भारतीय किसान संघ ने सरकार पर बोला हमला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के खिलाफ प्रदेशभर की किसान यूनियनों द्वारा खोले गए मोर्च के बाद अब आरएसएस समर्थित भारतीय किसान संघ ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं। रविवार को किसान संघ ने सरकारी तंत्र का प्रयोग करते हुए जमकर सरकार पर निशाना साधा। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप जड़ते हुए संघ ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। कार्यक्रम की खास यह रही कि सरकार के खिलाफ नारेबाजी और मोर्चाबंदी करने वालों में आरएसएस व भाजपा के पदाधिकारी भी शामिल रहे। करीब तीन घंटे तक चले कार्यक्रम में किसान संघ ने पीएम को भी घेरा और सीएम को भी। संघ के पदाधिकारियों ने सरकार पर अपने तरकस से जमकर तीर छोड़े।
दरअसल, रविवार को शहर की पुरानी सब्जी मंडी ग्राउंड में आरएसएस से संबंधित भारतीय किसान संघ का कार्यक्रम हुआ। इसमें में किसानों की मांगों और समस्याओं को लेकर मंथन किया गया। इस दौरान डीआईपीआरओ ऑफिस के कर्मचारी तक कार्यक्रम को कवर करने के लिए मौजूद रहेे। सूत्रों का दावा है कि माइक तक डीआईपीआरओ आफिस की तरफ से उपलब्ध कराए गए, हालांकि डीआईपीआरओ धर्मबीर सिंह इस बात से इंकार करते हैं।
पंडाल में सरकार की खामियां सुनने वालों में सीएम द्वारा बनाई गई सीएम कैंप आफिस की 12 सदस्यीय कमेटी के कई सदस्य भी शामिल रहे। किसान संघ के कार्यक्रम के बाद संघ ने मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को सौंपा। खास बात यह रही कि नायब तहसीलदार ज्ञापन लेने के लिए मंच पर ही चढ़ गए। इस मौके पर जगदेव पाढ़ा, गुरबख्शीश सिंह, सुरेंद्र संधु, हरविंद्र मंढाण, अमन गौतम, तेग सिंह राणा, सूरत सिंह गोराया, ऋषिपाल शास्त्री, सुभाष चंद्र, चंचल सिंह, यूरेंद्र सिंह, सुरेश जांगड़ा आदि मौजूद रहे।
केंद्र और प्रदेश में व्यापारियों फायदा पहुंचाने वाली सरकार : चौहान
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम सिंह चौहान ने कहा कि देश व प्रदेश अभी तक सत्ता मेें आई हर पार्टी की सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। मौजूदा सरकार भी अब अपने चुनावी वायदों से मुकर रही है, जो कि राष्ट्र और किसान दोनों के साथ छल हुआ है। यह सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि प्रदेश के किसान को बिजली कनेक्षन महंगे करके लूटने का काम कर रही है। चौहान ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश और केंद्र की सरकार को सबक सिखाया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते थे कि सबका विकास होगा, लेकिन देश की 83 प्रतिशत गांव में रहने वाली आबादी तक पिछले ढाई सालों में पांच पैसे का भी फायदा नहीं पहुंचा है। प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र दहिया ने कृषि बीमा योजना को किसानों को लूटने का तंत्र बताया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपनी इस योजना को ठीक नही किया तो उन्हें सडक़ों पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा।
बीमा योजना की अधिसूचना अंग्रेजी में
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि पीएम राष्ट्रवाद के गीत गा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अधिसूचना अंग्रेजी भाषा में जारी की गई है। इसे कोई किसान तो क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी पढ़ नहीं सकते। यह भी किसानों के साथ धोखा है, इसे हिंदी में जारी किया जाना चाहिए, ताकि आम किसान इसे समझ सके। फसल बीमा योजना में इतनी खामियां हैं कि किसी भी सूरत में किसानों का भला नहीं हो पाएगा। भारतीय किसान संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह ने कहा कि अभी केंद्र सरकार ने उद्योगपतियों के आठ लाख करोड़ का कर्ज माफ किया है। कर्मचारियों को सातवां वेतन दिया है, लेकिन किसानों को उसकी फसल का लागत मूल्य भी नही दिया गया।
ये हैं किसानों की मांगें
1. किसानों की सभी फसलों की लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य व खरीद की गारंटी दी जाये।
2. कृषि आय आयोग का गठन हो और अलग से कृषि का बजट बनें।
3. जबरन बीमा योजना बंद की जाये और सभी फसलों का और आपदा का प्रति एकड़ मुआवजा निर्धारित किया जाए।
4. किसानों को बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध कराया जाए और आपदा आने पर ऋण सरकार स्वयं वहन करे।
5. सहकारी शुगर मिलों की पिराई चाल बढ़ाई जाए और करनाल शुगर मिल को बड़ा किया जाए।
6. मोटी धान का मूल्य 2200 रुपये और बारिक धान का मूल्य 4000 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
7. डीजल के दामों के उतार चढ़ाव पर लगाम लगाई जाए।
8. गन्ने का 2016-17 का रेट 400 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए।
9. कृषि कार्य के लिए 18 घंटे पावर बिजली व गांवों में 24 घंटे दी जाये।
10. खाद्य प्रसंस्करण व पशुपालन में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश का न आने दिया जाए।
11. प्रदेश में धान की खरीद तत्काल शुरू की जाए।