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Karnal News: पंजीकृत लिफाफा जमा नहीं करने पर शिकायत खारिज

Wed, 25 Mar 2026 02:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Wed, 25 Mar 2026 02:50 AM IST
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Complaint dismissed for not submitting registered envelope
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लापरवाही और अदालती प्रक्रिया का पालन न करने के कारण सेक्टर-9 निवासी जोगिंद्र सिंह की शिकायत को खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता ने टीसीएल इंडिया और अमेज़न के खिलाफ शिकायत दी थी। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने पिछले दो वर्षों से विरोधी पक्ष को नोटिस भेजने के लिए आवश्यक पंजीकृत लिफाफा जमा नहीं कराया। इसके कारण मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

जोगिंद्र सिंह ने 21 मई, 2024 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में टीसीएल के दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय और अमेज़न के गुरुग्राम कार्यालय को पक्ष बनाया गया था। वाद दायर करने के बाद आयोग के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ जबकि अमेज़न की ओर से निरंतर अधिवक्ता ने पेश होकर कंपनी का पक्ष रखा।
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आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने मामले की समीक्षा की। रिकॉर्ड के अनुसार, मामले को बार-बार इस शर्त पर स्थगित किया गया था कि शिकायतकर्ता विपक्षी पक्ष टीसीएल को नोटिस भेजने के लिए पंजीकृत लिफाफा आयोग के समक्ष दाखिल करे। बार-बार अवसर दिए जाने और अंतिम अवसर मिलने के बावजूद शिकायतकर्ता ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायत दर्ज हुए लगभग दो साल बीत चुके हैं। बार-बार बुलाने पर भी शिकायतकर्ता का उपस्थित न होना और दस्तावेज़ जमा न करना यह दर्शाता है कि या तो उसकी समस्या का समाधान हो चुका है या फिर वह इस मामले को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखता है।
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आयोग ने शिकायत को खारिज करते हुए इसे रिकॉर्ड रूम में भेजने का निर्देश दिया है। हालांकि, उपभोक्ता के हितों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने जोगिंद्र सिंह को यह छूट भी दी है कि यदि वे चाहें तो समान कारण पर दोबारा नई शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


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उपभोक्ता अदालत में पंजीकृत लिफाफा का महत्व

उपभोक्ता अदालत में जब कोई केस दाखिल होता है तो विपक्षी पार्टी को सूचित करना अनिवार्य होता है। इसके लिए शिकायतकर्ता को डाक टिकट लगा हुआ रजिस्टर्ड लिफाफा कोर्ट में देना होता है, जिसके माध्यम से कोर्ट आधिकारिक समन भेजता है। इसके बिना कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हो सकती। आयोग का कहना है कि यह निर्णय उन उपभोक्ताओं के लिए एक सबक है जो शिकायत तो दर्ज कराते हैं, लेकिन अदालती निर्देशों और तारीखों का गंभीरता से पालन नहीं करते। इससे साफ है कि किसी शिकायत के बाद निरंतर सुनवाई पर जाना और अदालती निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
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