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सुप्रीम फैसले से बदली फिजा
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Wed, 23 Sep 2015 01:07 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के मतदान
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पर रोक लगा दी है। इसी के साथ ही दूसरे चरण के नामांकन प्रक्रिया पर भी अब
विराम लग गया है। अलबत्ता चुनावी बिगुल बजने के बाद प्रत्याशियों का जो
जोश उफान पर था कोर्ट के आदेश के बाद अब वो दूध के उबाल की तरह ठंडा हो गया
है।
प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है और साथ ही खर्च भी। इसके अलावा चुनाव की आड़ में बिजली निगम डिफाल्टरों से 27 लाख रुपये जमा करा चुका है। पहले चरण में असंध और इंद्री में सरंपच के 141 पदों के लिए कुल 1260 आवेदन आए हैं। पंच के 1294 पदों के लिए 3799 प्रत्याशियों ने आवेदन किया है। वहीं जिला परिषद के लिए करनाल में 328 आवेदन भरे गए हैं। चुनाव को नजदीक मानकर सभी प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके थे।
बाकायदा काफी बजट भी खर्च किया जा चुका था, लेकिन अब ऐन वक्त पर किये कराये पर पानी फिर गया है। ऐसे में इन प्रत्याशियों के हाथ न केवल निराशा लगी है बल्कि चुनाव पर संशय हो गया। अब ऊंट किस करवट पर बैठेगा यह तो समय ही तय करेगा। फिलहाल प्रत्याशियों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वह क्या करें और कहां जाएं। वहीं दूसरी और ऐसे प्रत्याशी जो चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित कर चुके थे उनकी दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। अब चुनाव प्रक्रिया दोबारा से होती है तो मैदान में उन्हें टक्कर देने वाला कोई दूसरा भी आ सकता है। ऐसे में हर प्रत्याशी के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे उम्मीदवार जो मैदान में किन्हीं कारणों से नहीं उतर पाए थे उन्हें भी अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
नामांकन पत्रों की भी नहीं हो पाई छंटनी
पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 सितंबर को इन पत्रों की छंटनी होनी थी, लेकिन कोर्ट के आर्डर के कारण इसे 22 सितंबर कर दिया गया था। अब 22 को भी इन नामांकन पत्रों की छंटनी नहीं हो पाई। फिलहाल यह मामला भी अटक गया है।
दूसरे चरण की नामांकन प्रक्रिया के तहत नहीं आया कोई आवेदन
दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू होनी थी, लेकिन दूसरे दिन करनाल व निसिंग में एक भी आवेदन नहीं आया। एसडीएम राजीव मलिक ने बताया कि उनके पास करनाल से एक भी नामांकन नहीं आया। ऑर्डर के अनुसार यदि कोई नामांकन आज तक आया भी है तो उसे सील कर रखने के आदेश हैं। दूसरे चरण की प्रक्रिया के पहले दिन केवल नामांकन पत्र लेने वाले जरूर आए थे। वहीं निसिंग में सहायक रिटर्निंग अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि कर्मचारी व अधिकारी नोमिनेशन के लिए कार्यालय में बैठे जरूर थे, लेकिन कोई भी नामांकन पत्र पहले दिन नहीं आया, बस फार्म लेने वाले आए थे।
बाप-बेटा, सगे भाई सहित पति और पत्नी भी मैदान में
सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के साइड इफेक्ट से बचने के लिए एक ही परिवार से तीन-तीन लोगों ने आवेदन किया है। इंद्री के गांव कलरी जागीर में बाप समय सिंह व बेटा अरुण कुमार सरपंच पद के लिए दावेदारी ठोक चुके हैं तो दो भाई सुरेंद्र व राकेश ने भी नामांकन पत्र दाखिल किए। इसी प्रकार गांव मुरादगढ़ में पिता-पुत्र व पति-पत्नी ने नामांकन पत्र भरे हैं। गांव मुखाला में पिता-पुत्र आमने-सामने हैं। पिता शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते लेकिन पुत्र पवन शैक्षणिक योग्यता पूरी करता है। अब स्टे हटने के बाद ही तय हो पायेगा कि इनमें से चुनाव लड़ेगा कौन?
