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वैध कराने में अब विकास शुल्क बनेगा रोड़ा, औसतन 1500 करोड़ कराने होंगे 50 कालोनियों को जमा
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Fri, 25 Nov 2016 12:49 AM IST
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वैध कराने में अब विकास शुल्क बनेगा रोड़ा, औसतन 1500 करोड़ कराने होंगे 50 कालोनियों को जमा
- फोटो : Amar Ujala
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प्रदेश सरकार द्वारा अवैध कालोनियों को वैध कराने को लेकर एक हजार रुपये प्रति गज की शर्त ने अवैध कालोनियों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ शहर में कालोनियों को वैध कराने को लेकर आंदोलन और भूख हड़ताल चल रही है, वहीं सरकार के इस फैसले से अवैध कालोनियों के निवासियों की नींद उड़ गई है। एक अनुमान के अनुसार, एक बसंत बिहार की बात करें तो सरकार के हिसाब यहां का विकास शुल्क करीब 105 करोड़ रुपये बनता है। ऐसे में कालोनी को 52 करोड़ रुपये पहले जमा कराने होंगे, इसके बाद ही वह वैध होने की प्रक्रिया में शामिल हो सकेगी। वहीं, निगम के ही कुछ जानकार अधिकारी मानते हैं कि अगर यही नियम रहे तो करनाल की करीब 50 कालोनियों को वैध होना है। ऐसे में अगर 50 कालोनियों के हिसाब से बात करें तो औसतन एक कालोनी से 30 करोड़ रुपये का भी आंकलन करें तो यह राशि करीब 1500 करोड़ रुपये बनती है। सवाल यह है कि क्या अवैध कालोनियों के निवासी इस राशि का जमा कराएंगे या करा पाएंगे। आशंका जताई जा रही है कि अब यह विकास शुल्क ही कालोनियों को वैध होने में बाधा बन सकता है। क्योंकि अवैध कालोनियों के निवासियों से विकास शुल्क जमा कराना इतना आसान नहीं है।
प्रशासन ने कमर कसी, तैयारियां शुरू
प्रदेश सरकार के निर्णय से अवैध कालोनी वासी ठिठक गए हैं। वहीं, नगर निगम व जिला प्रशासन ने कालोनियों को लेकर इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुरुवार को नगर निगम के आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया के साथ सेक्टर-12 स्थित लघु-सचिवालय में, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण व निदेशक शेखर विद्यार्थी वीडियो कोनफ्रैंस (वीसी) में इस पर विस्तार से चर्चा की। वीसी में उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ भी उपस्थित थे। आयुक्त डा. दहिया ने बताया कि अवैध कालोनियों को नियमित करवाने के लिए करनाल नगर निगम की और से काफी दिनो से कार्यवाही की जा रही है, जिसमें वैध होने की शर्तें पूरी करने वाली करीब 50 कालोनियों के नक्षे इत्यादि निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय के पास भेजे गए थे। इस कार्य के लिए निगम के सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग में कार्यकारी अभियंता महीपाल, सचिव बाल सिंह, वरिश्ठ लेखा अधिकारी एएन शर्मा, नगरीय प्रयोजना अधिकारी प्रवीन कुमार चुघ, भवन निरिक्षक राजेष कुमार तथा आई.टी. मैनेजर गौरव अग्रवाल भी उपस्थित थे।
मंगलवार व वीरवार को लगेंगे शिविर
कालोनियां वैध करने की प्रकिया को लेकर करनाल नगर निगम ने अपनी तैयारियां कर ली हैं। इसके तहत निगम कार्यालय में सप्ताह में मंगलवार व वीरवार दो दिन बाद दोपहर 4 से 5 बजे तक शिविर आयोजित किए जाएंगे। जहां से कोई भी व्यक्ति आकर प्रकिया बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। जानकारी बारे पैम्फलैट् भी छपवाए जाएंगे।
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ऐसे होगी नियमित
सर्वप्रथम सभी कालोनियों में आरडब्ल्यूए यानि रैजिडेंट वैल्फेयर एसोसिएशन का गठन करना जरूरी है। प्रत्येक एसोसिएशन अपना प्रधान, सचिव, खजांची व सदस्य बनाएंगी। सभी आरडब्ल्यूए को जिला रजिस्टार के पास रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। आरडब्ल्यूए कालोनियों वासियों से विकास शुल्क की निर्धारित राषि एकत्र करेंगे। इसके रिकार्ड के लिए एक रजिस्टर मेनटेन करना होगा, जिसमें परिवार के मुखिया का नाम, पिता या पति का नाम, प्रॉपर्टी टैक्स की आईडी नंबर लिखने के साथ-साथ हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।
