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प्रवासी श्रमिकों को गृह राज्यों को भिजवाने की व्यवस्था की खुली पोल
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घर नहीं भिजवाने से नाराज प्रवासी मजदूरों ने शनिवार को शहर के इंद्री मोड़ स्थित पलड़ी चौक पर हंगामा किया। उनका कहना है कि न तो उन्हें शहर के अंदर आने दिया जा रहा है और न ही घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। सूत्रों की मानें तो राधा स्वामी सत्संग भवन ने अब अधिक श्रमिकों की व्यवस्था करने से हाथ खड़े कर दिये है। इस कारण पुलिस प्रशासन भी श्रमिकों को शहर में अंदर नहीं आने दे रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से प्रवासियों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के इंतजामों की श्रमिकों ने पोल खोल दी है। 29 मार्च से लेकर अभी तक लगातार राधा स्वामी सत्संग भवनों ने प्रवासियों के ठहरने, उनके खाने पीने, महिलाओं से संबंधित आवश्यक वस्तुएं और बच्चों के दूध आदि तक की सारी व्यवस्था की हैं लेकिन अब जब लॉकडाउन 4.0 का अंतिम सप्ताह शुरू होने वाला है तो राधा स्वामी सत्संग भवन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे अब जिला प्रशासन को प्रवासियों की पंजाब राज्य से आने वाली बाढ़ को रोकना दुश्वार हो गया है। यही कारण है कि शनिवार को शहर के इंद्री मोड़ पलड़ी चौक पर प्रवासी मजदूरों का भारी जमावड़ा लग गया और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें शहर के अंदर आने से रोका लेकिन पलड़ी चौक पर हजारों की संख्या में प्रवासी श्रमिक चौराहे व रोड पर निजी सवारियों के इंतजार में बैठे नजर आए। वहीं पलड़ी चौक के पास स्थित ग्रांड व्यू बारातघर में भी क्षमता से कहीं अधिक हजारों प्रवासी रोके गए हैं। ऐसे में यहां भी व्यवस्थाएं छिन्न भिन्न होती दिखीं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा प्रवासी पैदल ही अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। इधर उपयाुक्त निशांत कुमार यादव, एडीसी अनीश यादव से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। इससे प्रशासनिक पक्ष की जानकारी नहीं हो सकी है।
राधा स्वामी सत्संग भवन ने खड़े किए हाथ, निर्मल कुटिया ही सहारा
-राधा स्वामी सत्संग भवन के एक सेवादार ने बताया कि 29 मार्च से हरियाणा प्रदेश के सभी सत्संग भवनों को खोल दिया गया था। करनाल जिले में ही बारह सत्संग भवनों में प्रवासियों के ठहरने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था की गई थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि राधा सत्संग भवन के सेवादारों ने जिला प्रशासन के साथ खड़े होकर प्रवासियों की जो सेवा की, वह अकल्पनीय है। जो श्रमिक यहां रहकर अपने राज्यों को गए, वह राधा स्वामी सत्संगियों के सेवाभाव से अभिभूत दिखे। करनाल जिला प्रशासन भी काफी हद तक प्रवासियों की सेवा करने में इन सत्संगियों के सहयोग के कारण ही सफल रहा लेकिन अब सत्संग भवनों को खाली कराया जा रहा है। शुक्रवार को सभी 11 सत्संग भवनों को खाली कराकर करनाल जीटी रोड सत्संग भवन में लाया गया। लेकिन अब डेरा हाईकमान के आदेशों के क्रम में सत्संग भवनों में प्रवासियों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। अब जिला प्रशासन के पास सिर्फ निर्मल कुटिया ही एक मात्र सहारा बचा है।