इंद्री में कुछ इस तरह बिगड़ा समीकरण
इंद्री में गांव मुखाला में पंच पद के लिए वार्ड नं. 5 से केवल एक ही प्रत्याशी जोनी ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। इंद्री ब्लॉक के गांव चंद्राव महिला के लिए आरक्षित है लेकिन यहां चार पुरुषों ने नामांकन दाखिल कराया दिया, अंतिम क्षण में दूसरे वार्ड की एक महिला भी शामिल हो गई। ऐसे में यहां से महिला कविता ही एकमात्र उम्मीदवार मैदान में बची थी और इसकी जीत तय थी। लेकिन अब इस पर भी संशय हो गया है।
असंध में टूटा चौधर का सपना
4 अक्टूबर को करनाल जिले के असंध व इंद्री हलके में चुनाव होना तय हुआ था, लेकिन अब शैक्षणिक योग्यता के अपने फैसले पर सरकार ने कदम पीछे लेने से मना कर दिया। इसी कारण प्रदेश में होने वाले पंचायती चुनाव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। चुनाव में पंच पद के लिए ऐसे बहुत से उम्मीदवार हैं जिन्हें वार्ड वासियों ने पूर्ण सहमति के साथ मैदान में उतारा। असंध ब्लॉक में पंच के 577 पदों के लिए आए 1743 उम्मीदवारों में से 110 उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी दंगल में कोई विरोधी मैदान में नहीं उतरा है। इनमें 57 पुरुष व 53 महिलाएं शामिल हैं। बहरहाल इनका पंच बनना लगभग तय था। ऐसे में इन सभी की चौधर को धक्का लगा है।
राहड़ा गांव में सरपंच के लिए 25 उम्मीदवार
सरपंच पद के लिए भी कई गांव ऐसे थे जहां से कुछ लोग ही चुनावी मैदान में उतरे थे। सरपंच के 56 पदों के लिए होने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा 25 प्रत्याशी राहड़ा गांव से मैदान में थे। वहीं न्यू झिंडा व चकमुरदिका गांव से दो-दो व रत्तक ओर कौल खेड़ा गांव से चार-चार प्रत्याशी ताल ठोक रहे थे। न्यू झिंडा व चकमुरदिका में खड़े दो-दो सरंपच पदों के उम्मीदवारों में से एक-एक को बिठाकर सर्वसम्मति से चुनाव कराने पर लेकर विचार चल रहा था अब इन पर सभी संकट के बादल मंडरा गए हैं।
यह है पहले चरण की चुनावी स्थिति
3799 लोगों ने पहले चरण के लिए पंच पद के लिए नामांकन भरे। इनमें से 2216 पुरुष व 1583 महिलाएं शामिल हैं। इसी तरह सरपंच के लिए आए कुल 1260 आवेदनों में से 724 पुरुष व 536 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। ब्लॉक समिति में 388 आवेदकों में से 240 पुरुष व 148 महिलाएं व जिला परिषद में 182 पुरुष व 146 महिला शामिल हैं।
नामांकन वापस की चर्चाएं भी रही जोरों पर
चुनाव की तिथि आगे बढ़ने और अगली तिथि निर्धारित नहीं होने के कारण मंगलवार को नामांकन जमा करा चुके उम्मीदवारों द्वारा नामांकन वापस लिए जाने की चर्चाएं भी सुर्खियों में रहीं। प्रत्याशी चुनावी खर्चे के कारण अब मैदान से नाम वापस लेना चाहते हैं।
प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है और साथ ही खर्च भी। इसके अलावा चुनाव की आड़ में बिजली निगम डिफाल्टरों से 27 लाख रुपये जमा करा चुका है। पहले चरण में असंध और इंद्री में सरंपच के 141 पदों के लिए कुल 1260 आवेदन आए हैं। पंच के 1294 पदों के लिए 3799 प्रत्याशियों ने आवेदन किया है। वहीं जिला परिषद के लिए करनाल में 328 आवेदन भरे गए हैं। चुनाव को नजदीक मानकर सभी प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके थे।
बाकायदा काफी बजट भी खर्च किया जा चुका था, लेकिन अब ऐन वक्त पर किये कराये पर पानी फिर गया है। ऐसे में इन प्रत्याशियों के हाथ न केवल निराशा लगी है बल्कि चुनाव पर संशय हो गया। अब ऊंट किस करवट पर बैठेगा यह तो समय ही तय करेगा। फिलहाल प्रत्याशियों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वह क्या करें और कहां जाएं। वहीं दूसरी और ऐसे प्रत्याशी जो चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित कर चुके थे उनकी दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। अब चुनाव प्रक्रिया दोबारा से होती है तो मैदान में उन्हें टक्कर देने वाला कोई दूसरा भी आ सकता है। ऐसे में हर प्रत्याशी के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई है। ऐसे उम्मीदवार जो मैदान में किन्हीं कारणों से नहीं उतर पाए थे उन्हें भी अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
नामांकन पत्रों की भी नहीं हो पाई छंटनी
पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 सितंबर को इन पत्रों की छंटनी होनी थी, लेकिन कोर्ट के आर्डर के कारण इसे 22 सितंबर कर दिया गया था। अब 22 को भी इन नामांकन पत्रों की छंटनी नहीं हो पाई। फिलहाल यह मामला भी अटक गया है।
दूसरे चरण की नामांकन प्रक्रिया के तहत नहीं आया कोई आवेदन
दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार को शुरू होनी थी, लेकिन दूसरे दिन करनाल व निसिंग में एक भी आवेदन नहीं आया। एसडीएम राजीव मलिक ने बताया कि उनके पास करनाल से एक भी नामांकन नहीं आया। ऑर्डर के अनुसार यदि कोई नामांकन आज तक आया भी है तो उसे सील कर रखने के आदेश हैं। दूसरे चरण की प्रक्रिया के पहले दिन केवल नामांकन पत्र लेने वाले जरूर आए थे। वहीं निसिंग में सहायक रिटर्निंग अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि कर्मचारी व अधिकारी नोमिनेशन के लिए कार्यालय में बैठे जरूर थे, लेकिन कोई भी नामांकन पत्र पहले दिन नहीं आया, बस फार्म लेने वाले आए थे।
बाप-बेटा, सगे भाई सहित पति और पत्नी भी मैदान में
सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के साइड इफेक्ट से बचने के लिए एक ही परिवार से तीन-तीन लोगों ने आवेदन किया है। इंद्री के गांव कलरी जागीर में बाप समय सिंह व बेटा अरुण कुमार सरपंच पद के लिए दावेदारी ठोक चुके हैं तो दो भाई सुरेंद्र व राकेश ने भी नामांकन पत्र दाखिल किए। इसी प्रकार गांव मुरादगढ़ में पिता-पुत्र व पति-पत्नी ने नामांकन पत्र भरे हैं। गांव मुखाला में पिता-पुत्र आमने-सामने हैं। पिता शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते लेकिन पुत्र पवन शैक्षणिक योग्यता पूरी करता है। अब स्टे हटने के बाद ही तय हो पायेगा कि इनमें से चुनाव लड़ेगा कौन?
