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बादलों ने उड़ाई किसानों की नींद
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आसमान में घिरे काले बादलों ने किसानों की धड़कन बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। दूसरी ओर अनाज मंडियों में लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ा है। ऐसे में बारिश से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।
एनडीआरआई में जिला कृषि मौसम सेवा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि अगले चौबीस घंटों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। आठ और नौ अक्तूबर को जिले में कुछ स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार मौसम धीमी गति से करनाल व आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। ऐसा लो प्रेशर एरिया के कारण हो रहा है, जिसमें कहीं-कहीं कुछ देर के लिए भारी बारिश भी संभव है। हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि धान की कटाई करते समय वह बदलते मौसम का खास ध्यान रखें। कटाई के बाद धान के भंडारण की उचित व्यवस्था करें। सरसों की बिजाई के लिए खेतों को तैयार करें और मौसम को देखते हुए बिजाई रोक दें। इधर, शुक्रवार को बादलों की आवाजाही ने किसानों की नींद उड़ा दी है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जो धान बेचने के लिए मंडियों में हैं और खुले में ढेरी लगाकर रखवाली कर रहे हैं। बारिश होने पर उनका धान भीगेगा तो बड़ा नुकसान हो सकता है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
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एनडीआरआई में जिला कृषि मौसम सेवा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि अगले चौबीस घंटों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। आठ और नौ अक्तूबर को जिले में कुछ स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार मौसम धीमी गति से करनाल व आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। ऐसा लो प्रेशर एरिया के कारण हो रहा है, जिसमें कहीं-कहीं कुछ देर के लिए भारी बारिश भी संभव है। हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा रह सकती है। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि धान की कटाई करते समय वह बदलते मौसम का खास ध्यान रखें। कटाई के बाद धान के भंडारण की उचित व्यवस्था करें। सरसों की बिजाई के लिए खेतों को तैयार करें और मौसम को देखते हुए बिजाई रोक दें। इधर, शुक्रवार को बादलों की आवाजाही ने किसानों की नींद उड़ा दी है। बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जो धान बेचने के लिए मंडियों में हैं और खुले में ढेरी लगाकर रखवाली कर रहे हैं। बारिश होने पर उनका धान भीगेगा तो बड़ा नुकसान हो सकता है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है।
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