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करनाल: बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को उम्रकैद और दो भाइयों को 20-20 साल की सजा
Wed, 20 Apr 2022 02:54 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 20 Apr 2022 02:54 AM IST
सार
चार साल पहले सिविल लाइन थाने में पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया था। अदालत ने पीड़िता को 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के भी निर्देश दिए हैं।
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सांकेतिक फोटो
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
हरियाणा के करनाल में बेटी से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए जाने पर पिता का आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, वहीं दो भाइयों को 20-20 साल की सजा हुई है। अदालत ने पीड़िता को 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के भी निर्देश दिए हैं।
सीडब्ल्यूसी के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र सिंह मान ने बताया कि 2018 में उन्हें एक शिकायत मिली थी, जिसमें बताया गया था कि झुग्गी झोपड़ी में एक परिवार रहता है। आरोप था कि मां की मौत के बाद बड़ी बेटी से पिता और दो भाई दुष्कर्म करते हैं। मामले में पीड़िता समेत चारों बहनों की काउंसलिंग की गई।
इसके बाद उनके बयान के आधार पर सिविल लाइन थाने में पोक्सो एक्ट के तहत दुष्कर्म का केस दर्ज कराया गया। साथ ही पीड़िता और उसकी बहनों को एमडीडी बाल भवन करनाल में शिफ्ट कर दिया गया। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी पिता और भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीड़िता और उसकी बहनों की ओर से दिए गए बयान के आधार पर कोर्ट ने पिता और भाइयों को मामले में दोषी पाया।
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‘न्याय तक पहुंच’ प्रोजेक्ट के तहत की गई पैरवी
पूर्व सीडब्ल्यूसी चेयरमैन और एमडीडी ऑफ इंडिया के प्रधान सुरेंद्र सिंह मान ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के सौजन्य से एमडीडी ऑफ इंडिया द्वारा ‘न्याय तक पहुंच’ प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत उक्त मामले में टीम ने जनवरी 2022 में पैरवी शुरू की। इस दौरान पता चला कि मामले की चार्जशीट में धारा-8 लगाई गई है, जबकि बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के अनुसार धारा-6 लगाई जानी थी, ताकि अपराधियों को उचित दंड मिल सके। इसके बाद प्रोजेक्ट टीम ने सरकारी वकील से मिलकर सारी बातों को रखा और धारा-8 को खत्म करके धारा-6 लगवाया गया। साथ ही अदालत में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार पैरवी की गई।
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सीडब्ल्यूसी के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र सिंह मान ने बताया कि 2018 में उन्हें एक शिकायत मिली थी, जिसमें बताया गया था कि झुग्गी झोपड़ी में एक परिवार रहता है। आरोप था कि मां की मौत के बाद बड़ी बेटी से पिता और दो भाई दुष्कर्म करते हैं। मामले में पीड़िता समेत चारों बहनों की काउंसलिंग की गई।
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इसके बाद उनके बयान के आधार पर सिविल लाइन थाने में पोक्सो एक्ट के तहत दुष्कर्म का केस दर्ज कराया गया। साथ ही पीड़िता और उसकी बहनों को एमडीडी बाल भवन करनाल में शिफ्ट कर दिया गया। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपी पिता और भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पीड़िता और उसकी बहनों की ओर से दिए गए बयान के आधार पर कोर्ट ने पिता और भाइयों को मामले में दोषी पाया।
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‘न्याय तक पहुंच’ प्रोजेक्ट के तहत की गई पैरवी
पूर्व सीडब्ल्यूसी चेयरमैन और एमडीडी ऑफ इंडिया के प्रधान सुरेंद्र सिंह मान ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के सौजन्य से एमडीडी ऑफ इंडिया द्वारा ‘न्याय तक पहुंच’ प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत उक्त मामले में टीम ने जनवरी 2022 में पैरवी शुरू की। इस दौरान पता चला कि मामले की चार्जशीट में धारा-8 लगाई गई है, जबकि बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के अनुसार धारा-6 लगाई जानी थी, ताकि अपराधियों को उचित दंड मिल सके। इसके बाद प्रोजेक्ट टीम ने सरकारी वकील से मिलकर सारी बातों को रखा और धारा-8 को खत्म करके धारा-6 लगवाया गया। साथ ही अदालत में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार पैरवी की गई।