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 11 स्थाई कर्मचारी ही संभालेंगे आग बुझाने का जिम्मा

Wed, 29 Mar 2017 12:15 AM IST
fire, 11 man, no mare, karnal
fire, 11 man, no mare, karnal Updated Wed, 29 Mar 2017 12:15 AM IST
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एक अप्रैल से फायर ब्रिगेड विभाग सिर्फ 11 कर्मचारियों के हवाले रहेगा, यही कर्मचारी मिलकर पूरे जिले में आग की घटनाओं को काबू करेंगे। क्योंकि सरकार की नई पॉलिसी के आधार पर 31 मार्च से जिले में ठेके पर तैनात 166 अस्थाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो रही हैं। सरकार की इस पॉलिसी के विरोध में एक तरफ जहां फायर बिग्रेड के अस्थाई कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर नई पॉलिसी पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, वहीं गेहूं का सीजन आने के कारण प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन कोशिश में लगा है कि, जब तक ठेके पर नए कर्मचारियों की भर्ती न हो जाए, तब तक इन कर्मचारियों से ही सेवाएं ली जाएं। आफत के इस दौर में ठेके पर कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों को एक साथ सेवा मुक्त कर देना एक तरफ जहां विभाग के पॉलिसी पर सवाल खड़ा कर रह है। वहीं, दूसरी तरफ आम लोगों के साथ-साथ किसानों व जिला प्रशासन की सांसें अटकी हुई हैं। विदित हो कि गर्मी का मौसम शुरू होने पर तापमान बढ़ जाता है। इससे खेत-खलिहानों से लेकर घरों तक में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं। ठंड के समय जहां हर माह आग लगने की दो से तीन घटनाएं ही होती हैं, वहीं गर्मी के सीजन में प्रतिदिन तीन से चार घटनाएं होती हैं। वहीं, गेहूं के सीजन में इनकी संख्या अचानक दर्जन भर से ज्यादा हो जाती हैं। इसमें से भी ज्यादातर घटनाएं खेत-खलिहानों में होती हैं। क्योंकि इस समय खेतों में फसल पककर तैयार खड़ी होती है, जो हल्की से चिंगारी मिलती ही भयानक स्वरूप में बदल जाती है। आग के कारण प्रतिवर्ष सैकड़ों एकड़ फसल खेतों में ही जलकर राख हो जाती है। अब जब इन आग को बुझाने वाला ही कोई नहीं होगा तो हादसों का अंदेशा लगाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस समस्या को लेकर न तो प्रशासन के पास कोई एक्शन प्लान है और न ही ठेके पर अभी कार्यरत कर्मचारी अपने अगली रणनीति का खुलासा कर रहे हैं। इस मामले को लेकर आज अग्निशमन सेवा एवं नगर पालिका कर्मचारी संघ चंडीगढ़ में बैठक करने जा रहा है, जहां पर सरकार के साथ इस भिड़ंत पर आगे का प्लान तैयार किया जाएगा। 
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 ब्लॉक स्तर पर सिर्फ एक स्थायी कर्मचारी
जिले में इस समय 177 फायर ब्रिगेड कर्मचारी तैनात हैं, जिसमें से 11 स्थाई और 166 कर्मचारी अस्थाई हैं। करनाल में अस्थाई कर्मचारियों की संख्या 77 और स्थायी कर्मचारियों की संख्या 7 हैै। इसके अलावा तरावड़ी, नीलोखेड़ी, इंद्री में एक-एक स्थायी कर्मचारी और असंध व घरौंडा को मिलाकर एक स्थायी कर्मचारी की नियुक्ति की गई हैं। वहीं अगर अस्थाई कर्मचारियों की बात करें तो तरावड़ी में 28, असंध में 22, घरौंड़ा में 13, नीलोखेड़ी में 13 और इंद्री में 13 कर्मचारी हैं, जिनकी सेवाएं एक अप्रैल को समाप्त हो जाएंगी। फायर बिग्रेड वाहनों की संख्या पूरे जिले में 15 है, जिसमें से 6 वाहन करनाल में, 3 तरावड़ी, दो-दो घरौंड़ा व असंध और नीलोखेड़ी एवं इंद्री में एक-एक वाहन मौजूद है।
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कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

इस मामले को लेकर फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने नगर निगम में प्रदर्शन किया। फायर बिग्रेड एसोसिएशन के जिला प्रधान विजय शर्मा ने कहा कि अगर कर्मचारियों की अनुपस्थिति में कोई हादसा होता है, तो उसमें होने वाले जानमाल के नुकसान की सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि विभिन्न पालिकाओं और मार्केट कमेटियों के अधीन संचालित दमकल केंद्रों का एकीकरण करने के पश्चात नियम 2016 के तहत चालक व अग्निशमक के पदों को एकीकृत कर फायर आपरेटर की संज्ञा दी गई है, जिस पर भर्ती की जानी है। साथ ही इन पदों पर अब 12वीं पास के साथ ड्राइविंग व फायर सेफ्टी में डिप्लोमा अनिवार्य कर दिया गया है, इस अनिवार्यता पर पहले से तैनात करीब 70 फीसदी फायर कर्मचारी खरे नहीं उतरते, इसलिए वे दोबारा से होने वाली भर्ती में भाग नहीं ले पाएंगे। फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने सोमवार को नगर निगम में प्रदर्शन कर मांगें रखी कि 2016 में बनाए गए नए रूल के तहत 10-15 सालों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित किया जाए, अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया तो आंदोलन किया जाएगा। 
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 नए नियुक्त होने के बाद जाएं पुराने : करनाल के फायर ऑफिसर एचएस सैनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एक अप्रैल से ठेके पर तैनात पुराने कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो रही हैं, लेकिन हमारी कोशिश है कि उनको तभी कार्य मुक्त किया जाए, जब नए कर्मचारियों की नियुक्ति हो जाए। हालांकि, अगर वे जाना चाहते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते। 

 
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