{"_id":"64b84abf218b6ab14e006255","slug":"crisis-on-agricultural-machinery-industry-due-to-flood-on-crops-karnal-news-c-18-knl1031-176736-2023-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: फसलों पर बाढ़ की मार से कृषि यंत्र उद्योग पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: फसलों पर बाढ़ की मार से कृषि यंत्र उद्योग पर संकट
विज्ञापन
फसलों पर बाढ़ की मार से कृषि यंत्र उद्योग पर संकट
- चार राज्यों में बाढ़ से खराब हुई फसलें, कृषि उपकरणों की मांग में आएगी गिरावट, 350 करोड़ रुपये तक कारोबार घटने का अंदेशा, दो माह बाद दिखेगा असर
गगन तलवार
करनाल। बाढ़ के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है, वहीं इसका असर जिले की कृषि यंत्र इंडस्ट्री पर दो माह बाद दिखाई देगा। क्योंकि इस बार फसल कटाई के समय उपकरणों की मांग घटेगी। ऐसे में इस इंडस्ट्री को इस साल के अंत में करीब 350 करोड़ रुपये तक का कारोबार घटने का अंदेशा है। इसके अलावा रॉ मैटेरियल और पीएनजी महंगा होने से यहां से विदेशों में निर्यात होने वाले माल की मांग पर पहले से संकट है। ऐसे में कृषि उपकरण इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ के कारण हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के काफी हिस्से की फसलें खराब हुई हैं। कुछ समय पहले राजस्थान में बाढ़ के कारण फसलें खराब हुई थी। ऐसे में अब अक्तूबर माह के अंत तक जब फसलों की कटाई का समय होगा, तब काफी रकबे की खराबे के कारण कटाई व अन्य कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की भी स्थानीय मांग इस बार कम रहेगी। करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन को चार राज्यों में बाढ़ के असर से करीब 20 प्रतिशत तक उपकरणों की मांग में कमी आने का अनुमान है।
करनाल जिले में कृषि यंत्र निर्माताओं की करीब 180 इकाइयां हैं, जिनका सालाना टर्नओवर करीब 1600 करोड़ रुपये है। ये उद्योग कच्चा माल विशेष तौर पर पंजाब की गोविंदगढ़ मंडी और छत्तीसगढ़ की रायपुर मंडी से खरीदते हैं और उपकरण तैयार करने के बाद हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भेजते हैं। 20 प्रतिशत की स्थानीय मांग में गिरावट से 350 करोड़ रुपये का कारोबार घट सकता है। ब्यूरो
विज्ञापन
160 देशों में 400 करोड़ का होता है निर्यात
करनाल इंडस्ट्री के कृषि यंत्र दुनिया के करीब 160 देशों में निर्यात होते हैं। इसमें खास तौर पर अफ्रीकी देश भारतीय कृषि यंत्रों के बड़े खरीदार हैं। इसमें रोटावेटर, डिगर, हैरों, कल्टीवेटर, ट्राली आदि कई तरह के उपकरण शामिल हैं। करनाल इंडस्ट्री का टर्नओवर करीब 1600 करोड़ रुपये हैं, जिसमें 400 करोड़ रुपये के उपकरण निर्यात किए जाते हैं। अब इसमें विभिन्न देशों की मांग के अनुसार, आधुनिक कृषि यंत्रों को भी शामिल कर लिया गया है।
विदेशों में यहां से सस्ते में तैयार होंगे यंत्र
एसोसिएशन के प्रधान रविंद्र ढल ने बताया कि कच्चा लोहा जून 2022 में जीएसटी मिलाकर करीब 52 रुपये प्रति किलो था, जो अब 65 रुपये प्रति किलो पड़ता है। डेकचून (कॉस्ट आयरन) के दाम 45 रुपये थे जो अब 58 से 60 रुपये प्रति किलो तक हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसके कारण तैयार कृषि यंत्र (फिनिश प्रोडक्ट) भी अपेक्षाकृत महंगा हो गया है, जबकि विदेशों में उद्योगों को चलाने के लिए अधिकृत फ्यूल और रॉ मैटेरियल सस्ता है, इसलिए उनके यंत्र भी सस्ते हैं। इससे हमारे निर्यात पर भी इस साल असर पड़ेगा।
चार राज्यों से कृषि यंत्रों के ऑर्डर घटे
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह का कहना है कि बाढ़ का असर चार राज्यों में है। इसलिए कृषि यंत्रों की स्थानीय मांग में 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। जबकि अन्य राज्यों में स्थिति ठीक है। ऐसे में वहां माल की आपूर्ति सामान्य रहेगी। कई इकाइयों में आर्डर भी आए हैं। उसी अनुसार माल तैयार कर रहे हैं। जबकि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के ऑर्डर इस बार कम आ रहे हैं। ऐसे में सेल भी कम रहने की संभावना है। क्योंकि इन दिनों उपकरणों के ऑर्डर आने शुरू हो जाते थे।
