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एफसीआई, माकेर्टिंग बोर्ड के बाद अब इग्नू सेंटर में भ्रष्टाचार के आरोप
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:25 AM IST
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एफसीआई, मार्केटिंग बोर्ड के बाद अब इग्नू सेंटर में भ्रष्टाचार के आरोपों से हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
एफसीआई और मार्केेटिंग बोर्ड के बाद अब इग्नू (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) के करनाल स्थित रीजनल सेंटर में भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला सामने आया है। बिल पास कराने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और पैसे नहीं देने पर करीब दो साल तक बिल रोकने का मामला सामने आया है।
कल्पना चावला कम्प्यूटेक प्रा. लिमिटेड के एमडी संजय ने इस मामले की शिकायत पीएम ऑफिस से लेकर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तक को की है। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेंटर के स्थानीय अधिकारी मामले को दबा रहे हैं और जांच को प्रभावित कर रहे हैं। उधर, सेंटर के अधिकारियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुआ आरोप लगाया है कि उन्होंने सेंटर के बिलों में गड़बड़ी पकड़ी थी, इसलिए उनकी शिकायत की जा रही है। फिलहाल मामले को लेकर यूनिवर्सिटी की ओर से एक जांच कमेटी गठित की गई है।
वाइस चांसलर को भेजी गई शिकायत में संजय कुमार ने बताया कि उसका यूनिवर्सिटी से टाइपअप है और वह स्टूडेंट्स को कोर्सिज की तैयारी कराता है। इसके बदले वह क्लासेज के हिसाब से बिल भेजता है और यूनिवर्सिटी उस बिल के आधार पर उसे पेमेंट करती है। संजय कुमार का आरोप है कि साल 2015 के करीब 2.94 लाख रुपये की पेमेंट काफी दिन तक नहीं की गई। करीब दो साल तक उसकी पेमेंट नहीं की गई, जब वह इस मामले को लेकर रीजनल सेंटर गया तो आरोप है कि सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा ने उससे बिल पास करने के बदल 30 हजार रुपये की मांग की है।
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शिकायत में सेंटर में तैनात अकाउंट ब्रांच के ही रोबिन वर्मा पर भी आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि इस मामले की शिकायत साल 2016 में सेंटर पर दी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। हारकर उसने मामले की शिकायत वाइस चांसलर को की और हेड ऑफिस के आदेशों के के बाद साल 2017 में उसे 2.63 लाख रुपये की पेमेंट की गई।
संजय कुमार का कहना है कि उसे पेमेंट तो मिल गई, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उन्हें बचाया जा रहा है। इस बारे में सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा ने सभी आरोपों को नकार दिया और कहा ये सब झूठे आरोप हैं। हमने सेंटर संचालक की गड़बड़ी पकड़ी थी, इसलिए जानबूझकर ये शिकायत की गई है। वे हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं। इसी प्रकार रोबिन वर्मा ने भी आरोपों को नकारते हुए इन्हें झूठा बताया।
एआरडी पर आरोपियों को बचाने के आरोप
शिकायतकर्ता संजय कुमार ने ये भी आरोप लगाया है कि इग्नू के रीजनल सेंटर के एडिशनल रीजनल डायरेक्टर (एआरडी) डॉ. धर्मपाल ने उसे न्याय दिलाने की बजाय उल्टे आरोपियों की मदद की। आरोप है कि डॉ. धर्मपाल ने दिल्ली हैड आफिस में अपने रसूखों का हवाला दिया। इतना ही नहीं जांच के लिए आई कमेटी को जांच कराने की बजाए कुरुक्षेत्र घुमाने तक ले गए। हालांकि, इस मामले में डॉ. धर्मपाल का कहना है कि ये आरोप सरासर झूठे हैं और जानबूझ कर इस प्रकार के आरोप मढ़े जा रहे हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, वे कानून के दायरे में रहकर कार्य कर रहे हैं।
आखिर कौन है सच्चा : अधिकारी या फिर कंप्यूटर सेंटर संचालक
मामले मेें इग्नू के अधिकारी कल्पना चावला कम्प्यूटेक प्रा. लिमिटेड के एमडी संजय पर झूठी शिकायत करने और बिलों में गड़बड़ी करने के आरोप लगा रहे हैं तो संजय कुमार 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और आरोपियों को बचाने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में जांच का विषय ये है कि आखिर सच्चा कौन और कौन झूठे आरोप लगा रहा है। मामले में सबसे बड़ा पेंच ये है कि इग्नू के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने संजय कुमार के बिलों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। बावजूद इसके न तो संजय कुमार के पैसे काटे गए और न ही उनके खिलाफ विवि द्वारा कोई कार्रवाई की गई। अगर संजय कुमार ने गड़बड़ की है तो क्यों नहीं अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई शिकायत दी। सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा का दावा है कि उन्होंने संजय की गड़बड़ी को लेकर पत्र लिखा था, हालांकि वो पत्र दिखा नहीं पाये। बड़ी बात ये भी कि विवि द्वारा अभी तक अधिकारियों को क्लीन चिट नहीं दी गई है।