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आज 1804 प्रवासियों को बिहार भिजवाया गया
-जिला प्रशासन ने शुक्रवार को 41 बसों से 1804 प्रवासी श्रमिकों को बिहार राज्य भिजवाया है। राधा स्वामी सत्संग भवन के सेवादार देव दुआ ने बताया कि आज 41 व गुरुवार को 44 बसों से प्रवासियों को बिहार राज्य भिजवाया गया है। लेकिन अब संस्था के हाईकमान के आदेशों के अनुसार अब इस व्यवस्था को बंद किया जा रहा है।
घर भेजने के नाम पर छोड़ आये अंबाला, पैदल चलकर वापस आये करनाल
बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के प्रवासी श्रमिक गुड्डू ने बताया कि वह पंजाब से दस दिन पहले आया था। चार दिनों तक राधा सत्संग स्वामी सत्संग भवन में रहा। इसके बाद अन्य सैकड़ों श्रमिकों के साथ उसका मेडिकल चेकअप कराकर अंबाला स्टेशन पर छोड़ दिया गया। कहा गया कि यहां से ट्रेन जाएगी लेकिन चार दिन के बाद भी कोई ट्रेन नहीं गई। वहां खाने पीने की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई, इसके बाद फिर पैदल चलकर करनाल पहुंचा हूं। अब फिर यहां से कहा जा रहा है कि कंबोपुरा कम्यूनिटी सेंटर जाओ, वहां से बिहार भेजने की व्यवस्था करेंगे। पिछले दस दिनों से सैकड़ों श्रमिक यहां से वहां घुमाए जा रहे हैं, किसी को गृह राज्य नहीं भेजा जा रहा है। हम लोगों को सिर्फ बस उपलब्ध करा दी जाए, हम किराया देकर घरों को चले जाएंगे। कम से कम यहां से जाने तो दो।
पंजाब से आए प्रवासी श्रमिकों ने बारात घर को पहुंचाया नुकसान
-करनाल में इंद्री रोड पर निर्मल कुटिया के एक सेवादार चंदन बाबा का दि ग्रांड व्यू बारात घर है। निर्मल कुटिया शुरू से ही प्रवासियों को भोजन कराने का काम कर रही है। सेवादार ने 15 दिन पहले प्रशासन के कहने पर अपना बारात घर भी सेवा के लिए दे दिया। अपने सेवादार भी लगा दिए। हजारों प्रवासी श्रमिकों को सुबह चाय नाश्ता, तीन समय भोजन, रहने के लिए पंखे वाले स्थल, नहाने आदि नित्यक्रिया के लिए अच्छे बाथरूम, टायलेट दिए, लेकिन सप्ताहभर के अंदर ही श्रमिकों ने इनकी हालत खस्ता कर दी। अधिकांश टोटियां तोड़ दी। बाथ रूमों में भारी गंदगी कर दी। चाय पीने के बाद गिलास आदि भी जहां तहां फेंके जा रहे हैं। मास्क नहीं लगा रहे हैं। सोशल डिस्टेसिंग तो कर ही नहीं रहें हैं। हालांकि सेवादार फिर भी साफ सफाई में जुटे हैं, नुकसान होने पर भी इसे सेवा कार्य में ही शामिल मान रहे हैं।
घर नहीं पहुंचे, बेटी की शादी की तिथि निकल गई
- होशियारपुर (पंजाब) में परिवार सहित खेतीबाड़ी में मजदूरी करती थी। उनके साथ सभी 24 लोग है। अब काम खत्म हो गया है। घर की ओर पैदल ही चल दिए हैं। क्योंकि 11 मई को बेटी की शादी थी, पहुंच नहीं पाने के कारण शादी निरस्त हो गई है। अब घर जाकर दोबारा तिथि तय करनी पड़ेगी।
-रजनी, हरदोई, उत्तर प्रदेश।
- पंजाब के गोविंदगढ़ में काम करता था, साथ में उसके जिले के ही 15 और लोग भी हैं, जहां काम करते थे, वहां फैक्टरी संचालक ने भगा दिया। फैक्टरी को खाली करा दिया। हम लोग सड़क पर आ गए। पंजाब सरकार ने किसी तरह की कोई सहायता नहीं की। पांच दिन पहले पैदल चले थे, अब करनाल में पुलिस ने रोक लिया है। कोई यह भी नहीं बता रहा है कि उसे कब घर भिजवाया जाएगा।
-अभिनंदन, भागलपुर, बिहार।