विज्ञापन
गगन तलवार
करनाल। बाढ़ के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है, वहीं इसका असर जिले की कृषि यंत्र इंडस्ट्री पर दो माह बाद दिखाई देगा। क्योंकि इस बार फसल कटाई के समय उपकरणों की मांग घटेगी। ऐसे में इस इंडस्ट्री को इस साल के अंत में करीब 350 करोड़ रुपये तक का कारोबार घटने का अंदेशा है। इसके अलावा रॉ मैटेरियल और पीएनजी महंगा होने से यहां से विदेशों में निर्यात होने वाले माल की मांग पर पहले से संकट है। ऐसे में कृषि उपकरण इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है।
बाढ़ के कारण हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के काफी हिस्से की फसलें खराब हुई हैं। कुछ समय पहले राजस्थान में बाढ़ के कारण फसलें खराब हुई थी। ऐसे में अब अक्तूबर माह के अंत तक जब फसलों की कटाई का समय होगा, तब काफी रकबे की खराबे के कारण कटाई व अन्य कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की भी स्थानीय मांग इस बार कम रहेगी। करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन को चार राज्यों में बाढ़ के असर से करीब 20 प्रतिशत तक उपकरणों की मांग में कमी आने का अनुमान है।
विज्ञापन
करनाल जिले में कृषि यंत्र निर्माताओं की करीब 180 इकाइयां हैं, जिनका सालाना टर्नओवर करीब 1600 करोड़ रुपये है। ये उद्योग कच्चा माल विशेष तौर पर पंजाब की गोविंदगढ़ मंडी और छत्तीसगढ़ की रायपुर मंडी से खरीदते हैं और उपकरण तैयार करने के बाद हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भेजते हैं। 20 प्रतिशत की स्थानीय मांग में गिरावट से 350 करोड़ रुपये का कारोबार घट सकता है। ब्यूरो
विज्ञापन
160 देशों में 400 करोड़ का होता है निर्यात
करनाल इंडस्ट्री के कृषि यंत्र दुनिया के करीब 160 देशों में निर्यात होते हैं। इसमें खास तौर पर अफ्रीकी देश भारतीय कृषि यंत्रों के बड़े खरीदार हैं। इसमें रोटावेटर, डिगर, हैरों, कल्टीवेटर, ट्राली आदि कई तरह के उपकरण शामिल हैं। करनाल इंडस्ट्री का टर्नओवर करीब 1600 करोड़ रुपये हैं, जिसमें 400 करोड़ रुपये के उपकरण निर्यात किए जाते हैं। अब इसमें विभिन्न देशों की मांग के अनुसार, आधुनिक कृषि यंत्रों को भी शामिल कर लिया गया है।
विदेशों में यहां से सस्ते में तैयार होंगे यंत्र
एसोसिएशन के प्रधान रविंद्र ढल ने बताया कि कच्चा लोहा जून 2022 में जीएसटी मिलाकर करीब 52 रुपये प्रति किलो था, जो अब 65 रुपये प्रति किलो पड़ता है। डेकचून (कॉस्ट आयरन) के दाम 45 रुपये थे जो अब 58 से 60 रुपये प्रति किलो तक हैं। इससे उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसके कारण तैयार कृषि यंत्र (फिनिश प्रोडक्ट) भी अपेक्षाकृत महंगा हो गया है, जबकि विदेशों में उद्योगों को चलाने के लिए अधिकृत फ्यूल और रॉ मैटेरियल सस्ता है, इसलिए उनके यंत्र भी सस्ते हैं। इससे हमारे निर्यात पर भी इस साल असर पड़ेगा।
चार राज्यों से कृषि यंत्रों के ऑर्डर घटे
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह का कहना है कि बाढ़ का असर चार राज्यों में है। इसलिए कृषि यंत्रों की स्थानीय मांग में 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। जबकि अन्य राज्यों में स्थिति ठीक है। ऐसे में वहां माल की आपूर्ति सामान्य रहेगी। कई इकाइयों में आर्डर भी आए हैं। उसी अनुसार माल तैयार कर रहे हैं। जबकि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के ऑर्डर इस बार कम आ रहे हैं। ऐसे में सेल भी कम रहने की संभावना है। क्योंकि इन दिनों उपकरणों के ऑर्डर आने शुरू हो जाते थे।