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दम तोड़ रही सहकारिता, 725 में 625 समितियों की हालत दयनीय
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करनाल। सहकारिता के उत्थान में इफको का योगदान विषय पर इफको ने शुक्रवार को वेबिनार आयोजित किया। इसमें सहकारिता मंत्री डा.बनवारी लाल मुख्य अतिथि रहे। इफको के राज्य विपणन प्रबंधक डा.पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि इस दौरान सहकारिता मंत्री ने कहा कि नैनो यूरिया (तरल) कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम है। यह कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सहकारिता में स्वयं सहायता समूह मॉडल अपनाने व उनकी सहायता करने, पैक्स को मल्टी सर्विस सेंटर बनाने पर भी विचार करने का आह्वान किया। वहीं रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) आरएस वर्मा ने सहकारी समितियों को लाभदेय इकाई बनाने में इफको का बड़ा योगदान बताते हुए कहा कि राज्य की 725 समितियों में से केवल 100 ही लाभ में है। शेष 675 की स्थिति काफी दयनीय है। सभी समितियों को अब खाद के साथ-साथ अन्य व्यवसाय अपनाने होंगे, तभी वे जीवित रह पाएंगी।
इस मौके पर इफको नई दिल्ली के विपणन निदेशक योगेद्र कुमार ने कहा कि यह एक गौरवशाली क्षण है, कि इस वर्चुअल वेबिनार में पूरा सहकारी तंत्र शामिल है। इफको एक नवंबर 1967 को प्रारम्भ हुई, जिसकी जमा पूंजी महज छह लाख रुपये थी। 57 सहकारी समितियां इसकी सदस्य थीं लेकिन अब इफको की जमा पूंजी 632 करोड़ व सदस्य समितियों की संख्या 36000 है। कुल कारोबार 30000 करोड़ रुपये का है। पिछले 20 सालों से अपनी सदस्य समितियों को इफको 20 प्रतिशत लाभांश दे रही है। हरित क्रांति में भी इसका शीर्ष योगदान रहा है। कहा कि नैनो यूरिया पूर्ण स्वदेशी तकनीक पर विकसित उत्पाद है। उन्होंने अगले सीजन तक इफको नैनो डीएपी भी लांच करने की स्थिति में होगा।
अतिरिक्त रजिस्ट्रार हरको फेड सुमन बल्हारा ने कहा कि आज के उदारीकरण, वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण व प्रतिस्पर्धात्मकता के दौर में पैक्स काफी पीछे चली गई हैं क्योंकि हमारे पास नई तकनीक नहीं है। हमारी समितियों के पास धनराशि नहीं है व अधिकतर समितियां घाटे में चल रही हैं। हरको बैंक के प्रबंध निदेशक राहुल उप्पल ने समितियों को विविधीकरण की ओर जाने का आह्वान किया। इफको (अनुसंधान एवं विकास) के महाप्रबंधक डा. रमेश रालिया ने नैनों के प्रयोग की विधि, इसके लाभ, उत्पाद में वृद्धि के आंकड़े रखे। डा.पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि इफको ने 4000 स्प्रेयर समितियों को किसानों के प्रयोग के लिए निशुल्क दिए गए हैं। किसान अपने समितियों से स्प्रेयर प्राप्त कर सकते हैं। संचालन उप महाप्रबंधक (कृषि सेवाएं) ओमकार सिंह ने किया। करनाल के प्रबंधक डा.निरंजन सिंह ने विक्रय संबंधी जानकारी दी। मुख्य क्षेत्र प्रबंधक यमुनानगर विरेंद्र मिगलानी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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इस मौके पर इफको नई दिल्ली के विपणन निदेशक योगेद्र कुमार ने कहा कि यह एक गौरवशाली क्षण है, कि इस वर्चुअल वेबिनार में पूरा सहकारी तंत्र शामिल है। इफको एक नवंबर 1967 को प्रारम्भ हुई, जिसकी जमा पूंजी महज छह लाख रुपये थी। 57 सहकारी समितियां इसकी सदस्य थीं लेकिन अब इफको की जमा पूंजी 632 करोड़ व सदस्य समितियों की संख्या 36000 है। कुल कारोबार 30000 करोड़ रुपये का है। पिछले 20 सालों से अपनी सदस्य समितियों को इफको 20 प्रतिशत लाभांश दे रही है। हरित क्रांति में भी इसका शीर्ष योगदान रहा है। कहा कि नैनो यूरिया पूर्ण स्वदेशी तकनीक पर विकसित उत्पाद है। उन्होंने अगले सीजन तक इफको नैनो डीएपी भी लांच करने की स्थिति में होगा।
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अतिरिक्त रजिस्ट्रार हरको फेड सुमन बल्हारा ने कहा कि आज के उदारीकरण, वैश्वीकरण, आधुनिकीकरण व प्रतिस्पर्धात्मकता के दौर में पैक्स काफी पीछे चली गई हैं क्योंकि हमारे पास नई तकनीक नहीं है। हमारी समितियों के पास धनराशि नहीं है व अधिकतर समितियां घाटे में चल रही हैं। हरको बैंक के प्रबंध निदेशक राहुल उप्पल ने समितियों को विविधीकरण की ओर जाने का आह्वान किया। इफको (अनुसंधान एवं विकास) के महाप्रबंधक डा. रमेश रालिया ने नैनों के प्रयोग की विधि, इसके लाभ, उत्पाद में वृद्धि के आंकड़े रखे। डा.पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि इफको ने 4000 स्प्रेयर समितियों को किसानों के प्रयोग के लिए निशुल्क दिए गए हैं। किसान अपने समितियों से स्प्रेयर प्राप्त कर सकते हैं। संचालन उप महाप्रबंधक (कृषि सेवाएं) ओमकार सिंह ने किया। करनाल के प्रबंधक डा.निरंजन सिंह ने विक्रय संबंधी जानकारी दी। मुख्य क्षेत्र प्रबंधक यमुनानगर विरेंद्र मिगलानी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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