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रंगारंग कार्यक्रमों के बीच झलकी सामाजिक वेदना
कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 28 Oct 2013 12:09 AM IST
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कुरुक्षेत्र में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच गंभीर सामाजिक समस्याओं पर चिंतन के साथ रविवार को कुरुक्षेत्र विद्याविद्यालय में हरियाणवी संस्कृति के महाकुंभ रत्नावली फेस्टिवल-2013 का आगाज हुआ।
पहले दिन जहां हरियाणवी लोक गीतों और हरियाणवी पॉप सांग ने जमकर धूम मचाई वहीं ओपन एयर थियेटर में सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष करते हुए हरियाणवी स्किट पेश की गई। सांस्कृतिक समारोह की शुरुआत सरस्वती वंदना और जंगम जोगियों ने हजारों वर्ष पुरानी अपनी विशिष्ट शैली में शिव विवाह का गायन किया।
इससे पहले केयू के कुलपति डॉ. डीडीएस संधू ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस फेस्टिवल में प्रदेश भर से करीब तीन हजार छात्र छात्राएं शिरकत कर रहे हैं।
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जब छोटी सी बनड़ी फेर्यां मैं जकड़ी...
आडिटोरियम में हरियाणवी पॉप सांग का आयोजन किया गया। पाश्चात्य संगीत व वेशभूषा के साथ रंग बिरंगी रोशनियों के बीच हरियाणवी लोक गीत दर्शकों को बांधने में सफल रहा। सबसे पहले मंच पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर की टीम ने दूल्हा दुल्हन की वेषभूषा के साथ छोटी सी बनड़ी फेर्यां मैं जकड़ी, थम ज्याए क्यूं ना जी सोने की तगड़ी........के साथ धमाल मचाया।
इस प्रस्तुति पर मंच पर आए तो हजारों दर्शकों से भरा आडिटोरियम तालियों की गूंज उठा। इसके साथ ही यूटीडी कुवि की टीम ने मोबाई आली छोरी गजब करगी..., जींद के सीआर किसान कॉलेज की टीम ने अपनी प्रस्तुति कुछ यूं दी...इस डालां नजर मिलाई रे, वा छोरी नजर मिलगी.....।
दोहपर बाद तक प्रस्तुतियों का रंग यूं ही जमा रहा। ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी स्किट के माध्यम से ज्वलंत समस्याओं पर जम कर कटाक्ष किए गए। इसके साथ ही हरियाणी चुटकुलों ने भी दर्शकों को खूब गुदगुदाया। रत्नावली के पहले दिन रेडियो मिर्ची से आए डीजे कैंडी ने हरियाणवी लोक गीतों को धूम धड़ाके के साथ मिक्स कर के प्रस्तुत किया। उन्होंने आडिटोरियम हाल में खचाखच भरे दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
स्किट में आशाराम बापू पर व्यंग्य
स्किट में 20 टीमों ने अपने नाम दर्ज करवाए। देर शाम तक प्रस्तुतियां चलती रही। सबसे पहले पानीपत के एसडी कॉलेज की टीम ने अपनी प्रस्तुति इसा देख्या सुपना दी। उसके पश्चात गुरुनानक खालसा कॉलेज यमुनानगर की टीम ने ‘माणस कड़ै गए नाम सै’ अपनी स्किट पेश की। जुलाना के जेबीएम कॉलेज की टीम ने देशी फिल्म इंडस्ट्री के नाम से अपनी प्रस्तुति दी। आरके एसडी कॉलेज कैथल की टीम ने पर्दाफाश के माध्यम से आज के नकली संतों पर कटाक्ष किया।
भ्रष्टाचार आदि ज्वलंत समस्याओं पर चिंतन
सीनेट हाल में आयोजित हरियाणवी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें दो दर्जन के करीब प्रतिभागियों ने भागीदारी की। यूटीडी, कैथल, भिवानी व रोहतक आदि क्षेत्रों से पहुंचे युवा प्रतिभागियों ने अपने विचारों से सबको उद्वेलित कर दिया। प्रतिभागियों ने कन्या भ्रूण हत्या पर व्यंग्य के माध्यम से लोक गीत को कुछ यूं उल्टा कि बाबू देश जांदे प्रदेश जाईयों, मेरी खातर छोरी....., इसके साथ ही समाज के परिवर्तन की जिम्मेदारी भी युवाओं के कंधों पर डालने का प्रयास व्याख्यानों के माध्यम से किया गया। यही नहीं भ्रष्टाचार को आम व नींबू की तरह आचार की संज्ञा देते हुए ऐसा लत डालने वाला आचार बताया कि इसकी आदत बनने के बाद छोड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। इसके साथ ही भ्रष्टाचारी व बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया गया।
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पहले दिन जहां हरियाणवी लोक गीतों और हरियाणवी पॉप सांग ने जमकर धूम मचाई वहीं ओपन एयर थियेटर में सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष करते हुए हरियाणवी स्किट पेश की गई। सांस्कृतिक समारोह की शुरुआत सरस्वती वंदना और जंगम जोगियों ने हजारों वर्ष पुरानी अपनी विशिष्ट शैली में शिव विवाह का गायन किया।
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इससे पहले केयू के कुलपति डॉ. डीडीएस संधू ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस फेस्टिवल में प्रदेश भर से करीब तीन हजार छात्र छात्राएं शिरकत कर रहे हैं।
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जब छोटी सी बनड़ी फेर्यां मैं जकड़ी...
