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शराब को शक्ति समझना बड़ी भूल : पीयूष मुनि
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करनाल। पर्यूषण पर्व के पांचवे दिन जैन स्थानक हनुमान गली में प्रवचन करते हुए उपप्रवर्तक पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि मदिरापान बहुत बड़ी बुराई है। उन्होंने समझाया कि शराब से क्षणिक उत्तेजना जरूर बढ़ती है परंतु इसे शक्ति समझना भूल है। इससे चित्तभ्रांत हो जाता है, पापचर्या पैदा होती है तथा दुर्गति मिलती है। यह बुराई एक बार जीवन में आ जाने पर छोड़ना कठिन हो जाता है। शराब अंदर जाती है और अक्ल शरीर छोड़ देती है। मदिरा पीने से शांति नहीं मिलती, दबी हुई वासनाएं भड़कती हैं और व्यक्ति को अपने-पराए का विवेक नहीं रहता। यह बहुत बड़ा सामाजिक अभिशाप है, जिसे मिटाना आवश्यक है।
मुनि महाराज ने कहा कि शराब पीने वाले के जीवन से अहिंसा, सत्य, धर्म पलायन कर जाते हैं। शराब में ऐसा कोई पौष्टिक तत्व नहीं होता, जिसके बिना काम न चल सकता हो। शराब के नशे में व्यक्ति बाहर के तापमान का सही ज्ञान नहीं कर पाता। मदिरा का सेवन करने वाले का पारिवारिक जीवन छिन्न-भिन्न हो जाता है। समाज में उसका यश नहीं रहता। कोई उसकी इज्जत नहीं करता। शराब पीने का आदी जल्दी ही थक जाता है।
शराब भोजन को पचाने वाले रासायनिक पदार्थों के बनने की प्रकिया को बंद करती है। शराब से मानसिक, बौद्धिक तथा शारीरिक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं, मानसिक और शारीरिक तकलीफें होती हैं तथा धन, धर्म, बल की हानि होती है। शराब से ज्ञान, स्मृति, बुद्धि का नाश होता है, शरीर कुरूप होता है, रोगों का घर बन जाता है, परिवार में तिरस्कार मिलता है, विद्वेष पैदा होता है, सज्जनों से अलगाव होता है। इसलिए शराब से हमेशा दूर रहना चाहिए।
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मुनि महाराज ने कहा कि शराब पीने वाले के जीवन से अहिंसा, सत्य, धर्म पलायन कर जाते हैं। शराब में ऐसा कोई पौष्टिक तत्व नहीं होता, जिसके बिना काम न चल सकता हो। शराब के नशे में व्यक्ति बाहर के तापमान का सही ज्ञान नहीं कर पाता। मदिरा का सेवन करने वाले का पारिवारिक जीवन छिन्न-भिन्न हो जाता है। समाज में उसका यश नहीं रहता। कोई उसकी इज्जत नहीं करता। शराब पीने का आदी जल्दी ही थक जाता है।
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शराब भोजन को पचाने वाले रासायनिक पदार्थों के बनने की प्रकिया को बंद करती है। शराब से मानसिक, बौद्धिक तथा शारीरिक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं, मानसिक और शारीरिक तकलीफें होती हैं तथा धन, धर्म, बल की हानि होती है। शराब से ज्ञान, स्मृति, बुद्धि का नाश होता है, शरीर कुरूप होता है, रोगों का घर बन जाता है, परिवार में तिरस्कार मिलता है, विद्वेष पैदा होता है, सज्जनों से अलगाव होता है। इसलिए शराब से हमेशा दूर रहना चाहिए।
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