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हिरासत में मौत : एफआईआर नंबर 527 में जैबा सिंह की हत्या, 52
Updated Sun, 13 May 2018 12:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
मंगल कॉलोनी डेहा बस्ती निवासी जैबा सिंह की पुलिस हिरासत में मौत होने के मामले में पुलिस की ओर से चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस ने इस मामले में दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पहली 527 नंबर एफआईआर में जैबा सिंह के मारपीट करने के आरोप में सिटी थाना के चार पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ है, जबकि 528 नंबर एफआईआर में जैबा सिंह की मौत के बाद उससे 150 ग्राम गांजा बरामद करने का केस दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस का दावा है कि गांजा के बारे में जैबा सिंह के खिलाफ डीडीआर पहले ही दर्ज की गई थी। लेकिन पुलिस के इस दोनों एफआईआर के चलते मामले में कई झोल आ गए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार जब जैबा सिंह को नशे के साथ पकड़ा था तो उसके खिलाफ उसी समय केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? मामले के अनुसार, पुलिस ने जैबा सिंह को गुरुवार की रात को घर से उठाया था और उसे पीट-पीट कर 150 ग्राम गांजा पत्ती भी बरामद की थी। पुलिस ने जैबा सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं किया। इस मामले में मृतक के बेटे के आरोपों को इस लिए बल मिलता है कि पुलिस मामले को रफा दफा करने की कोशिश कर रही थी, जब बात नहीं बनी और जैबा सिंह की मौत हो गई तो पुलिस के पसीने छूट गए। मृतक के बेटे नरेश ने आरोप लगाया था कि उसके पिता को छोड़ने के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए थे। जब जैबा सिंह की हिरासत में मौत हो गई तो उसके परिजनों ने बवाल मचाना शुरू कर दिया, तो पुलिस ने एफआईआर नंबर 527 उन पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया, जो जैबा सिंह को उठाकर लाए थे। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर 528 मृतक जैबा सिंह के खिलाफ दर्ज कर दी। इसमें पुलिस ने बताया कि जैबा सिंह को 150 ग्राम गांजा पत्ती के साथ पकड़ा दिखाया है। हालांकि इस बारे में पुलिस का कहना है कि जैबा सिंह की डेली डायरी रजिस्टर (डीडीआर) पहले ही काटी गई है।
तोड़फोड़ मामले में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में 150 के खिलाफ केस
जैबा सिंह की मौत के बाद उसके परिजनों व समर्थकों द्वारा सिटी थाना व ट्रैफिक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ करने व पुलिस कर्मचारी की गला दबाकर हत्या करने के प्रयास को लेकर करीब 150 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। एचसी राजेश ने शिकायत में बताया कि गुरुवार को 150 के करीब व्यक्ति हाथ में लाठी-डंडे व तलवार लेकर सिटी थाना में आए और तीन व्यक्तियों ने रस्सी के साथ उसका गला दबाकर उसे मारने का प्रयास किया। इस दौरान दूसरे पुलिस कर्मचारी द्वारा हवाई फायर करने पर वे आरोपी फरार हो गए। इसी प्रकार पीसीआर-3 पर तैनात एक पुलिस कर्मचारी ने भी 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उपद्रवी उस पीसीआर पर तैनात पुलिस कर्मचारियों को भी पीटने के लिए उनके पीछे दौड़े थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दोनों पुलिस कर्मचारी सस्पेंड, होमगार्ड के जवानों पर भी कार्रवाई
जैबा सिंह को घर से उठाने और उसके मारपीट करने के मामले में हुई मौैत के बाद से एसपी ने आरोपी पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें ईएएसआई कुलवंत, एचसी प्रदीप के नाम शामिल हैं, जबकि होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी कार्रवाई की है। उधर, होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी विभाग को लिखा गया है।
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दोनों पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है, होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी कार्रवाई कर दस्त्रत्त्ी गई है। जैबा सिंह से गांजा पत्ती बरामद मामले में पहले ही डीडीआर काटी गई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करने की अलग प्रोसेस है।
-सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी करनाल।
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करनाल।
मंगल कॉलोनी डेहा बस्ती निवासी जैबा सिंह की पुलिस हिरासत में मौत होने के मामले में पुलिस की ओर से चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस ने इस मामले में दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पहली 527 नंबर एफआईआर में जैबा सिंह के मारपीट करने के आरोप में सिटी थाना के चार पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ है, जबकि 528 नंबर एफआईआर में जैबा सिंह की मौत के बाद उससे 150 ग्राम गांजा बरामद करने का केस दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस का दावा है कि गांजा के बारे में जैबा सिंह के खिलाफ डीडीआर पहले ही दर्ज की गई थी। लेकिन पुलिस के इस दोनों एफआईआर के चलते मामले में कई झोल आ गए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार जब जैबा सिंह को नशे के साथ पकड़ा था तो उसके खिलाफ उसी समय केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? मामले के अनुसार, पुलिस ने जैबा सिंह को गुरुवार की रात को घर से उठाया था और उसे पीट-पीट कर 150 ग्राम गांजा पत्ती भी बरामद की थी। पुलिस ने जैबा सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं किया। इस मामले में मृतक के बेटे के आरोपों को इस लिए बल मिलता है कि पुलिस मामले को रफा दफा करने की कोशिश कर रही थी, जब बात नहीं बनी और जैबा सिंह की मौत हो गई तो पुलिस के पसीने छूट गए। मृतक के बेटे नरेश ने आरोप लगाया था कि उसके पिता को छोड़ने के लिए 50 हजार रुपये मांगे गए थे। जब जैबा सिंह की हिरासत में मौत हो गई तो उसके परिजनों ने बवाल मचाना शुरू कर दिया, तो पुलिस ने एफआईआर नंबर 527 उन पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया, जो जैबा सिंह को उठाकर लाए थे। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर 528 मृतक जैबा सिंह के खिलाफ दर्ज कर दी। इसमें पुलिस ने बताया कि जैबा सिंह को 150 ग्राम गांजा पत्ती के साथ पकड़ा दिखाया है। हालांकि इस बारे में पुलिस का कहना है कि जैबा सिंह की डेली डायरी रजिस्टर (डीडीआर) पहले ही काटी गई है।
तोड़फोड़ मामले में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में 150 के खिलाफ केस
जैबा सिंह की मौत के बाद उसके परिजनों व समर्थकों द्वारा सिटी थाना व ट्रैफिक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ करने व पुलिस कर्मचारी की गला दबाकर हत्या करने के प्रयास को लेकर करीब 150 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। एचसी राजेश ने शिकायत में बताया कि गुरुवार को 150 के करीब व्यक्ति हाथ में लाठी-डंडे व तलवार लेकर सिटी थाना में आए और तीन व्यक्तियों ने रस्सी के साथ उसका गला दबाकर उसे मारने का प्रयास किया। इस दौरान दूसरे पुलिस कर्मचारी द्वारा हवाई फायर करने पर वे आरोपी फरार हो गए। इसी प्रकार पीसीआर-3 पर तैनात एक पुलिस कर्मचारी ने भी 30 से 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उपद्रवी उस पीसीआर पर तैनात पुलिस कर्मचारियों को भी पीटने के लिए उनके पीछे दौड़े थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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दोनों पुलिस कर्मचारी सस्पेंड, होमगार्ड के जवानों पर भी कार्रवाई
जैबा सिंह को घर से उठाने और उसके मारपीट करने के मामले में हुई मौैत के बाद से एसपी ने आरोपी पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें ईएएसआई कुलवंत, एचसी प्रदीप के नाम शामिल हैं, जबकि होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी कार्रवाई की है। उधर, होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी विभाग को लिखा गया है।
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दोनों पुलिस कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है, होमगार्ड के जवान के खिलाफ भी कार्रवाई कर दस्त्रत्त्ी गई है। जैबा सिंह से गांजा पत्ती बरामद मामले में पहले ही डीडीआर काटी गई है। एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करने की अलग प्रोसेस है।
-सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी करनाल।