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culture
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करनाल। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा फूसगढ़ स्थित एमडीडी बाल भवन में आयोजित दस दिवसीय नृत्य, संगीत और थियेटर कार्यशाला का रविवार को समापन हो गया। इस अवसर पर बच्चों ने फाइनल रिहर्सल के जरिए दस दिन में तैयार की गई नाटिका ‘आइना’ का मंचन किया। इस नाटिका के माध्यम से रंगकर्मियों ने समाज के ठेकेदारों को समाज में फैली कुरीतियों विशेषकर बाल शोषण और बाल मजदूरी जैसे मुद्दों के दुष्परिणामों और उनसे निपटने के लिए ‘आइना’ दिखाने का काम किया।
नाटिका के माध्यम से उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब तक आप मूक दर्शक बने रहेंगे और गंभीर विषयों पर आंखें मूंद लेंगे तो समाज से इन कुरीतियों को दूर नहीं किया जा सकता। कार्यशाला में युवा रंगकर्मियों ने अपने अनुभव को साझा किया। कार्यशाला के निदेशक कृष्ण कुमार मलिक ने कहा कि वो पिछले पैंतीस बरस से इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं, लेकिन जिस गंभीरता और संवेदनशीलता से बच्चियों ने इस कार्यशाला में थियेटर की बारीकियों को समझा और उन पर अमल किया वो निसंदेह सराहनीय है। कहा कि ऐसी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। आज इस तरह की विधाओं को बच्चों के साथ साझा करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि थियेटर एक ऐसी विधा है जो हमारे अंतर्मन की आवाज़ को बुलंद करने में सहायक होती है। यही नहीं ये विधा बच्चों को जहां सशक्त बनाती है, वहीं समाज में बुरे और अच्छे की पहचान भी करवाती है। संस्कृति कार्यशाला का आयोजन विभाग के वाईसीओ जोगिंदर भोला और बालभवन के प्रधान सुरेंद्र सिंह मान की देखरेख में किया गया। ब्यूरो
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नाटिका के माध्यम से उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब तक आप मूक दर्शक बने रहेंगे और गंभीर विषयों पर आंखें मूंद लेंगे तो समाज से इन कुरीतियों को दूर नहीं किया जा सकता। कार्यशाला में युवा रंगकर्मियों ने अपने अनुभव को साझा किया। कार्यशाला के निदेशक कृष्ण कुमार मलिक ने कहा कि वो पिछले पैंतीस बरस से इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं, लेकिन जिस गंभीरता और संवेदनशीलता से बच्चियों ने इस कार्यशाला में थियेटर की बारीकियों को समझा और उन पर अमल किया वो निसंदेह सराहनीय है। कहा कि ऐसी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। आज इस तरह की विधाओं को बच्चों के साथ साझा करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि थियेटर एक ऐसी विधा है जो हमारे अंतर्मन की आवाज़ को बुलंद करने में सहायक होती है। यही नहीं ये विधा बच्चों को जहां सशक्त बनाती है, वहीं समाज में बुरे और अच्छे की पहचान भी करवाती है। संस्कृति कार्यशाला का आयोजन विभाग के वाईसीओ जोगिंदर भोला और बालभवन के प्रधान सुरेंद्र सिंह मान की देखरेख में किया गया। ब्यूरो
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