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गड़बड़ी पर मुहर, दो कर्मचारियों पर गाज तय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 01:51 AM IST
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Disturbance sealed, two employees fixed
करनाल। रोडवेज वर्कशॉप से अतिरिक्त कबाड़ बेचने के मामले में दो कर्मचारियों (क्लर्क और सहायक) की लापरवाही सामने आई है। दोनों को चार्जशीट करने की सिफारिश की गई है और इसके लिए रोडवेज जीएम ने परिवहन विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखा है। जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में गड़बड़ी हुई है। जीएम के अनुसार इन कर्मचारियों ने न केवल गाड़ी में अतिरिक्त कबाड़ लोड कराया बल्कि कबाड़ी से अतिरिक्त लोड कराए कबाड़ की पेमेंट भी ले ली थी। जिसे अब विभाग द्वारा वापस कराया गया है।
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इस मामलेे को अमर उजाला ने 28 मई को प्रमुखता से उजागर किया था। जिसके अंतर्गत वर्कशाप से दो क्विंटल कबाड़ की बजाय गाड़ी में 33 क्विंटल कबाड़ लोड कर दिया गया था। इस लोडिड गाड़ी को ऑक्शन कमेटी के सदस्यों ने पकड़ा था जबकि ई-नीलामी करके विभाग की ओर से महज दो क्विंटल कबाड़ को 37 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचने की अनुमति थी, लेकिन कबाड़ी की गाड़ी में 31 क्विंटल अतिरिक्त कबाड़ लोड पाया गया था। मामला संज्ञान में आते ही जीएम कुलदीप सिंह ने उसी दिन वर्कशॉप मैनेजर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उनके जवाब के बाद जीएम ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अब अपनी जांच रिपोर्ट जीएम को सौंपी है। जिसके बाद जीएम ने इस मामले में जिम्मेदार दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय को लिखा है।
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1.14 लाख रुपये का था अतिरिक्त कबाड़
बेचे जाने वाले कबाड़ में बसों की सर्विस के बाद जो पुर्जे या अन्य सामान निकलता है वह शामिल होता है। इनमें कुछ चीजें वजन और कुछ चीजें प्रति पीस के हिसाब से नीलाम की जाती हैं। अतिरिक्त लदे कबाड़ की कीमत 1.14 लाख रुपये के करीब थी। कर्मचारी यूनियनों ने इस गड़बड़ी में मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। टीएम पवन कुमार, एकाउंट अफसर राजकुमार और एक अधीक्षक की जांच कमेटी ने इस मामले की जांच की है।
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ऐसे ही लोड हुईं 23 बैटरियां
28 मई को यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया था कि इससे पहले खराब बैटरियों को भी ऐसे ही बेचा गया था। उस समय भी गाड़ी में 43 बैटरियां लोड थी, जबकि 20 बैटरियाें की ही बोली हुई थी। उस वक्त भी यूनियन नेताओं ने 23 बैटरियां गाड़ी से उतरवाई थी। जीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट में बैटरियां भी ऐसे ही लोड कराने की बात सामने आई है। नीलामी की प्रक्रिया में दो माह का समय लगता है। जब नीलामी हुई थी, उस समय 20 बैटरियां बेचने की स्वीकृति ली गई थी। दो माह में 23 और बैटरियां कंडम हो र्गइं। ऐसे में दोनों कर्मचारियों ने बिना स्वीकृति लिए इन्हें भी बेच दिया और पेमेंट भी ले ली थी, हालांकि ये बैटरियां कबाड़ी तक पहुंची। पकड़े जाने पर पहले ही इन्हें गाड़ी से उतरवा लिया था।
भुगतान के बाद कबाड़ नहीं उठाने पर लगता है एक प्रतिशत जुर्माना
नियमानुसार कबाड़ को ई-नीलामी करके ही बेचा जाता है। नीलामी की शर्तों के अनुसार थोड़ा सा अतिरिक्त लोड किया जा सकता है, लेकिन इतना ज्यादा स्क्रैप गाड़ी में पाया जाना गलत है। छह सदस्यीय कमेटी की निगरानी में ई-नीलामी और कबाड़ बेचने की प्रक्रिया होती है। वजन धर्मकांटा पर किया जाता है। पहले खाली गाड़ी तोली जाती है, फिर कबाड़ लदने के बाद वजन होता है। नीलामी की प्रक्रिया में कुल दो माह तक का समय लगता है। 10 दिन बाद पेमेंट होती है। यदि उसके बाद भी स्क्रैप कबाड़ी नहीं उठाता तो कुल राशि का एक प्रतिशत जुर्माना भी देना होता है।

लापरवाही के कारण विभाग की हुई बदनामी : जीएम
यदि कर्मचारी पूरे कबाड़ की स्वीकृति लेकर बेचते तो इसका रेट भी ज्यादा मिलता। वहीं, दो क्विंटल स्क्रैप की नीलामी करके 33 क्विंटल लोड करना गलत है। लोड करने के बाद कर्मचारियों ने स्वीकृति लेनी चाही थी मगर ऐसा करना गलत है, क्योंकि स्वीकृति नीलामी से पहले ली जाती है। जांच रिपोर्ट में दोनों कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। इसलिए नियम-7 के तहत इन्हें चार्जशीट करने के लिए मुख्यालय को लिखा गया है।
- कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज करनाल
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