{"_id":"69a4a94b53b4cf43d90be9ad","slug":"colors-were-made-from-tesu-flowersthe-courtyard-used-to-smell-good-karnal-news-c-338-1-kn11007-128719-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: टेसू के फूलों से बनाते थे रंग...महकता था आंगन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: टेसू के फूलों से बनाते थे रंग...महकता था आंगन
Mon, 02 Mar 2026 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 02 Mar 2026 02:32 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। होली का नाम लेते ही आज रंगों के पैकेट, डीजे की धुन और बाजार की रौनक आंखों के सामने आती है। पुराने जमाने में होली का उल्लास अलग ही था। सब घर का होता था। रंग टेसू के फूलों से बनाते थे। मिठाई भी घर पर ही बनी होती। गुझिया, बेसन के सेव और उनको गुड़ से बांधकर बनाए गए लड्डू। बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि होली का त्योहार पूरे गांव का एकत्र होने का खास दिन हुआ करता था। होली के दो दिन पहले से फाग के गीत गाए जाते थे। बुजुर्ग महिलाओं की यादों में आज भी वह होली जीवंत है।
विज्ञापन
करनाल। होली का नाम लेते ही आज रंगों के पैकेट, डीजे की धुन और बाजार की रौनक आंखों के सामने आती है। पुराने जमाने में होली का उल्लास अलग ही था। सब घर का होता था। रंग टेसू के फूलों से बनाते थे। मिठाई भी घर पर ही बनी होती। गुझिया, बेसन के सेव और उनको गुड़ से बांधकर बनाए गए लड्डू। बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि होली का त्योहार पूरे गांव का एकत्र होने का खास दिन हुआ करता था। होली के दो दिन पहले से फाग के गीत गाए जाते थे। बुजुर्ग महिलाओं की यादों में आज भी वह होली जीवंत है।