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फल-सब्जियों के सुरक्षित भंडारण की योजना को लगा पलीता
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कर्मबीर लाठर
करनाल। शहर में फल-सब्जियों के सुरक्षित भंडारण की महत्वाकांक्षी योजना परवान चढ़ने से पहले ही धराशायी हो गई। कारण कि सरकार और निजी कंपनियों ने इसे चलाने में रुचि नहीं दिखाई। इस कारण करीब 13 साल से इसमें ताले लटके हैं और कोल्ड स्टोरेज के लिए 50 लाख की लागत से निर्मित भवन और शेड खंडहर में तब्दील हो रहा है। वहीं कोल्ड स्टोरेज के अंदर लगी मशीनें जंग खा रही और धूल फांक रही हैं। दूसरी ओर करनाल वासियों को फल-सब्जियां पड़ोसी जिले पानीपत में ले जाकर स्टोर करना पड़ रहा हैं।
मार्केटिंग बोर्ड हरियाणा ने नई फल-सब्जी मंडी के समीप बजीदा रोड पर वर्ष 2005-06 में कोल्ड स्टोर का निर्माण करवाया था, ताकि यहां के किसानों और आढ़तियों को इसका लाभ मिल सके। ठेकेदार के माध्यम से तीन साल तक इसका संचालन भी किया गया, लेकिन ठेकेदार के जवाब देने के बाद प्रशासन और शासन ने इसकी सुध नहीं ली। अब स्थिति यह है कि कोल्ड स्टोरेज परिसर जंगल में तब्दील हो चुका है और इसमें लगी मशीनरी कबाड़ हो रही है। परिसर में रखे तीन बड़े जनरेटर जंग लगने से खराब हो चुके हैं। अलबत्ता बंद स्टोर की रखवाली के लिए तीन चौकीदार हैं, जिनको हर माह मार्केट कमेटी की ओर से मानदेय दिया जाता है। दूसरी ओर कोल्ड स्टोरेज के अभाव में यहां के आढ़तियों-किसानों और अन्य जरूरतमंदों को फल-सब्जियां स्टोर करने के लिए पानीपत ले जाना पड़ता है।
कोल्ड स्टोरेज में सुविधा
कोल्ड स्टोर में 25 मीट्रिक टन क्षमता के चार कोल्ड रूम व पांच एमटी क्षमता के दो प्री-कूलर रूम बनाए गए थे। दस एमटी क्षमता के तीन राइपनिंग रूम बनाए गए थे जिनमें फल पकते थे। शेड के बाहर तीन बड़े जेनरेटर व कैपेस्टर पैनल लगे हुए हैं।
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उत्पादन का 30 प्रतिशत हिस्सा हो जाता है खराब
फल-सब्जियों के कुल उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा ग्रेडिंग, पैकिंग, सही परिवहन व सुरक्षित भंडारण की कमी से खराब हो जाता है। इस उत्पादन को बचाकर हम आबादी के एक बड़े हिस्से में आपूर्ति कर सकते हैं। इसके लिए सरकार को ठोस योजना बनानी चाहिए।
- डा. एसपी तोमर, उपाध्यक्ष, फार्मर प्रोड्यूसर्स आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया
कोल्ड स्टोर का शेड, भवन इत्यादि ढांचे पर करीब 50 लाख रुपये की लागत आई थी। हमारा प्रभाग केवल भवन की देखरेख करता है। फिलहाल कोल्ड स्टोरेज के देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी मार्केट कमेटी की है।
-- राजकुमार गर्ग, उपमंडल अधिकारी, मार्केटिंग बोर्ड।
यह कोल्ड स्टोर उनके कार्यकाल से पहले बना था। इस पर कितनी लागत आई थी यह जांच करके बताने में समय लगेगा। इसके हालात के बारे में मंडी सचिव ही बता सकते हैं।
-- अभिषेक, उपमंडल अधिकारी, इलेक्ट्रिकल डिविजन, मार्केटिंग बोर्ड
शुरुआती चरण में स्टोर का संचालन ठेकेदार के मार्फत हुआ था। बाद में इसे ठेके पर लेने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई। मार्केट कमेटी किसी भी इच्छुक को इसे ठेके पर देने के लिए तैयार है।
-- हकीकत राय, सचिव, मार्केट कमेटी, करनाल।
स्टोर बनाने पर वर्तमान अनुमानित खर्च
पांच हजार मीट्रिक टन आलू का कोल्ड स्टोर बनाने पर चार करोड़ लागत आती है। सब्जी-फल के कोल्ड स्टोर पर 60 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन, केले का राइपनिंग चेंबर बनाने पर एक लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन तथा फल-सब्जी के चेंबर बनाने पर दस हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन लागत आती है।
डा. मदनलाल, जिला उद्यान अधिकारी।
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करनाल। शहर में फल-सब्जियों के सुरक्षित भंडारण की महत्वाकांक्षी योजना परवान चढ़ने से पहले ही धराशायी हो गई। कारण कि सरकार और निजी कंपनियों ने इसे चलाने में रुचि नहीं दिखाई। इस कारण करीब 13 साल से इसमें ताले लटके हैं और कोल्ड स्टोरेज के लिए 50 लाख की लागत से निर्मित भवन और शेड खंडहर में तब्दील हो रहा है। वहीं कोल्ड स्टोरेज के अंदर लगी मशीनें जंग खा रही और धूल फांक रही हैं। दूसरी ओर करनाल वासियों को फल-सब्जियां पड़ोसी जिले पानीपत में ले जाकर स्टोर करना पड़ रहा हैं।
मार्केटिंग बोर्ड हरियाणा ने नई फल-सब्जी मंडी के समीप बजीदा रोड पर वर्ष 2005-06 में कोल्ड स्टोर का निर्माण करवाया था, ताकि यहां के किसानों और आढ़तियों को इसका लाभ मिल सके। ठेकेदार के माध्यम से तीन साल तक इसका संचालन भी किया गया, लेकिन ठेकेदार के जवाब देने के बाद प्रशासन और शासन ने इसकी सुध नहीं ली। अब स्थिति यह है कि कोल्ड स्टोरेज परिसर जंगल में तब्दील हो चुका है और इसमें लगी मशीनरी कबाड़ हो रही है। परिसर में रखे तीन बड़े जनरेटर जंग लगने से खराब हो चुके हैं। अलबत्ता बंद स्टोर की रखवाली के लिए तीन चौकीदार हैं, जिनको हर माह मार्केट कमेटी की ओर से मानदेय दिया जाता है। दूसरी ओर कोल्ड स्टोरेज के अभाव में यहां के आढ़तियों-किसानों और अन्य जरूरतमंदों को फल-सब्जियां स्टोर करने के लिए पानीपत ले जाना पड़ता है।
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कोल्ड स्टोरेज में सुविधा
कोल्ड स्टोर में 25 मीट्रिक टन क्षमता के चार कोल्ड रूम व पांच एमटी क्षमता के दो प्री-कूलर रूम बनाए गए थे। दस एमटी क्षमता के तीन राइपनिंग रूम बनाए गए थे जिनमें फल पकते थे। शेड के बाहर तीन बड़े जेनरेटर व कैपेस्टर पैनल लगे हुए हैं।
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उत्पादन का 30 प्रतिशत हिस्सा हो जाता है खराब
फल-सब्जियों के कुल उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा ग्रेडिंग, पैकिंग, सही परिवहन व सुरक्षित भंडारण की कमी से खराब हो जाता है। इस उत्पादन को बचाकर हम आबादी के एक बड़े हिस्से में आपूर्ति कर सकते हैं। इसके लिए सरकार को ठोस योजना बनानी चाहिए।
- डा. एसपी तोमर, उपाध्यक्ष, फार्मर प्रोड्यूसर्स आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया
कोल्ड स्टोर का शेड, भवन इत्यादि ढांचे पर करीब 50 लाख रुपये की लागत आई थी। हमारा प्रभाग केवल भवन की देखरेख करता है। फिलहाल कोल्ड स्टोरेज के देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी मार्केट कमेटी की है।
-- राजकुमार गर्ग, उपमंडल अधिकारी, मार्केटिंग बोर्ड।
यह कोल्ड स्टोर उनके कार्यकाल से पहले बना था। इस पर कितनी लागत आई थी यह जांच करके बताने में समय लगेगा। इसके हालात के बारे में मंडी सचिव ही बता सकते हैं।
-- अभिषेक, उपमंडल अधिकारी, इलेक्ट्रिकल डिविजन, मार्केटिंग बोर्ड
शुरुआती चरण में स्टोर का संचालन ठेकेदार के मार्फत हुआ था। बाद में इसे ठेके पर लेने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई। मार्केट कमेटी किसी भी इच्छुक को इसे ठेके पर देने के लिए तैयार है।
-- हकीकत राय, सचिव, मार्केट कमेटी, करनाल।
स्टोर बनाने पर वर्तमान अनुमानित खर्च
पांच हजार मीट्रिक टन आलू का कोल्ड स्टोर बनाने पर चार करोड़ लागत आती है। सब्जी-फल के कोल्ड स्टोर पर 60 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन, केले का राइपनिंग चेंबर बनाने पर एक लाख रुपये प्रति मीट्रिक टन तथा फल-सब्जी के चेंबर बनाने पर दस हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन लागत आती है।
डा. मदनलाल, जिला उद्यान अधिकारी।