भी अधिकारी नहीं है। दरअसल करनाल में होने वाले राज्यस्तरीय योग कार्यक्रम के तहत आने वाले सभी स्कूली बच्चों को जिला प्रशासन की ओर से अल्पाहार दिया जाना था।
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अल्पाहार को डालने के लिए जिला प्रशासन की ओर से जूट के बैग मुहैया कराने थे। इन्हीं जूट से निर्मित बैग में डालकर बच्चों को अल्पाहार देने की योजना बनाई गई थी, ताकि शहर में पॉलीथिन के कारण प्रदूषण न फैले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूरे आयोजन में एक भी जूट का बैग दिखाई नहीं दिया। सभी बच्चों व अपने साथ आए अभिभावकों व टीचर्स को पॉलीथिन में ही डालकर अल्पाहार दिया गया। ध्यान रहे कि पॉलीथिन बेचने पर वैसे ही सरकार की ओर से जुर्माने का प्रावधान है।
मेरे संज्ञान में इस तरह का मामला नहीं है। बच्चों को जूट के बैग में अल्पाहार देने की बात मुझे नहीं पता। हां हमारे द्वारा शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने का कार्य जरूर शुरू किया गया है। अभियान के साथ शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं व बैंकों को भी जोड़ा गया है। जूट के बैग भी छपवाए जा रहे हैं। इन्हें जल्द ही शहरभर में बंटवाया भी जाएगा।
सुमेधा कटारिया, आयुक्त नगर निगम, करनाल।
बच्चों को जूट के बैग में अल्पाहार देने की व्यवस्था तो जरूर थी, लेकिन उसका जिम्मा प्रशासनिक अधिकारियों के पास ही था। हमारी व्यवस्था योग कार्यक्रम के संचालन की थी। साथ ही जहां जरूरत हो वहां अपने वालंटियर मुहैया कराने की थी। पॉलीथिन में अल्पाहार देकर निश्चित तौर पर स्वच्छता अभियान को प्रशासन ने झटका दिया है। इसके कारण क्या रहे मुझे नहीं पता।
केहर सिंह, प्रवक्ता, पतंजलि योग संस्थान।
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इतना ही नहीं इस कार्यक्रम को पूरी तरह से पॉलीथिन मुक्त बनाने के आयोजन का सपना भी साकार नहीं हो पाया। एक सप्ताह के प्रचार-प्रसार के बाद भी योग करने आए करीब 12 हजार स्कूली बच्चों को पॉलीथिन में डालकर अल्पाहार दिया गया। इतना ही नहीं इन बच्चों को स्कूल वाइज अल्पाहार देने के लिए अलग से बड़े-बड़े पॉलीथिन की व्यवस्था खुद जिला प्रशासन ने मुहैया कराई।
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हैरत की बात तो यह है कि इतने बड़े स्तर पर पॉलीथिन बंटवाने के बावजूद पूरे मामले की जिम्मेदारी लेने वाला कोई भी अधिकारी नहीं है। दरअसल करनाल में होने वाले राज्यस्तरीय योग कार्यक्रम के तहत आने वाले सभी स्कूली बच्चों को जिला प्रशासन की ओर से अल्पाहार दिया जाना था।
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अल्पाहार को डालने के लिए जिला प्रशासन की ओर से जूट के बैग मुहैया कराने थे। इन्हीं जूट से निर्मित बैग में डालकर बच्चों को अल्पाहार देने की योजना बनाई गई थी, ताकि शहर में पॉलीथिन के कारण प्रदूषण न फैले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूरे आयोजन में एक भी जूट का बैग दिखाई नहीं दिया। सभी बच्चों व अपने साथ आए अभिभावकों व टीचर्स को पॉलीथिन में ही डालकर अल्पाहार दिया गया। ध्यान रहे कि पॉलीथिन बेचने पर वैसे ही सरकार की ओर से जुर्माने का प्रावधान है।
मेरे संज्ञान में इस तरह का मामला नहीं है। बच्चों को जूट के बैग में अल्पाहार देने की बात मुझे नहीं पता। हां हमारे द्वारा शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने का कार्य जरूर शुरू किया गया है। अभियान के साथ शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं व बैंकों को भी जोड़ा गया है। जूट के बैग भी छपवाए जा रहे हैं। इन्हें जल्द ही शहरभर में बंटवाया भी जाएगा।
सुमेधा कटारिया, आयुक्त नगर निगम, करनाल।
बच्चों को जूट के बैग में अल्पाहार देने की व्यवस्था तो जरूर थी, लेकिन उसका जिम्मा प्रशासनिक अधिकारियों के पास ही था। हमारी व्यवस्था योग कार्यक्रम के संचालन की थी। साथ ही जहां जरूरत हो वहां अपने वालंटियर मुहैया कराने की थी। पॉलीथिन में अल्पाहार देकर निश्चित तौर पर स्वच्छता अभियान को प्रशासन ने झटका दिया है। इसके कारण क्या रहे मुझे नहीं पता।
केहर सिंह, प्रवक्ता, पतंजलि योग संस्थान।