आडिटोरियम में हरियाणवी पॉप सांग का आयोजन किया गया। पाश्चात्य संगीत व वेशभूषा के साथ रंग बिरंगी रोशनियों के बीच हरियाणवी लोक गीत दर्शकों को बांधने में सफल रहा। सबसे पहले मंच पर डीएवी गर्ल्स कॉलेज यमुनानगर की टीम ने दूल्हा दुल्हन की वेषभूषा के साथ छोटी सी बनड़ी फेर्यां मैं जकड़ी, थम ज्याए क्यूं ना जी सोने की तगड़ी........के साथ धमाल मचाया।
इस प्रस्तुति पर मंच पर आए तो हजारों दर्शकों से भरा आडिटोरियम तालियों की गूंज उठा। इसके साथ ही यूटीडी कुवि की टीम ने मोबाई आली छोरी गजब करगी..., जींद के सीआर किसान कॉलेज की टीम ने अपनी प्रस्तुति कुछ यूं दी...इस डालां नजर मिलाई रे, वा छोरी नजर मिलगी.....।
दोहपर बाद तक प्रस्तुतियों का रंग यूं ही जमा रहा। ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी स्किट के माध्यम से ज्वलंत समस्याओं पर जम कर कटाक्ष किए गए। इसके साथ ही हरियाणी चुटकुलों ने भी दर्शकों को खूब गुदगुदाया। रत्नावली के पहले दिन रेडियो मिर्ची से आए डीजे कैंडी ने हरियाणवी लोक गीतों को धूम धड़ाके के साथ मिक्स कर के प्रस्तुत किया। उन्होंने आडिटोरियम हाल में खचाखच भरे दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
स्किट में आशाराम बापू पर व्यंग्य
स्किट में 20 टीमों ने अपने नाम दर्ज करवाए। देर शाम तक प्रस्तुतियां चलती रही। सबसे पहले पानीपत के एसडी कॉलेज की टीम ने अपनी प्रस्तुति इसा देख्या सुपना दी। उसके पश्चात गुरुनानक खालसा कॉलेज यमुनानगर की टीम ने ‘माणस कड़ै गए नाम सै’ अपनी स्किट पेश की। जुलाना के जेबीएम कॉलेज की टीम ने देशी फिल्म इंडस्ट्री के नाम से अपनी प्रस्तुति दी। आरके एसडी कॉलेज कैथल की टीम ने पर्दाफाश के माध्यम से आज के नकली संतों पर कटाक्ष किया।
भ्रष्टाचार आदि ज्वलंत समस्याओं पर चिंतन
सीनेट हाल में आयोजित हरियाणवी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें दो दर्जन के करीब प्रतिभागियों ने भागीदारी की। यूटीडी, कैथल, भिवानी व रोहतक आदि क्षेत्रों से पहुंचे युवा प्रतिभागियों ने अपने विचारों से सबको उद्वेलित कर दिया। प्रतिभागियों ने कन्या भ्रूण हत्या पर व्यंग्य के माध्यम से लोक गीत को कुछ यूं उल्टा कि बाबू देश जांदे प्रदेश जाईयों, मेरी खातर छोरी....., इसके साथ ही समाज के परिवर्तन की जिम्मेदारी भी युवाओं के कंधों पर डालने का प्रयास व्याख्यानों के माध्यम से किया गया। यही नहीं भ्रष्टाचार को आम व नींबू की तरह आचार की संज्ञा देते हुए ऐसा लत डालने वाला आचार बताया कि इसकी आदत बनने के बाद छोड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। इसके साथ ही भ्रष्टाचारी व बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी समस्या बताया गया।