एक साथ उठी घर से छह अर्थियां, बिलख पड़ा पूरा गांव
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करनाल से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव बरास में सुबह उस समय लोग स्तब्ध रह गए जब सूचना आई कि अंबाला के पास गांव के एक ही परिवार के सदस्यों की गाड़ी हादसे का शिकार हो गई है। परिजनों को दिलासा दिया गया कि परिवार के सदस्य ठीक हैं, केवल चोट लगी हैं, लेकिन वे सब्र कब तक रखते? दोपहर को जैसे-जैसे सूचना मिलती गई ग्रामीण और रिश्तेदार घर के बाहर जमा होने लगे। बदहवास महिलाएं पूछती रहीं कि आखिर हुआ क्या है? शाम करीब छह बजे जब घर के बाहर एक कैंटर से एक-एक कर दो भाइयों और उनके चार भतीजों की लाशें उतारी गईं तो महिलाएं दहाडे़ं मारकर विलाप करने लगी। परिवार के लोग ही नहीं पूरा गांव भी रो पड़ा। शाम को ही सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में छहों मृतकों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
गौरतलब है कि गांव बरास से प्रीतम सिंह राणा का परिवार अंबाला के गांव मोली में भात भरने के लिए गया था। मंगलवार को परिवार के सदस्य बड़ी खुशी के साथ विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। बुधवार को अंबाला के पास ये हादसा हो गया। बुधवार शाम को छहों के शव जैसे ही गांव में पहुंचे तो गांव में कोहराम मच गया। एक एक करके जैसे ही शव उतारे गए तो महिलाएं और परिजन उन पर विलाप करते हुए टूट पड़े। सैकड़ों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने महिलाओं और परिजनों को संभालाष अंतिम दर्शन के बाद सभी की अर्थियां एक साथ उठाई गई तो पूरा गांव रो पड़ा। वहीं, जब एक साथ छह चिताओं की लपटें उठी तो हर किसी की सिसकियां निकल रही थी। गमगीन माहौल में छहों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
नहीं खुली दुकानें व नहीं जले चूल्हे
इतने बड़े हादसे के कारण पूरा गांव व क्षेत्र स्तब्ध रहा। बुधवार को गांव में न तो कोई दुकान खुली न ही किसी के घर चूल्हा जला। हादसे की सूचना के बाद से ही हर कोई हादसे के बारे में जानकारी लेता रहा। दोपहर बाद जैसे ही ग्रामीणों को पता चला कि एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई है वे स्तब्ध रह गए।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, बिलखते रहे बच्चे
इस हादसे से न केवल गांव बरास व बल्कि पूरे जिले में मातम है। बच्चे अपने पिता के शव को देख कर बार-बार लिपटते रहे। सभी छह मृतकों के छोटे-छोटे बच्चे हैं और पढ़ रहे हैं। बच्चे बार बार-अपनी मां से पूछ रहे हैं कि क्या अब पापा कभी नहीं आएंगे। यह कहते बच्चे रो रो कर बेहोश हो रहे हैं। वहीं, मृतकों की पत्नी भी बेसुध हो रही हैं और उनकी आंखें रो रोकर पत्थर हो गई हैं। हादसे के बाद से वे स्थिर हो गई हैं।
बारातियों ने मनाया शोक, नहीं बजाया डीजे
निसिंग। बुधवार को गांव बरास में सुरेश प्रजापत की बेटी की शादी थी। पिलनी से संजू प्रजापत अपनी बारात लेकर गांव बरास में हंसी खुशी डीजे के साथ पहुंचा, लेकिन जैसे ही बारात को पता चला कि गांव में इतना बड़ा हादसा हो गया कि सभी ने शोक स्वरूप डीजे नहीं बजाया और सादगी के साथ रस्में पूरी की। दिनभर बाराती चौपाल में ही बैठे रहे और फेरों के बाद सादगी के साथ ही रवाना हो गए। सभी ने हादसे पर शोक जताया।
शोक जताने वालों का उमड़ा हुजूम
हादसे की सूचना मिलते ही धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों समेत ग्रामीण शोक जताने के लिए मृतकों के घर के बाहर पहुंच गए। सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे और सभी ने नम आंखों से मृतकों को विदाई दी। नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी, भाजपा मंडल अध्यक्ष महिपाल राणा गुनियाणा, रविंद्र गोंदर, जिला परिषद् सदस्य भीम सिंह जलाला, इनेलो युवा हलका अध्यक्ष नरेश राणा, थाना प्रभारी राजकुमार रंगा, ग्राम सरपंच बरास खुर्द महेंद्र सिंह, सरपंच बरास कर्मचंद, पूर्व सरपंच राजपाल शर्मा सहित सैकड़ों लोग उनकी अंतिम विदाई में शामिल रहे।
मासूम सवाल, मेरे पापा कौन से हैं
प्रीतम सिंह के परिजनों ने बताया कि मृतक हुकम के दो लड़के और दो लड़की हैं। सोनू कीएक लड़की, लीला राम के दो बच्चे, मन्नु तीन लड़के और दो लड़की हैं। वहीं कामा का एक लड़का व एक लड़की और अंग्रेज का एक लड़का है। परिजनों के अनुसार बच्चे भी शादी में जाने की जिद कर रहे थे, लेकिन एक मार्च से सालाना परीक्षा के चलते उनको शादी में नहीं ले जाया गया। दोपहर बाद जब बच्चे स्कूल की परीक्षा के बाद घर पहुंचे तो घर के बाहर लगी भीड़ को देखकर वे सकपका गए। अंदर रो रही महिलाओं को देख बच्चे घबरा गए और बार-बार पूछते रहे कि आखिर क्या हो गया। जैसे ही शव लेकर कैंटर पहुंचा तो पॉलिथीनों में लिपटे शव को देखकर बच्चे बिलख उठे। बच्चों को ये तक नहीं पता कि कौन सा शव उनके चाचा-ताया का है और कौन सा पापा का। बच्चे बार-बार कह रहे थे कि एक बार मेरे पापा का चेहरा दिखा दीजिए। वहीं, आसपास खड़े लोग बच्चों को संभाल रहे थे और ढाढ़स बंधा रहे थे। महिलाएं भी बार बार एक ही बात कह रहीं थीं कि आखिर इस परिवार ने किसी का क्या बिगाड़ा था।