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Karnal News: शहर की 38.50 करोड़ से सुधरेगी पेयजल व्यवस्था
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देव शर्मा
करनाल। शहर की पेयजलापूर्ति व्यवस्था को अब एक कंट्रोल रूम या फिर मोबाइल फोन से नियंत्रित करने की तैयारी है। इसके लिए स्काॅडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजीशन) परियोजना शुरू की जा रही है। जिस पर 38.50 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके शुरू हो जाने के बाद आपके घर में कब कितना पानी जा रहा है, उसकी गुणवत्ता क्या है, एक क्लिक करते ही पता चल जाएगा।
साथ ही कौन सा ट्यूबवेल कितना पानी दे रहा है, किस क्षेत्र में पानी की खपत कितनी है, कौन सा बूस्टर स्टेशन कितना पानी आगे बढ़ा रहा है। ये भी पता चल सकेगा। उपभोक्ताओं को शुद्ध पानी की उपलब्धता के साथ-साथ सबसे बड़ा फायदा ये भी होगा कि यदि उनके घर की पेयजलापूर्ति बाधित होती है तो स्वत: ही नियंत्रण कक्ष और संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के पास एसएमएस चला जाएगा और कर्मचारी उसे ठीक कर देगा।
मई या जून से इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि स्कॉडा से अधिकारियों ने शहर में सर्वे का प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है। जिसके तहत बेसिक डाटा जुटाया जा रहा है। निगम ने योजना को अनुमोदित कर दिया है। स्कॉडा को पूरा करने के लिए समय तो अक्तूबर-2023 तक का है, लेकिन निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि इस परियोजना को तीन-चार माह के अंदर यानी अगस्त 2023 तक ही पूरा कर लिया जाएगा। इस परियोजना से शहर के हजारों पेयजल उपभोक्ताओं की दिक्कतें खत्म हो जाएंगी और शुद्ध पानी मिलेगा।
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नगर निगम क्षेत्र में हैं चार ओवरहेड टैंक
स्कॉडा अधिकारियों की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार नगर निगम करनाल क्षेत्र में मौजूदा समय में चार ओवरहेड टैंक हैं। जिनसे पानी स्टोर करके घरों को सप्लाई किया जाता है। इसके साथ-साथ 172 ट्यूबवेल भी हैं, जिनमें से अधिकतर से सीधे पेयजलापूर्ति की जा रही है। जिन क्षेत्रों में ऊंचाई वाले या कम प्रेशर वाले क्षेत्रों में पानी की दिक्कत है, उन क्षेत्र में तीन बूस्टर स्टेशन भी संचालित किए जा रहे हैं, जो पानी के प्रेशर को तेज करके घरों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
स्कॉडा का प्रथम चरण
स्कॉडा के कार्यकारी अभियंता नीशू कुमार ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में सभी ट्यूबवेलों, ओवरहेड टैंक और सभी बूस्टर स्टेशनों को जोडा़ जाएगा। यहां से किस गुणवत्ता का पानी सप्लाई हो रहा है। कितना पानी जा रहा है और कितनी खपत हो रही है। ये सभी जानकारी नगर निगम स्थित नियंत्रण कक्ष में मिलती रहेगी और उसकी लगातार मॉनीटरिंग होती रहेगी। इन सभी स्थानों पर सेंसर लगाए जाएंगे, जो स्काॅडा प्रणाली में संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के फोन पर एसएमएस भेजेंगे। अलार्म बजाएंगे।
स्कॉडा का दूसरा चरण
