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किसानों का प्रदर्शन; तोड़े बैरिकेड, पुलिस से झड़प

Wed, 07 Sep 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Wed, 07 Sep 2016 12:14 AM IST
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crop insurence policy, Farmers show; Broken barricades, police clash, karnal
तोड़े बैरिकेड, पुलिस से झड़प - फोटो : अमर उजाला

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के विरोध में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने जमकर बवाल काटा। सीएम कैंप आफिस का घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने रास्ते में ही रोकने की कोशिश की तो पुलिस और किसानों में झड़प हो गई और किसानों ने बेरिकेडस को तोड़ दिया। हालांकि, इससे पहले पुलिस ने कैंप आफिस के पास ही दूसरे बेरिकेडस लगाकर किसानों ने रोका। इस दौरान किसानों और पुलिस कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद आखिरकार ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने सीएम से मिलने का समय आठ सितंबर का दिया तो किसान शांत हुए।

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फसल बीमा योजना के खिलाफ किसानों के खातों से बैंकों द्वारा पैसे काटे जाने के विरोध में सीएम सिटी में सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में काफी संख्या में किसान ने शहर की जाट धर्मशाला में इकट्ठे होकर योजनाबद्ध तरीके से सीएम कैंप हाउस की तरफ बढ़े। प्रशासन की ओर से रास्ते में भारी पुलिस बल तैनात होने के कारण किसानों का गुस्सा और बढ़ गया। किसानों ने विरोध स्वरूप बैरिकेट को तोड़ दिया और जबरदस्ती सीएम कैंप हाउस जाने का प्रयास किया। इसी दौरान, पुलिस ने सीएम कैंप हाउस को सुरक्षा की दृष्टि से घेराबंदी कर दी। सीएम कैंप हाउस से कुछ दूरी पर पुलिस द्वारा बेरिकेडस लगाने के कारण किसानों को आगे जाने से रोक दिया गया। बाद में ओएसडी अमरेंद्र सिंह को बेरिकेडस के पास आकर ही किसानों से मिलना पड़ा।
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पांच सदस्यीय दल मिलेगा सीएम से
ओएसडी के बातचीत करने के बाद भी किसानों और सरकार के बीच बात सिरे नहीं चढ़ी। ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने किसानों से शाम तक सीएम से बात करके समय देने की बात कही। किसानों ने शाम तक वहीं डेरा डालने का निश्चय कर लिया। थोड़ी देर बाद भाजपा नेता जगदेव पाढ़ा ने किसानों को 8 सितंबर को तीन बजे पांच सदस्यीय किसान प्रतिनिधिमंडल को सीएम से मिलने का समय दिया। इसके बाद ही किसान शांत हुए। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष के नेतृत्व में किसानों ने जगदेव पाढ़ा को ज्ञापन सौंपकर सभी चले गए।
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जिन फसलों का बीमा नहीं होता, उनके भी काटे पैसे
किसानों का आरोप है कि जिन किसानों के खेतों में गन्ना, पॉपुलर, चारा आदि फसलें है, जिनका बीमा नहीं हो सकता, बैंकों ने कुल जमीन का बीमा करके उनके खातों से पैसे काटकर किसानों को बेवजह परेशान किया है। जिन किसानों ने ठेके पर जमीन ले रखी है और लोन लिया हुआ है। ऐसी जमीनों के ठेकेदार व मालिक दोनों के नाम से राशि काट ली गई। यानि एक ही फसल का दो बार बीमा कर दिया गया।

बीमा पॉलिसी में है ये खामियां
किसानों का आरोप है कि फसल बीमा योजना में कई प्रकार की खामियां हैं। जिन्हें सरकार समय-समय पर ठीक कर सकती है। किसान नेता गुरनाम सिह चढूनी ने कहा कि इस योजना से फसल के खराबे के बाद बीमा क्लेम की राशि भी किसानों को नहीं मिलेगी। यह राशि सीधी बैंक में जाएगी, जिससे किसानों को आपदा के समय में कोई भी सहायता नही मिलेगी। फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा पॅालिसी भी अभी तक उपलब्ध नही कराई गई।


किसानों की मांग, सरकार खुद करवाए बीमा
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि अगर सरकार खरीफ और रबी की सभी बीमित फसलों का पूरा प्रीमियम खुद देती है तो करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च आता है। जबकि पिछले वर्ष सरकार को खराब फसलों का 2200 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में देने पडे़ थे। किसानों की मांग है कि फसल बीमा का पैसा फसल खर्च में जोड़कर फसल के भाव लागत से पचास प्रतिशत ज्यादा दिया जाए तो किसानों को कोई एतराज नहीं होगा।

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