इंद्री में कुछ इस तरह बिगड़ा समीकरण
इंद्री में गांव मुखाला में पंच पद के लिए वार्ड नं. 5 से केवल एक ही प्रत्याशी जोनी ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। इंद्री ब्लॉक के गांव चंद्राव महिला के लिए आरक्षित है लेकिन यहां चार पुरुषों ने नामांकन दाखिल कराया दिया, अंतिम क्षण में दूसरे वार्ड की एक महिला भी शामिल हो गई। ऐसे में यहां से महिला कविता ही एकमात्र उम्मीदवार मैदान में बची थी और इसकी जीत तय थी। लेकिन अब इस पर भी संशय हो गया है।
असंध में टूटा चौधर का सपना
4 अक्टूबर को करनाल जिले के असंध व इंद्री हलके में चुनाव होना तय हुआ था, लेकिन अब शैक्षणिक योग्यता के अपने फैसले पर सरकार ने कदम पीछे लेने से मना कर दिया। इसी कारण प्रदेश में होने वाले पंचायती चुनाव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। चुनाव में पंच पद के लिए ऐसे बहुत से उम्मीदवार हैं जिन्हें वार्ड वासियों ने पूर्ण सहमति के साथ मैदान में उतारा। असंध ब्लॉक में पंच के 577 पदों के लिए आए 1743 उम्मीदवारों में से 110 उम्मीदवारों के खिलाफ चुनावी दंगल में कोई विरोधी मैदान में नहीं उतरा है। इनमें 57 पुरुष व 53 महिलाएं शामिल हैं। बहरहाल इनका पंच बनना लगभग तय था। ऐसे में इन सभी की चौधर को धक्का लगा है।
राहड़ा गांव में सरपंच के लिए 25 उम्मीदवार
सरपंच पद के लिए भी कई गांव ऐसे थे जहां से कुछ लोग ही चुनावी मैदान में उतरे थे। सरपंच के 56 पदों के लिए होने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा 25 प्रत्याशी राहड़ा गांव से मैदान में थे। वहीं न्यू झिंडा व चकमुरदिका गांव से दो-दो व रत्तक ओर कौल खेड़ा गांव से चार-चार प्रत्याशी ताल ठोक रहे थे। न्यू झिंडा व चकमुरदिका में खड़े दो-दो सरंपच पदों के उम्मीदवारों में से एक-एक को बिठाकर सर्वसम्मति से चुनाव कराने पर लेकर विचार चल रहा था अब इन पर सभी संकट के बादल मंडरा गए हैं।
यह है पहले चरण की चुनावी स्थिति
3799 लोगों ने पहले चरण के लिए पंच पद के लिए नामांकन भरे। इनमें से 2216 पुरुष व 1583 महिलाएं शामिल हैं। इसी तरह सरपंच के लिए आए कुल 1260 आवेदनों में से 724 पुरुष व 536 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। ब्लॉक समिति में 388 आवेदकों में से 240 पुरुष व 148 महिलाएं व जिला परिषद में 182 पुरुष व 146 महिला शामिल हैं।
नामांकन वापस की चर्चाएं भी रही जोरों पर
चुनाव की तिथि आगे बढ़ने और अगली तिथि निर्धारित नहीं होने के कारण मंगलवार को नामांकन जमा करा चुके उम्मीदवारों द्वारा नामांकन वापस लिए जाने की चर्चाएं भी सुर्खियों में रहीं। प्रत्याशी चुनावी खर्चे के कारण अब मैदान से नाम वापस लेना चाहते हैं।