स्कॉडा परियोजना का पहला चरण पूरा होने के बाद दूसरा चरण घरों की पाइप लाइन पर सेंटर लगाने का होगा। ओवरहेड टैंक, बूस्टर स्टेशन या ट्यूबवेल से घरों तक कितनी और किस गुणवत्ता का पानी पहुंच रहा है, इसके लिए भी घरों तक पाइप लाइन पर भी सेंसर लगाए जाएंगे। यदि किसी घर में दूषित पानी गया या फिर पेयजलापूर्ति बाधित होती है तो उसी समय सेंसर के माध्यम से संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के मोबाइल फोन पर व नियंत्रण कक्ष में अलार्म बज उठेगा। संबंधित कर्मचारी समस्या का समाधान करेगा।
स्काॅडा परियोजना की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संभवत: अगले महीने से ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पेयजल मूलभूत जरूरत है। सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सब कुछ एक ही स्थान से नियंत्रित किया जा सकेगा। पानी की शुद्धता, उपलब्धता से लेकर खपत तक पूरी जानकारी हर पल रहेगी। जैसे ही कहीं कोई गड़बड़ी हुई तो तत्काल मैसेजिंग से उसे दुरुस्त किया जा सकेगा। इसलिए बिना उपभोक्ता की शिकायत के ही संबंधित अधिकारी, कर्मचारी को तत्काल जानकारी हो जाएगी कि कहां खराबी है। शुद्ध पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाली प्रणाली विकसित हो जाएगी। जिसका सीधा फायदा शहरवासियों को होगा।
- अभिषेक मीणा, निगमायुक्त, करनाल।
स्कॉडा के तहत डाटावेश कार्य होगा। हर जानकारी नियंत्रण कक्ष को रहेगी। इतना ही नहीं, ये पूरा सिस्टम मोबाइल पर भी रहेगा। संबंधित अधिकारी, कर्मचारी अपने मोबाइल फोन से ही शहर के किसी भी ट्यूबवेल की मोटर चालू या बंद कर सकेंगे। सिस्टम में कहीं भी खराबी की सूचना पलक झपकते ही मिल जाएगी। इसके बाद समस्या का समाधान भी समय पर कर दिया जाएगा। इसका लाभ शहर के हर घर को मिलेगा।
- नीशू कुमार, कार्यकारी अभियंता, स्कॉडा करनाल
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करनाल। शहर की पेयजलापूर्ति व्यवस्था को अब एक कंट्रोल रूम या फिर मोबाइल फोन से नियंत्रित करने की तैयारी है। इसके लिए स्काॅडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजीशन) परियोजना शुरू की जा रही है। जिस पर 38.50 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके शुरू हो जाने के बाद आपके घर में कब कितना पानी जा रहा है, उसकी गुणवत्ता क्या है, एक क्लिक करते ही पता चल जाएगा।
साथ ही कौन सा ट्यूबवेल कितना पानी दे रहा है, किस क्षेत्र में पानी की खपत कितनी है, कौन सा बूस्टर स्टेशन कितना पानी आगे बढ़ा रहा है। ये भी पता चल सकेगा। उपभोक्ताओं को शुद्ध पानी की उपलब्धता के साथ-साथ सबसे बड़ा फायदा ये भी होगा कि यदि उनके घर की पेयजलापूर्ति बाधित होती है तो स्वत: ही नियंत्रण कक्ष और संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के पास एसएमएस चला जाएगा और कर्मचारी उसे ठीक कर देगा।
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मई या जून से इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि स्कॉडा से अधिकारियों ने शहर में सर्वे का प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है। जिसके तहत बेसिक डाटा जुटाया जा रहा है। निगम ने योजना को अनुमोदित कर दिया है। स्कॉडा को पूरा करने के लिए समय तो अक्तूबर-2023 तक का है, लेकिन निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि इस परियोजना को तीन-चार माह के अंदर यानी अगस्त 2023 तक ही पूरा कर लिया जाएगा। इस परियोजना से शहर के हजारों पेयजल उपभोक्ताओं की दिक्कतें खत्म हो जाएंगी और शुद्ध पानी मिलेगा।
