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Karnal News: कल्पना चावला में इलाज के दौरान युवती की मौत, परिजनों का हंगामा
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती एक युवती की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस पर परिजनों ने आपातकालीन कक्ष के बाहर जमकर हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने मरीज को देखा तक नहीं और मेडिकल कॉलेज के इंटर्न एवं स्टाफ नर्स के भरोसे छोड़ दिया। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही मरीज की मौत हो गई। गहमागहमी के बीच परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया और उसे एंबुलेंस से उतारकर ऑटो में अपने साथ ले गए।
रावर गांव निवासी मृतक युवती के भाई रामरतन ने बताया कि बहन रेखा-20 की तबियत खराब होने के बाद वीरवार की सुबह 9:30 बजे उसे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां डाक्टरों ने उसे इमरजेंसी में वेंटिलेटर पर रखा। इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी बहन को देखा तक नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के इंटर्न और स्टाफ नर्सों के हवाले छोड़ दिया। कॉलेज के इंटर्न और नर्स ही उसे ग्लूकोज व इंजेक्शन देने का कार्य कर रही थीं। आरोप है कि डाक्टर की लापरवाही से उसकी बहन की जान चली गई। दूसरी ओर डॉक्टरों का कहना है कि युवती का पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी था, जिससे उसकी मौत का पता चल सके, लेकिन परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव लेकर चले गए।
मौत से करीब 10 मिनट पहले नर्स ने लगाया था इंजेक्शन
पिता धन्ना राम एवं माता शीला देवी ने आरोप लगाया कि हालत गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने बेटी को वेंटिलेटर पर रखा था। वह शुक्रवार की सुबह हिल ढुल रही थी और थोड़ी बात भी कर रही थी, लेकिन मौत से करीब 10 मिनट पहले एक स्टाफ नर्स ने उसे एक इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उन पर दबाव बनाया कि वे एक पेपर पर साइन कर दें, जिसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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- गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस से निकाला शव
युवती की मौत के बाद डॉक्टरों ने अन्य स्टाफ की मदद से शव को मोर्चरी तक लेकर जाने के लिए एंबुलेंस में उसे रखवाया, लेकिन गुस्साए परिजन एंबुलेंस से शव को उठाकर ऑटो में लेकर चले गए। फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई है।
रावर गांव निवासी मृतक युवती के भाई रामरतन ने बताया कि बहन रेखा-20 की तबियत खराब होने के बाद वीरवार की सुबह 9:30 बजे उसे कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां डाक्टरों ने उसे इमरजेंसी में वेंटिलेटर पर रखा। इसके बाद डॉक्टरों ने उसकी बहन को देखा तक नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के इंटर्न और स्टाफ नर्सों के हवाले छोड़ दिया। कॉलेज के इंटर्न और नर्स ही उसे ग्लूकोज व इंजेक्शन देने का कार्य कर रही थीं। आरोप है कि डाक्टर की लापरवाही से उसकी बहन की जान चली गई। दूसरी ओर डॉक्टरों का कहना है कि युवती का पोस्टमार्टम कराया जाना जरूरी था, जिससे उसकी मौत का पता चल सके, लेकिन परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव लेकर चले गए।
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मौत से करीब 10 मिनट पहले नर्स ने लगाया था इंजेक्शन
पिता धन्ना राम एवं माता शीला देवी ने आरोप लगाया कि हालत गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने बेटी को वेंटिलेटर पर रखा था। वह शुक्रवार की सुबह हिल ढुल रही थी और थोड़ी बात भी कर रही थी, लेकिन मौत से करीब 10 मिनट पहले एक स्टाफ नर्स ने उसे एक इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने उन पर दबाव बनाया कि वे एक पेपर पर साइन कर दें, जिसके बाद उसका पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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- गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस से निकाला शव
युवती की मौत के बाद डॉक्टरों ने अन्य स्टाफ की मदद से शव को मोर्चरी तक लेकर जाने के लिए एंबुलेंस में उसे रखवाया, लेकिन गुस्साए परिजन एंबुलेंस से शव को उठाकर ऑटो में लेकर चले गए। फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई है।