आरडब्ल्यूए व नगर निगम का एस्क्रो खाता खुलेगा
विकास शुल्क के रूप में एकत्र राशि से बैंक में एस्क्रौ अकाउंट यानि निलंब संपति खाता खोला जाएगा, जो नगर निगम व आर.डब्ल्यू.ए. के प्रधान का संयुक्त हस्ताक्षरित होगा। इस प्रकार इस खाते से दोनो में से कोई भी अकेले अपने स्तर पर राशि नहीं निकाल पाएगा। उन्होंने बताया कि आर.डब्ल्यू.ए. को एक अंडरटेकिंग देनी होगी। आयुक्त ने बताया कि जो कालोनी विकास शुल्क की 50 प्रतिशत राशि जमा करवा देगी, वह प्रोविजनल यानि अस्थाई तौर पर वैध हो जाएगी। इसके बाद शेष 50 प्रतिशत राशि जमा करवानी पड़ेगी।
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प्रशासन ने कमर कसी, तैयारियां शुरू
प्रदेश सरकार के निर्णय से अवैध कालोनी वासी ठिठक गए हैं। वहीं, नगर निगम व जिला प्रशासन ने कालोनियों को लेकर इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। गुरुवार को नगर निगम के आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया के साथ सेक्टर-12 स्थित लघु-सचिवालय में, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण व निदेशक शेखर विद्यार्थी वीडियो कोनफ्रैंस (वीसी) में इस पर विस्तार से चर्चा की। वीसी में उपायुक्त मनदीप सिंह बराड़ भी उपस्थित थे। आयुक्त डा. दहिया ने बताया कि अवैध कालोनियों को नियमित करवाने के लिए करनाल नगर निगम की और से काफी दिनो से कार्यवाही की जा रही है, जिसमें वैध होने की शर्तें पूरी करने वाली करीब 50 कालोनियों के नक्षे इत्यादि निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय के पास भेजे गए थे। इस कार्य के लिए निगम के सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग में कार्यकारी अभियंता महीपाल, सचिव बाल सिंह, वरिश्ठ लेखा अधिकारी एएन शर्मा, नगरीय प्रयोजना अधिकारी प्रवीन कुमार चुघ, भवन निरिक्षक राजेष कुमार तथा आई.टी. मैनेजर गौरव अग्रवाल भी उपस्थित थे।
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मंगलवार व वीरवार को लगेंगे शिविर
कालोनियां वैध करने की प्रकिया को लेकर करनाल नगर निगम ने अपनी तैयारियां कर ली हैं। इसके तहत निगम कार्यालय में सप्ताह में मंगलवार व वीरवार दो दिन बाद दोपहर 4 से 5 बजे तक शिविर आयोजित किए जाएंगे। जहां से कोई भी व्यक्ति आकर प्रकिया बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है। जानकारी बारे पैम्फलैट् भी छपवाए जाएंगे।
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ऐसे होगी नियमित
सर्वप्रथम सभी कालोनियों में आरडब्ल्यूए यानि रैजिडेंट वैल्फेयर एसोसिएशन का गठन करना जरूरी है। प्रत्येक एसोसिएशन अपना प्रधान, सचिव, खजांची व सदस्य बनाएंगी। सभी आरडब्ल्यूए को जिला रजिस्टार के पास रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। आरडब्ल्यूए कालोनियों वासियों से विकास शुल्क की निर्धारित राषि एकत्र करेंगे। इसके रिकार्ड के लिए एक रजिस्टर मेनटेन करना होगा, जिसमें परिवार के मुखिया का नाम, पिता या पति का नाम, प्रॉपर्टी टैक्स की आईडी नंबर लिखने के साथ-साथ हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।
आरडब्ल्यूए व नगर निगम का एस्क्रो खाता खुलेगा
विकास शुल्क के रूप में एकत्र राशि से बैंक में एस्क्रौ अकाउंट यानि निलंब संपति खाता खोला जाएगा, जो नगर निगम व आर.डब्ल्यू.ए. के प्रधान का संयुक्त हस्ताक्षरित होगा। इस प्रकार इस खाते से दोनो में से कोई भी अकेले अपने स्तर पर राशि नहीं निकाल पाएगा। उन्होंने बताया कि आर.डब्ल्यू.ए. को एक अंडरटेकिंग देनी होगी। आयुक्त ने बताया कि जो कालोनी विकास शुल्क की 50 प्रतिशत राशि जमा करवा देगी, वह प्रोविजनल यानि अस्थाई तौर पर वैध हो जाएगी। इसके बाद शेष 50 प्रतिशत राशि जमा करवानी पड़ेगी।