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नगर निगम क्षेत्र में हैं चार ओवरहेड टैंक
स्कॉडा अधिकारियों की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार नगर निगम करनाल क्षेत्र में मौजूदा समय में चार ओवरहेड टैंक हैं। जिनसे पानी स्टोर करके घरों को सप्लाई किया जाता है। इसके साथ-साथ 172 ट्यूबवेल भी हैं, जिनमें से अधिकतर से सीधे पेयजलापूर्ति की जा रही है। जिन क्षेत्रों में ऊंचाई वाले या कम प्रेशर वाले क्षेत्रों में पानी की दिक्कत है, उन क्षेत्र में तीन बूस्टर स्टेशन भी संचालित किए जा रहे हैं, जो पानी के प्रेशर को तेज करके घरों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
स्कॉडा का प्रथम चरण
स्कॉडा के कार्यकारी अभियंता नीशू कुमार ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में सभी ट्यूबवेलों, ओवरहेड टैंक और सभी बूस्टर स्टेशनों को जोडा़ जाएगा। यहां से किस गुणवत्ता का पानी सप्लाई हो रहा है। कितना पानी जा रहा है और कितनी खपत हो रही है। ये सभी जानकारी नगर निगम स्थित नियंत्रण कक्ष में मिलती रहेगी और उसकी लगातार मॉनीटरिंग होती रहेगी। इन सभी स्थानों पर सेंसर लगाए जाएंगे, जो स्काॅडा प्रणाली में संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के फोन पर एसएमएस भेजेंगे। अलार्म बजाएंगे।
स्कॉडा का दूसरा चरण
स्कॉडा परियोजना का पहला चरण पूरा होने के बाद दूसरा चरण घरों की पाइप लाइन पर सेंटर लगाने का होगा। ओवरहेड टैंक, बूस्टर स्टेशन या ट्यूबवेल से घरों तक कितनी और किस गुणवत्ता का पानी पहुंच रहा है, इसके लिए भी घरों तक पाइप लाइन पर भी सेंसर लगाए जाएंगे। यदि किसी घर में दूषित पानी गया या फिर पेयजलापूर्ति बाधित होती है तो उसी समय सेंसर के माध्यम से संबंधित अधिकारी, कर्मचारी के मोबाइल फोन पर व नियंत्रण कक्ष में अलार्म बज उठेगा। संबंधित कर्मचारी समस्या का समाधान करेगा।
स्काॅडा परियोजना की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संभवत: अगले महीने से ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। पेयजल मूलभूत जरूरत है। सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि सब कुछ एक ही स्थान से नियंत्रित किया जा सकेगा। पानी की शुद्धता, उपलब्धता से लेकर खपत तक पूरी जानकारी हर पल रहेगी। जैसे ही कहीं कोई गड़बड़ी हुई तो तत्काल मैसेजिंग से उसे दुरुस्त किया जा सकेगा। इसलिए बिना उपभोक्ता की शिकायत के ही संबंधित अधिकारी, कर्मचारी को तत्काल जानकारी हो जाएगी कि कहां खराबी है। शुद्ध पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाली प्रणाली विकसित हो जाएगी। जिसका सीधा फायदा शहरवासियों को होगा।
- अभिषेक मीणा, निगमायुक्त, करनाल।
स्कॉडा के तहत डाटावेश कार्य होगा। हर जानकारी नियंत्रण कक्ष को रहेगी। इतना ही नहीं, ये पूरा सिस्टम मोबाइल पर भी रहेगा। संबंधित अधिकारी, कर्मचारी अपने मोबाइल फोन से ही शहर के किसी भी ट्यूबवेल की मोटर चालू या बंद कर सकेंगे। सिस्टम में कहीं भी खराबी की सूचना पलक झपकते ही मिल जाएगी। इसके बाद समस्या का समाधान भी समय पर कर दिया जाएगा। इसका लाभ शहर के हर घर को मिलेगा।
- नीशू कुमार, कार्यकारी अभियंता, स्कॉडा करनाल