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पार्षदों के मनमुटाव से शहर का विकास रुका
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Wed, 18 Jun 2014 11:34 PM IST
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तरावड़ी के नगर पालिका हाउस की बैठक में बुधवार को 15 पार्षदों में से केवल पालिका अध्यक्ष समेत मात्र चार पार्षदों ही उपस्थित हुए।
जिस कारण पालिका हाउस की बैठक बिना किसी नतीजे के स्थगित करनी पड़ी और इससे पहले भी 30 मई को जो पालिका हाउस की बैठक हुई थी उसमें भी 11 पार्षद उपस्थित नहीं हुए थे।
जिस कारण शहर का कोई भी विकास का काम पास नहीं हो पाया है। इस बैठक में 11 पार्षदों का उपस्थित न होना, इस बात की ओर संकेत करता है कि पालिका में इस समय सबकुछ ठीक नहीं है, जिस तरह से इस समय माहौल बनता जा रहा है। यह शहर के विकास पर पूर्ण रूप से ग्रहण लगा देगा।
जिस शिवपुरी सेवा समिति के मामले को लेकर पार्षदों के खिलाफ हाईकोर्ट में जो केस चल रहा है। उसकी जांच भी पूरी हो चुकी है, जिसका परिणाम आना अभी बाकी है।
अगर शिवपुरी सेवा समिति तथा शहर के लोगों ने बच्चा घाट की भमि पर बनी दुकानों के मामले में रुचि ली होती तो नौबत पालिका हाउस की बैठक से 11 पार्षदों के वाकआउट करने की नहीं आती।
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इसलिए अगर शहर के लोगों ने इसमें अब भी रुचि नहीं ली तो आने वाले दिनों में पार्षदों की नाराजगी और भी बढ़ सकती है। जिसका खामियाजा शहर की जनता को किसी न किसी रूप में भुगतना पड़ सकता है।
इधर 11 पार्षदों का यह आरोप है कि हम जिस मुद्दे को पालिका हाउस में पास करते हैं, प्रशासन उस पर अमल नहीं करता तो फिर बैठक में उपस्थित होने का क्या मतलब हर जाता है।
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जिस कारण पालिका हाउस की बैठक बिना किसी नतीजे के स्थगित करनी पड़ी और इससे पहले भी 30 मई को जो पालिका हाउस की बैठक हुई थी उसमें भी 11 पार्षद उपस्थित नहीं हुए थे।
जिस कारण शहर का कोई भी विकास का काम पास नहीं हो पाया है। इस बैठक में 11 पार्षदों का उपस्थित न होना, इस बात की ओर संकेत करता है कि पालिका में इस समय सबकुछ ठीक नहीं है, जिस तरह से इस समय माहौल बनता जा रहा है। यह शहर के विकास पर पूर्ण रूप से ग्रहण लगा देगा।
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जिस शिवपुरी सेवा समिति के मामले को लेकर पार्षदों के खिलाफ हाईकोर्ट में जो केस चल रहा है। उसकी जांच भी पूरी हो चुकी है, जिसका परिणाम आना अभी बाकी है।
अगर शिवपुरी सेवा समिति तथा शहर के लोगों ने बच्चा घाट की भमि पर बनी दुकानों के मामले में रुचि ली होती तो नौबत पालिका हाउस की बैठक से 11 पार्षदों के वाकआउट करने की नहीं आती।
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इसलिए अगर शहर के लोगों ने इसमें अब भी रुचि नहीं ली तो आने वाले दिनों में पार्षदों की नाराजगी और भी बढ़ सकती है। जिसका खामियाजा शहर की जनता को किसी न किसी रूप में भुगतना पड़ सकता है।
इधर 11 पार्षदों का यह आरोप है कि हम जिस मुद्दे को पालिका हाउस में पास करते हैं, प्रशासन उस पर अमल नहीं करता तो फिर बैठक में उपस्थित होने का क्या मतलब हर जाता है।