अभी इस मामले की जांच चल रही है। इसके कोई दस्तावेज मीडिया को नहीं दिखा सकता। हैड क्वार्टर के स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। जांच में जो भी होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संजय कुमार की शिकायत के बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। -डॉ. मोती राम, क्षेत्रीय निदेशक प्रभारी।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
एफसीआई और मार्केेटिंग बोर्ड के बाद अब इग्नू (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) के करनाल स्थित रीजनल सेंटर में भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला सामने आया है। बिल पास कराने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और पैसे नहीं देने पर करीब दो साल तक बिल रोकने का मामला सामने आया है।
कल्पना चावला कम्प्यूटेक प्रा. लिमिटेड के एमडी संजय ने इस मामले की शिकायत पीएम ऑफिस से लेकर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तक को की है। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेंटर के स्थानीय अधिकारी मामले को दबा रहे हैं और जांच को प्रभावित कर रहे हैं। उधर, सेंटर के अधिकारियों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुआ आरोप लगाया है कि उन्होंने सेंटर के बिलों में गड़बड़ी पकड़ी थी, इसलिए उनकी शिकायत की जा रही है। फिलहाल मामले को लेकर यूनिवर्सिटी की ओर से एक जांच कमेटी गठित की गई है।
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वाइस चांसलर को भेजी गई शिकायत में संजय कुमार ने बताया कि उसका यूनिवर्सिटी से टाइपअप है और वह स्टूडेंट्स को कोर्सिज की तैयारी कराता है। इसके बदले वह क्लासेज के हिसाब से बिल भेजता है और यूनिवर्सिटी उस बिल के आधार पर उसे पेमेंट करती है। संजय कुमार का आरोप है कि साल 2015 के करीब 2.94 लाख रुपये की पेमेंट काफी दिन तक नहीं की गई। करीब दो साल तक उसकी पेमेंट नहीं की गई, जब वह इस मामले को लेकर रीजनल सेंटर गया तो आरोप है कि सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा ने उससे बिल पास करने के बदल 30 हजार रुपये की मांग की है।
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शिकायत में सेंटर में तैनात अकाउंट ब्रांच के ही रोबिन वर्मा पर भी आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि इस मामले की शिकायत साल 2016 में सेंटर पर दी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। हारकर उसने मामले की शिकायत वाइस चांसलर को की और हेड ऑफिस के आदेशों के के बाद साल 2017 में उसे 2.63 लाख रुपये की पेमेंट की गई।
संजय कुमार का कहना है कि उसे पेमेंट तो मिल गई, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उन्हें बचाया जा रहा है। इस बारे में सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा ने सभी आरोपों को नकार दिया और कहा ये सब झूठे आरोप हैं। हमने सेंटर संचालक की गड़बड़ी पकड़ी थी, इसलिए जानबूझकर ये शिकायत की गई है। वे हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं। इसी प्रकार रोबिन वर्मा ने भी आरोपों को नकारते हुए इन्हें झूठा बताया।
एआरडी पर आरोपियों को बचाने के आरोप
शिकायतकर्ता संजय कुमार ने ये भी आरोप लगाया है कि इग्नू के रीजनल सेंटर के एडिशनल रीजनल डायरेक्टर (एआरडी) डॉ. धर्मपाल ने उसे न्याय दिलाने की बजाय उल्टे आरोपियों की मदद की। आरोप है कि डॉ. धर्मपाल ने दिल्ली हैड आफिस में अपने रसूखों का हवाला दिया। इतना ही नहीं जांच के लिए आई कमेटी को जांच कराने की बजाए कुरुक्षेत्र घुमाने तक ले गए। हालांकि, इस मामले में डॉ. धर्मपाल का कहना है कि ये आरोप सरासर झूठे हैं और जानबूझ कर इस प्रकार के आरोप मढ़े जा रहे हैं। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है, वे कानून के दायरे में रहकर कार्य कर रहे हैं।
आखिर कौन है सच्चा : अधिकारी या फिर कंप्यूटर सेंटर संचालक
मामले मेें इग्नू के अधिकारी कल्पना चावला कम्प्यूटेक प्रा. लिमिटेड के एमडी संजय पर झूठी शिकायत करने और बिलों में गड़बड़ी करने के आरोप लगा रहे हैं तो संजय कुमार 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और आरोपियों को बचाने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में जांच का विषय ये है कि आखिर सच्चा कौन और कौन झूठे आरोप लगा रहा है। मामले में सबसे बड़ा पेंच ये है कि इग्नू के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने संजय कुमार के बिलों में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। बावजूद इसके न तो संजय कुमार के पैसे काटे गए और न ही उनके खिलाफ विवि द्वारा कोई कार्रवाई की गई। अगर संजय कुमार ने गड़बड़ की है तो क्यों नहीं अधिकारियों ने उसके खिलाफ कोई शिकायत दी। सैंक्शन ऑफिसर अशोक अरोड़ा का दावा है कि उन्होंने संजय की गड़बड़ी को लेकर पत्र लिखा था, हालांकि वो पत्र दिखा नहीं पाये। बड़ी बात ये भी कि विवि द्वारा अभी तक अधिकारियों को क्लीन चिट नहीं दी गई है।
अभी इस मामले की जांच चल रही है। इसके कोई दस्तावेज मीडिया को नहीं दिखा सकता। हैड क्वार्टर के स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। जांच में जो भी होगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। संजय कुमार की शिकायत के बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। -डॉ. मोती राम, क्षेत्रीय निदेशक प्रभारी।