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Karnal News: जीटी रोड के किनारे खतरनाक, 200 जगहों पर खुले पड़े हैं नाले
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मेरठ चौक के समीप टूटी नाले की स्लैब। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़क जीटी रोड के दोनों ओर 200 जगहों पर आपकी जान को खतरा है। आईटीआई चौक से लेकर अनाज मंडी तक की स्थिति अधिक खराब है। पानी की निकासी के लिए दोनों ओर बनाए गए नालों पर रखे स्लैब करीब 200 स्थानों पर टूट चुके हैं और नाला खुला हुआ हुआ है। 50 से अधिक स्लैब खस्ताहाल हैं और कभी भी धंस सकते हैं। दोपहिया और कार सवारों की चूक जानलेवा साबित हो सकती है। कोहरे में हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
शहर की मुख्य धुरी कही जाने वाली जीटी रोड पर रोज़ाना हजारों वाहन गुजरते हैं। रात के समय, धुंध में सड़क किनारे खुले नाले की पहचान मुश्किल हो जाती है। जरा सी चूक और आप नाले में गिर सकते हैं। कुछ जगह ये नाले जीटी रोड से सटे हुए हैं। ऐसे में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने जीटी रोड का जायजा लिया। दोनों ओर करीब 200 जगहों पर नाले खुले मिले।
शनिवार की रात को नीलोखेड़ी में खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी। घटना के बाद भी शहर में खुले नालों के प्रति आशंका और बढ़ गई है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत सभी टूटे स्लैब बदले जाएं। अंडरपास और फ्लाईओवर के नीचे खुले नालों को प्राथमिकता पर कवर किया जाए।
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सभी अंडरपास के पास खुले नाले
जीटी रोड पर बने फ्लाईओवर के नीचे बने तकरीबन सभी अंडरपास के पास दोनों ओर नाले खुले पड़ हैं। रोशनी की कमी और तेज रफ्तार यातायात के बीच टूटे स्लैब दिखाई ही नहीं देते। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कई बार लोग संतुलन बिगड़ने पर नालों में गिरते-गिरते बचे हैं।
कई जगह बेतरतीब रखे हैं स्लैब
नालों पर अस्थायी तौर पर कहीं-कहीं नए स्लैब रखे तो गए हैं लेकिन ये बेतरतीब हैं। नाले पूरी तरह से ढंके हुए नहीं हैं। बरसात के दिनों में ज्यादा परेशानी होती है। नालों का पानी सड़क पर फैल जाता है और राहगीरों काे सड़क के साथ लगते और खुले नालों का पता नहीं चलता।
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खुले नालों को बंद करने का काम शुरू कराया जाएगा। जहां हादसे ज्यादा होने का डर है वहां पहले स्लैब रखे जाएंगे। -भानुप्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई
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करनाल। शहर की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़क जीटी रोड के दोनों ओर 200 जगहों पर आपकी जान को खतरा है। आईटीआई चौक से लेकर अनाज मंडी तक की स्थिति अधिक खराब है। पानी की निकासी के लिए दोनों ओर बनाए गए नालों पर रखे स्लैब करीब 200 स्थानों पर टूट चुके हैं और नाला खुला हुआ हुआ है। 50 से अधिक स्लैब खस्ताहाल हैं और कभी भी धंस सकते हैं। दोपहिया और कार सवारों की चूक जानलेवा साबित हो सकती है। कोहरे में हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
शहर की मुख्य धुरी कही जाने वाली जीटी रोड पर रोज़ाना हजारों वाहन गुजरते हैं। रात के समय, धुंध में सड़क किनारे खुले नाले की पहचान मुश्किल हो जाती है। जरा सी चूक और आप नाले में गिर सकते हैं। कुछ जगह ये नाले जीटी रोड से सटे हुए हैं। ऐसे में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। सोमवार को अमर उजाला की टीम ने जीटी रोड का जायजा लिया। दोनों ओर करीब 200 जगहों पर नाले खुले मिले।
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शनिवार की रात को नीलोखेड़ी में खुले नाले में गिरने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी। घटना के बाद भी शहर में खुले नालों के प्रति आशंका और बढ़ गई है। शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत सभी टूटे स्लैब बदले जाएं। अंडरपास और फ्लाईओवर के नीचे खुले नालों को प्राथमिकता पर कवर किया जाए।
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सभी अंडरपास के पास खुले नाले
जीटी रोड पर बने फ्लाईओवर के नीचे बने तकरीबन सभी अंडरपास के पास दोनों ओर नाले खुले पड़ हैं। रोशनी की कमी और तेज रफ्तार यातायात के बीच टूटे स्लैब दिखाई ही नहीं देते। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कई बार लोग संतुलन बिगड़ने पर नालों में गिरते-गिरते बचे हैं।
कई जगह बेतरतीब रखे हैं स्लैब
नालों पर अस्थायी तौर पर कहीं-कहीं नए स्लैब रखे तो गए हैं लेकिन ये बेतरतीब हैं। नाले पूरी तरह से ढंके हुए नहीं हैं। बरसात के दिनों में ज्यादा परेशानी होती है। नालों का पानी सड़क पर फैल जाता है और राहगीरों काे सड़क के साथ लगते और खुले नालों का पता नहीं चलता।
खुले नालों को बंद करने का काम शुरू कराया जाएगा। जहां हादसे ज्यादा होने का डर है वहां पहले स्लैब रखे जाएंगे। -भानुप्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई