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कोरोना कर्फ्यू का असर: ग्राहक न होने से 50 प्रतिशत तक गिरा शहर का कपड़ा बाजार
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पिछले वर्ष लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए कपड़ा बाजार को इस बार अच्छे लाभ की उम्मीद थी। लेकिन एक बार फिर कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कुछ दिन पहले से नाइट कर्फ्यू के तहत शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक बाजार बंद करने के आदेश हैं वहीं कोरोना के डर से लोगों ने खरीदारी कम कर दी है। इस कारण शहर का कपड़ा व्यापार एक बार फिर 50 फीसदी तक गिर गया है। दुकानदारों का कहना है कि गर्मी का सीजन शुरू हो चुका लेकिन ग्राहक नहीं आ रहे। पिछले साल लॉकडाउन के चलते गर्मी का माल बिना बिके पड़ा रहा। जिसे बाद में आधे से भी कम दाम में बेचना पड़ा था। इस साल भी गर्मी का माल पहले ही मंगवा लिया था जो कि अब स्टॉक में रखना पड़ रहा है। कोरोना से पहले व्यापारी सूरत, मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, बैंगलुरू, कोलकाता और लुधियाना से कपड़ा मंगवाते थे। लेकिन अब इन जगहों से अधिक सामान मंगवाना बंद कर दिया है। मांग के अनुसार ही सीमित कपड़े मंगवाए जा रहे हैं।
ऑनलाइन खरीदारी में नहीं दिखाई दिलचस्पी
कुछ दुकानदारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से कपड़ा बेचने की कोशिश की। व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों को कपड़ा खरीदने के ऑफर भी दिए लेकिन उन्होंने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ग्राहकों का कहना है कि कपड़े की पहचान ऑनलाइन नहीं हो सकती इसलिए किसी ने भी ऑनलाइन खरीदारी नहीं की।
सूरत से मंगवाते थे माल
शहर के अधिकतर दुकानदार सूरत से ही कपड़े मंगवाते थे। लेकिन अब कारखानों में कपड़ा उत्पादन ही बंद हो गया है। कोरोना काल में कपड़ों की बिक्री ज्यादा न होने से हमें पुराना माल ही आधे से कम दाम में बेचना पड़ रहा है। केवल 20 प्रतिशत खरीदार ही नए कपड़ों की मांग करते हैं। उनकी मांगों के अनुसार हम रूटीन में केवल उतना ही माल मंगवाते हैं जो कि बिक सके।
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-सचिन सिंघला, विक्रेता
शादियों के सीजन से थी उम्मीद, वह भी टूटी
इस बार शादियों के सीजन में शादियां तो हुईं लेकिन हमारे कपड़ों की बिक्री नहीं हो पाई। पहले शादियों के सीजन में परिवार का एक सदस्य अपने लिए करीब चार से पांच जोड़ी कपड़े खरीद ही लेता था लेकिन इस बार एक-एक जोड़ी कपड़े ही खरीदे। इतना नुकसान पहले कभी नहीं हुआ।
-सुनील सिंह, कपड़ा दुकानदार
कोरोना की पहली लहर से अभी बाजार ठीक से उबर भी नहीं पाया था कि फिर कोरोना की दस्तक ने काम चौपट कर दिया है। मैंने इस गर्मी के लिए बढ़िया माल एडवांस में ऑर्डर कर लिया था लेकिन अब लगता है फिर से पिछले साल की तरह ही माल बिना बिके ही रह जाएगा। इस साल भी व्यापार में बहुत नुकसान होता नजर आ रहा है।
-राम मोहन, विक्रेता
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ऑनलाइन खरीदारी में नहीं दिखाई दिलचस्पी
कुछ दुकानदारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से कपड़ा बेचने की कोशिश की। व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों को कपड़ा खरीदने के ऑफर भी दिए लेकिन उन्होंने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ग्राहकों का कहना है कि कपड़े की पहचान ऑनलाइन नहीं हो सकती इसलिए किसी ने भी ऑनलाइन खरीदारी नहीं की।
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सूरत से मंगवाते थे माल
शहर के अधिकतर दुकानदार सूरत से ही कपड़े मंगवाते थे। लेकिन अब कारखानों में कपड़ा उत्पादन ही बंद हो गया है। कोरोना काल में कपड़ों की बिक्री ज्यादा न होने से हमें पुराना माल ही आधे से कम दाम में बेचना पड़ रहा है। केवल 20 प्रतिशत खरीदार ही नए कपड़ों की मांग करते हैं। उनकी मांगों के अनुसार हम रूटीन में केवल उतना ही माल मंगवाते हैं जो कि बिक सके।
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-सचिन सिंघला, विक्रेता
शादियों के सीजन से थी उम्मीद, वह भी टूटी
इस बार शादियों के सीजन में शादियां तो हुईं लेकिन हमारे कपड़ों की बिक्री नहीं हो पाई। पहले शादियों के सीजन में परिवार का एक सदस्य अपने लिए करीब चार से पांच जोड़ी कपड़े खरीद ही लेता था लेकिन इस बार एक-एक जोड़ी कपड़े ही खरीदे। इतना नुकसान पहले कभी नहीं हुआ।
-सुनील सिंह, कपड़ा दुकानदार
कोरोना की पहली लहर से अभी बाजार ठीक से उबर भी नहीं पाया था कि फिर कोरोना की दस्तक ने काम चौपट कर दिया है। मैंने इस गर्मी के लिए बढ़िया माल एडवांस में ऑर्डर कर लिया था लेकिन अब लगता है फिर से पिछले साल की तरह ही माल बिना बिके ही रह जाएगा। इस साल भी व्यापार में बहुत नुकसान होता नजर आ रहा है।
-राम मोहन, विक्रेता