-हम बारह लोग हैं, निषिंग के राइस मिल में काम करते थे, लेकिन अब मालिक ने कहा कि जहां जाना हो जाओ, हम यहां रहने नहीं देंगे। सरकार व्यवस्था कर रही है, वहीं जाओ। इस कारण अपना सारा सामान पोटली में बांधकर चल दिए। अब करनाल में पुलिस आगे जाने नहीं दे रही हैं। परिवार में एक मौत हो गई, वहां जाना जरूरी था, लेकिन नहीं पहुंच पाए।
-अवधेश ऋषि, पूर्णिया बिहार।
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जिला प्रशासन की ओर से प्रवासियों को उनके राज्यों तक पहुंचाने के इंतजामों की श्रमिकों ने पोल खोल दी है। 29 मार्च से लेकर अभी तक लगातार राधा स्वामी सत्संग भवनों ने प्रवासियों के ठहरने, उनके खाने पीने, महिलाओं से संबंधित आवश्यक वस्तुएं और बच्चों के दूध आदि तक की सारी व्यवस्था की हैं लेकिन अब जब लॉकडाउन 4.0 का अंतिम सप्ताह शुरू होने वाला है तो राधा स्वामी सत्संग भवन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे अब जिला प्रशासन को प्रवासियों की पंजाब राज्य से आने वाली बाढ़ को रोकना दुश्वार हो गया है। यही कारण है कि शनिवार को शहर के इंद्री मोड़ पलड़ी चौक पर प्रवासी मजदूरों का भारी जमावड़ा लग गया और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें शहर के अंदर आने से रोका लेकिन पलड़ी चौक पर हजारों की संख्या में प्रवासी श्रमिक चौराहे व रोड पर निजी सवारियों के इंतजार में बैठे नजर आए। वहीं पलड़ी चौक के पास स्थित ग्रांड व्यू बारातघर में भी क्षमता से कहीं अधिक हजारों प्रवासी रोके गए हैं। ऐसे में यहां भी व्यवस्थाएं छिन्न भिन्न होती दिखीं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा प्रवासी पैदल ही अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। इधर उपयाुक्त निशांत कुमार यादव, एडीसी अनीश यादव से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। इससे प्रशासनिक पक्ष की जानकारी नहीं हो सकी है।
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राधा स्वामी सत्संग भवन ने खड़े किए हाथ, निर्मल कुटिया ही सहारा
-राधा स्वामी सत्संग भवन के एक सेवादार ने बताया कि 29 मार्च से हरियाणा प्रदेश के सभी सत्संग भवनों को खोल दिया गया था। करनाल जिले में ही बारह सत्संग भवनों में प्रवासियों के ठहरने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था की गई थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि राधा सत्संग भवन के सेवादारों ने जिला प्रशासन के साथ खड़े होकर प्रवासियों की जो सेवा की, वह अकल्पनीय है। जो श्रमिक यहां रहकर अपने राज्यों को गए, वह राधा स्वामी सत्संगियों के सेवाभाव से अभिभूत दिखे। करनाल जिला प्रशासन भी काफी हद तक प्रवासियों की सेवा करने में इन सत्संगियों के सहयोग के कारण ही सफल रहा लेकिन अब सत्संग भवनों को खाली कराया जा रहा है। शुक्रवार को सभी 11 सत्संग भवनों को खाली कराकर करनाल जीटी रोड सत्संग भवन में लाया गया। लेकिन अब डेरा हाईकमान के आदेशों के क्रम में सत्संग भवनों में प्रवासियों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। अब जिला प्रशासन के पास सिर्फ निर्मल कुटिया ही एक मात्र सहारा बचा है।
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आज 1804 प्रवासियों को बिहार भिजवाया गया
-जिला प्रशासन ने शुक्रवार को 41 बसों से 1804 प्रवासी श्रमिकों को बिहार राज्य भिजवाया है। राधा स्वामी सत्संग भवन के सेवादार देव दुआ ने बताया कि आज 41 व गुरुवार को 44 बसों से प्रवासियों को बिहार राज्य भिजवाया गया है। लेकिन अब संस्था के हाईकमान के आदेशों के अनुसार अब इस व्यवस्था को बंद किया जा रहा है।
