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Karnal News: फरियादी महीनों से भटक रहे, समाधान अब भी कोसों दूर
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समाधान शिविर में शिकायत लेकर पहुंचे लोग। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। लघु सचिवालय में सोमवार को आयोजित समाधान शिविर एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया। शिविर में पहुंचे अधिकांश फरियादी निराश लौटे। कुछ तो घंटों इंतजार करने के बावजूद अपनी शिकायत तक दर्ज नहीं करा सके। अधिकांश शिकायतकर्ता ऐसे थे जो काफी समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। समाधान शिविर में डीआरओ मनीष यादव ने समस्याएं सुनीं। 13 समस्याएं आईं। मौके पर किसी का ठोस निदान नहीं किया जा सका।
शिविर में पहुंचे पृथ्वी सिंह ने बताया कि करीब एक साल पहले उनके बेटे के साथ पड़ोस के कुछ लोगों ने मारपीट की थी। पुलिस में शिकायत दी गई। मेडिकल हुआ। बयान दर्ज हुए लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह हर महीने कभी थाने, कभी तहसील, कभी लघु सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। आज भी यही उम्मीद लेकर आए थे कि शायद कुछ होगा लेकिन यहां भी सिर्फ आश्वासन मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि दबंग लोग राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर धरना देने को मजबूर होंगे।
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पंचायत की जमीन पर बसे लोगों की गुहार
गांव टिकरी से आए सतीश कुमार करीब 50 ग्रामीणों के साथ समाधान शिविर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे और उनके परिवार कई वर्षों से पंचायत की जमीन पर रह रहे हैं। सरकार की ओर से योजना के तहत ऐसे लोगों को मालिकाना हक देने की बात कही गई थी लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी फाइल अटक गई है। सतीश कुमार ने बताया कि बार-बार कहा जाता है फाइल आगे भेज दी है। हम सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
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पीपीपी में बहू का नाम हटवाने को काट रहीं चक्कर
शामगढ़ से आईं रोशनी देवी ने बताया कि कुछ समय पहले उनके बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद बहू घर छोड़कर चली गई लेकिन फैमिली आईडी में उसका नाम अभी भी जुड़ा हुआ है। रोशनी देवी ने बताया कि वह गरीब और बीमार हैं लेकिन फैमिली आईडी में बहू का नाम होने के कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने रोते हुए कहा कि आज वह कई घंटे तक इंतजार करती रहीं लेकिन शिकायत तक नहीं ली गई। बस यही कहा गया कि थोड़ा इंतजार कीजिए।
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जांच के बाद होता है समाधान
सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में जांच की जरूरत होती है, इसलिए समय लगता है। - मनीश यादव, डीआरओ
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करनाल। लघु सचिवालय में सोमवार को आयोजित समाधान शिविर एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया। शिविर में पहुंचे अधिकांश फरियादी निराश लौटे। कुछ तो घंटों इंतजार करने के बावजूद अपनी शिकायत तक दर्ज नहीं करा सके। अधिकांश शिकायतकर्ता ऐसे थे जो काफी समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। समाधान शिविर में डीआरओ मनीष यादव ने समस्याएं सुनीं। 13 समस्याएं आईं। मौके पर किसी का ठोस निदान नहीं किया जा सका।
शिविर में पहुंचे पृथ्वी सिंह ने बताया कि करीब एक साल पहले उनके बेटे के साथ पड़ोस के कुछ लोगों ने मारपीट की थी। पुलिस में शिकायत दी गई। मेडिकल हुआ। बयान दर्ज हुए लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह हर महीने कभी थाने, कभी तहसील, कभी लघु सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। आज भी यही उम्मीद लेकर आए थे कि शायद कुछ होगा लेकिन यहां भी सिर्फ आश्वासन मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि दबंग लोग राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर धरना देने को मजबूर होंगे।
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पंचायत की जमीन पर बसे लोगों की गुहार
गांव टिकरी से आए सतीश कुमार करीब 50 ग्रामीणों के साथ समाधान शिविर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे और उनके परिवार कई वर्षों से पंचायत की जमीन पर रह रहे हैं। सरकार की ओर से योजना के तहत ऐसे लोगों को मालिकाना हक देने की बात कही गई थी लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी फाइल अटक गई है। सतीश कुमार ने बताया कि बार-बार कहा जाता है फाइल आगे भेज दी है। हम सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
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पीपीपी में बहू का नाम हटवाने को काट रहीं चक्कर
शामगढ़ से आईं रोशनी देवी ने बताया कि कुछ समय पहले उनके बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद बहू घर छोड़कर चली गई लेकिन फैमिली आईडी में उसका नाम अभी भी जुड़ा हुआ है। रोशनी देवी ने बताया कि वह गरीब और बीमार हैं लेकिन फैमिली आईडी में बहू का नाम होने के कारण उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने रोते हुए कहा कि आज वह कई घंटे तक इंतजार करती रहीं लेकिन शिकायत तक नहीं ली गई। बस यही कहा गया कि थोड़ा इंतजार कीजिए।
जांच के बाद होता है समाधान
सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में जांच की जरूरत होती है, इसलिए समय लगता है। - मनीश यादव, डीआरओ