घर भेजने के नाम पर छोड़ आये अंबाला, पैदल चलकर वापस आये करनाल
बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के प्रवासी श्रमिक गुड्डू ने बताया कि वह पंजाब से दस दिन पहले आया था। चार दिनों तक राधा सत्संग स्वामी सत्संग भवन में रहा। इसके बाद अन्य सैकड़ों श्रमिकों के साथ उसका मेडिकल चेकअप कराकर अंबाला स्टेशन पर छोड़ दिया गया। कहा गया कि यहां से ट्रेन जाएगी लेकिन चार दिन के बाद भी कोई ट्रेन नहीं गई। वहां खाने पीने की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई, इसके बाद फिर पैदल चलकर करनाल पहुंचा हूं। अब फिर यहां से कहा जा रहा है कि कंबोपुरा कम्यूनिटी सेंटर जाओ, वहां से बिहार भेजने की व्यवस्था करेंगे। पिछले दस दिनों से सैकड़ों श्रमिक यहां से वहां घुमाए जा रहे हैं, किसी को गृह राज्य नहीं भेजा जा रहा है। हम लोगों को सिर्फ बस उपलब्ध करा दी जाए, हम किराया देकर घरों को चले जाएंगे। कम से कम यहां से जाने तो दो।
पंजाब से आए प्रवासी श्रमिकों ने बारात घर को पहुंचाया नुकसान
-करनाल में इंद्री रोड पर निर्मल कुटिया के एक सेवादार चंदन बाबा का दि ग्रांड व्यू बारात घर है। निर्मल कुटिया शुरू से ही प्रवासियों को भोजन कराने का काम कर रही है। सेवादार ने 15 दिन पहले प्रशासन के कहने पर अपना बारात घर भी सेवा के लिए दे दिया। अपने सेवादार भी लगा दिए। हजारों प्रवासी श्रमिकों को सुबह चाय नाश्ता, तीन समय भोजन, रहने के लिए पंखे वाले स्थल, नहाने आदि नित्यक्रिया के लिए अच्छे बाथरूम, टायलेट दिए, लेकिन सप्ताहभर के अंदर ही श्रमिकों ने इनकी हालत खस्ता कर दी। अधिकांश टोटियां तोड़ दी। बाथ रूमों में भारी गंदगी कर दी। चाय पीने के बाद गिलास आदि भी जहां तहां फेंके जा रहे हैं। मास्क नहीं लगा रहे हैं। सोशल डिस्टेसिंग तो कर ही नहीं रहें हैं। हालांकि सेवादार फिर भी साफ सफाई में जुटे हैं, नुकसान होने पर भी इसे सेवा कार्य में ही शामिल मान रहे हैं।
घर नहीं पहुंचे, बेटी की शादी की तिथि निकल गई
- होशियारपुर (पंजाब) में परिवार सहित खेतीबाड़ी में मजदूरी करती थी। उनके साथ सभी 24 लोग है। अब काम खत्म हो गया है। घर की ओर पैदल ही चल दिए हैं। क्योंकि 11 मई को बेटी की शादी थी, पहुंच नहीं पाने के कारण शादी निरस्त हो गई है। अब घर जाकर दोबारा तिथि तय करनी पड़ेगी।
-रजनी, हरदोई, उत्तर प्रदेश।
- पंजाब के गोविंदगढ़ में काम करता था, साथ में उसके जिले के ही 15 और लोग भी हैं, जहां काम करते थे, वहां फैक्टरी संचालक ने भगा दिया। फैक्टरी को खाली करा दिया। हम लोग सड़क पर आ गए। पंजाब सरकार ने किसी तरह की कोई सहायता नहीं की। पांच दिन पहले पैदल चले थे, अब करनाल में पुलिस ने रोक लिया है। कोई यह भी नहीं बता रहा है कि उसे कब घर भिजवाया जाएगा।
-अभिनंदन, भागलपुर, बिहार।
-हम बारह लोग हैं, निषिंग के राइस मिल में काम करते थे, लेकिन अब मालिक ने कहा कि जहां जाना हो जाओ, हम यहां रहने नहीं देंगे। सरकार व्यवस्था कर रही है, वहीं जाओ। इस कारण अपना सारा सामान पोटली में बांधकर चल दिए। अब करनाल में पुलिस आगे जाने नहीं दे रही हैं। परिवार में एक मौत हो गई, वहां जाना जरूरी था, लेकिन नहीं पहुंच पाए।
-अवधेश ऋषि, पूर्णिया बिहार।